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रक्षा बंधन पर शहीद भाई की प्रतिमा पर राखी बांधती है बहन लादूकंवर

MI Zahir

Publish: Aug 14, 2019 17:56 PM | Updated: Aug 14, 2019 17:56 PM

Jodhpur

जोधपुर.इस बार स्वतंत्रता दिवस ( Independence Day ) और रक्षा बंधन ( Raksha Bandhan ) का मणिकांचन संयोग है। राष्ट्रवाद की भावना से सजा स्वतंत्रता दिवस और भाई-बहन के प्यार से ओतप्रोत रक्षा बंधन एक ही दिन पंद्रह अगस्त ( August 15 ) को मनाया जा रहा है। जोधपुर के बालेसर दुर्गावता गांव में शहीद भंवरसिंह इंदा ( Martyr bhanwar singh Inda ) की सबसे छोटी बहन लादूकंवर ( Ladukanwar ) आज भी अपने भाई की प्रतिमा पर राखी बांधती है।

 

 

जोधपुर.बालेसर.राष्ट्रवाद की भावना से सजा स्वतंत्रता दिवस और भाई-बहन के प्यार से ओतप्रोत रक्षा बंधन एक ही दिन पंद्रह अगस्त ( August 15 ) को मनाया जा रहा है। जोधपुर के बालेसर दुर्गावता गांव में शहीद भंवरसिंह इंदा ( Martyr bhanwar singh Inda ) की सबसे छोटी बहन लादूकंवर ( Ladukanwar ) आज भी अपने भाई की प्रतिमा पर राखी बांधती है। वह आज भी अपने शहीद भाई की प्रतिमा पर राखी बांध कर भाई को याद करती है।
ध्यान रहे कि कारगिल ( kargil ) शहीद भंवरसिंह इंदा 28 जून 1999 को ऑपरेशन मेघदूत के दौरान चार दुश्मनों को मारते हुए शहीद हो गए थे। वे अपने 6 भाइयों और 1 बहन का सबसे बड़ा भाई थे। अपने 7 भाइयों की एकमात्र व सबसे छोटी बहन लादूकंवर की शादी पूरा गांव में हुई है। स्वतंत्रता दिवस एवं रक्षा बंधन दोनों एक साथ त्योहार आने से इस शुभ अवसर पर शहीद भंवर सिंह इंदा की बहन लादूकंवर ने पत्रिका को बताया कि उन्हें गर्व है कि उनका बड़ा भाई देश के लिए शहीद हुआ है, लेकिन दुख है कि जब उनका भाई शहीद हुआ था तब वह सबसे छोटी थी और हम मासूम थे। हमें ठीक से याद भी नहीं है कि अपने बड़े भाई भंवरसिंह इंदा के शहीद होने से पूर्व उनके राखी बांधी थी या नहीं और बड़े भाई ने उनको आशीर्वाद स्वरूप क्या उपहार दिया था। संयोग ऐसा रहा कि जब वह बड़ी हुई और कुछ समझने लगी तब तक उनका भाई देश के लिए शहीद हो चुका था, लेकिन गर्व है कि आज वह शहीद की बहन कहलाती है और अपने गांव और परिवार में सीना तान कर जी रही है।
लादूकंवर ने बताया कि जब भी रक्षाबंधन आता है तब वह अपने मायके आकर बड़े भाई शहीद भंवरसिंह इंदा की छतरी में बनी प्रतिमा पर हाथ पर रक्षा सूत्र बांध कर भाई से देश की रक्षा की उसी तरह अपनी रक्षा की कामना करती ह, प्रार्थना करती है और इस दौरान उनके आंसू छलक पड़ते हैं।

वह नम आंखों से बताती है कि वह अकेली बहन है इसलिए अपने अन्य भाइयों को राखी बांधने से कभी मौका नहीं गंवाती है। साथ ही शहीद की प्रतिमा पर भी हर वर्ष रक्षा सूत्र बांध कर अपना फर्ज निभाती है।

इस वर्ष राखी नहीं मनाएगी
शहीद भंवर सिंह की छोटी बहन लादूकंवर ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि इस वर्ष उनके ससुराल में शोक है, इसलिए वह राखी नहीं मनाएगी, इसलिए अपने भाई शहीद भंवरसिंह की कलाई पर राखी भी नहीं बांध पाएगी।