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सैनी बने रहेंगे बीसीआर के चेयरमैन

Yamuna Shankar Soni

Publish: Aug 19, 2019 23:45 PM | Updated: Aug 19, 2019 23:45 PM

Jodhpur

सैनी बने रहेंगे बीसीआर के चेयरमैन

-बीसीआइ चेयरमैन का आदेश

बार कौंसिल के बहुमत प्राप्त सदस्यों के समूह को लगा झटका

 

जोधपुर(jodhpur).

बार कौंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा (BCI chairman Manan Kumar Mishra) ने बार कौंसिल ऑफ राजस्थान (bar council of rajasthan) के बहुमत प्राप्त सदस्यों के समूह की ओर से गत 17 अगस्त को पारित प्रस्तावों को अप्रभावी घोषित कर दिया है। बीसीआइ चेयरमैन ने अपने आदेश में कहा कि चिरंजीलाल सैनी बीसीआर के चेयरमैन (BCR chairman chirnjilal saini) बने रहेंगे।

बीसीआर के चेयरमैन चिरंजीलाल सैनी की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित कौंसिल की साधारण सभा की विशेष बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई थी।

इसके बाद सैनी ने बैठक स्थगित करने का ऐलान किया, वहीं पंद्रह सदस्यों ने बाद में चेयरमैन पद पर सैयद शाहिद हसन तथा वाइस चेयरमैन पद पर रतनसिंह राव को निर्वाचित करने की घोषणा कर दी थी।

इसे अवैधानिक बताते हुए सैनी ने बीसीआइ में निगरानी याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के बाद बीसीआइ चेयरमैन ने बहुमत प्राप्त सदस्यों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को विधि सम्मत नहीं माना और कहा कि कुछ सदस्य अधिकार हथियाना चाहते हैं।

 

सभी सदस्यों को नोटिस जारी


बीसीआइ चेयरमैन ने बार कौंसिल के सभी सदस्यों व सचिव को नोटिस जारी किए हैं।

बीसीआर सचिव आरपी मलिक से यह जवाब देने को कहा है कि किन स्थितियों में शनिवार की बैठक की कार्यवाही के दो तरह के विवरण लिखे गए और विरोधाभासी प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई।

बीसीआर सचिव को बैठक का मूल रिकॉर्ड सहित बैठक के दौरान सीसीटीवी कैमरे की फुटेज सीडी में पेश करने को कहा गया है। बीसीआइ में अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी।

 

गले की फांस बन सकता है यह आदेश

बीसीआर की शनिवार को आयोजित बैठक में हंगामे और बैठक स्थगित होने के बाद नए पदाधिकारियों के ऐलान को अपने आदेश का हिस्सा बनाते हुए बीसीआइ अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए अपना नजरिया रखा है। उनका आदेश किसी भी पक्ष के लिए गले की फांस बन सकता है।

 

आदेश के प्रमुख बिंदु

1.बैठक के एजेंडे में नौ बिंदु में पदाधिकारियों के चुनाव का कोई बिंदु नहीं था। याचिकाकर्ता ने कहा, उसने न तो इस्तीफा दिया ओर न उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ, तो नए चुनाव का सवाल ही नहीं उठता।

 

2. बीसीआइ चेयरमैन ने पाया कि बैठक स्थगित होने के बाद कुछ सदस्य अलग जगह इक_ा हुए और उन्होंने सचिव ने एक अलग कार्यवाही विवरण लिखवाया। इसमें कहीं यह उल्लेख नहीं है कि बैठक की अध्यक्षता किसने की। हालांकि, दूसरे विवरण में सैनी पर आरोप है कि उन्होंने सदस्यों की मांग की अनदेखी करते हुए पदाधिकारियों के चुनाव का बिंदु एजेंडे से हटवाया। मिश्रा ने अपने ओदश में सैनी के स्पष्टीकरण का उल्लेख किया है।


3.बीसीआइ चेयरमैन ने आदेश में कहा कि बीसीआर के नियमों में पदाधिकारियों के चयन, कार्यकाल, अविश्वास प्रस्ताव आदि की प्रक्रिया दी गई है। कोई भी सदस्य इसकी अनदेखी नहीं कर सकता। प्रतिवादी सदस्य जानते थे कि उनके पास इतना संख्या बल नहीं है कि वह अविश्वास प्रस्ताव ला सके, इसलिए उन्होंने ये दूसरा रास्ता अपनाया। जब बैठक स्थगित हो चुकी थी तो उन्होंने सचिव से दूसरा विवरण लिखवाया कि नए पदाधिकारी चुने गए हैं। सैनी ने इस संबंध में उदयमंदिर थाने में एक प्राथमिकी भी उसी दिन दर्ज करवाई।

 

कब-क्या हुआ


12 जुलाई : कौंसिल की कार्यकारी समिति के सदस्यों ने बैठक आहूत करने की मांग की, जिसकी सूचना सचिव ने चेयरमैन चिरंजीलाल सैनी को दी। उन्होंंने बैठक 10 अगस्त को आहूत करने को कहा।

13 जुलाई : अलसुबह चेयरमैन ने सचिव व अन्य सदस्यों को तीन ईमेल भेजे। पहले ईमेल में सचिव पर पद के दुरुपयोग व अन्य आरोप लगाते हुए अग्रिम आदेश तक कार्य नहीं करने को कहा गया। दूसरे ईमेल में दो कार्मिकों को सचिव का कार्यभार संभालने तथा तीसरे ईमेल में वरिष्ठ सदस्य जगमालसिंह चौधरी को चैक हस्ताक्षरित करने तथा अन्य नियमित कार्य संपादित करने के अधिकार को विड्रा किया गया।

13 जुलाई : कार्यकारी समिति के सदस्यों की आपात बैठक आयोजित, विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल हुए। चेयरमैन द्वारा ईमेल से दिए गए आदेशों को क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए निरस्त करने का निर्णय।

 

20 जुलाई : चेयरमैन सैनी ने कार्यकारी समिति गठित करने का आदेश विड्रा किया। 21 जुलाई को प्रस्तावित बैठक निरस्त की और सचिव को कार्य नहीं करने को कहा।
23 जुलाई : अचानक बीसीआइ चेयरमैन का आदेश सामने आया। 18 जुलाई की तारीख में हस्ताक्षरित यह आदेश सैनी द्वारा दायर रिवीजन पिटिशन की सुनवाई के बाद आया, जिसमें बीसीआइ चेयरमैन ने बीसीआर की कार्यकारी समिति द्वारा 13 जुलाई को पारित प्रस्तावों पर स्थगन आदेश दिया।

 

24 जुलाई : बीसीआर उपाध्यक्ष बंसल, सचिव आरपी मलिक तथा वरिष्ठ सदस्य जगमालसिंह चौधरी ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने अविलंब सुनवाई की मौखिक प्रार्थना मंजूर की, दोपहर में हुई सुनवाई और बीसीआइ के आदेश पर रोक।

5 अगस्त : हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि बीसीआइ सभी पक्षों की सुनवाई के बाद कानून सम्मत आदेश पारित करे, हालांकि क्षेत्राधिकार को लेकर आपत्तियां दर्ज की जा सकेगी।

 

17 अगस्त : साधारण सभा की विशेष बैठक में हंगामा, बैठक स्थगित, बाद में बहुमत प्राप्त समूह के सदस्यों ने नए पदाधिकारियों का ऐलान किया
19 अगस्त : बीसीआइ चेयरमैन ने नए पदाधिकारियों के ऐलान वाले कार्यवाही विवरण को अप्रभावी घोषित।