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बोरवेल सील करने के आदेश, उद्यमियों में हडकम्प

Amit Dave

Publish: Jul 20, 2019 21:21 PM | Updated: Jul 20, 2019 21:21 PM

Jodhpur

- एनजीटी के आदेश के बाद केन्द्रीय भूजल बोर्ड ने जारी की सूची

- जोधपुर नोटिफाइड ब्लॉक में शामिल

जोधपुर।

टेक्सटाइल, स्टील सहित अन्य इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट पानी से जोजरी नदी में हो रहा प्रदूषण उद्यमियों के लिए नई परेशानी का सबब बन गया है। हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के टेक्सटाइल, स्टील सहित अन्य इकाइयों में बिना एनओसी चल रहे बोरवेल को तुरन्त प्रभाव से सील करने के आदेश से उद्यमियों में हड़कम्प मच गया है। एनजीटी के आदेश के बाद केन्द्रीय भूजल बोर्ड वेस्टर्न रीजन के क्षेत्रीय निदेशक की ओर से एक सूची जारी की गई है, जिसमें 111 इकाइयों के बोरवेल सीज करने के आदेश है। वहीं एनजीटी ने अपने १७ मई के आदेश में टेंकर से पानी मंगाने या भेजने पर रोक लगा दी है। अब उद्यमियों के पास डिस्चार्ज पानी को उपचारित कर उपयोग में लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।

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जोधपुर नोटिफाइड ब्लॉक में शामिल

जोधपुर शहर नोटिफाइड ब्लॉक में शामिल है । वर्ष 2011 में मण्डोर ब्लॉक को नोटिफाइड क्षेत्र में शामिल किया गया, जोधपुर शहर मण्डोर ब्लॉक में आता है। एेसे में यहां पेयजल के अलावा बोरवेल खुदाई पूर्ण रूप से अवैध है। आसपास के अतिदोहित क्षेत्र में भी पेयजल व कृषि के लिए ही भूजल का उपयोग किया जा सकता है। औद्योगिक उपयोग के लिए बोरवेल की स्वीकृति नहीं दी जा सकती।

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एनजीटी ने रिपोर्ट मांगी

एनजीटी ने अपने आदेश में केन्द्रीय भूजल बोर्ड वेस्टर्न रीजन के क्षेत्रीय निदेशक को इकाइयों में बिना एनओसी चल रहे बोरवेल को तुरन्त प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए। साथ ही जिन्होंने एनओसी के लिए आवेदन कर दिया, और उनको अभी तक एनओसी नहीें मिली, उनको भी सील करने के आदेश दिए। एनजीटी ने इस संबंध में 2 अगस्त को रिपोर्ट पेश करने के आदेश भी दिए।

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जेपीएनटी की गलती की सजा भुगत रहे उद्यमी

स्टील व टेक्सटाइल इकाइयों से निकलने वाले पानी जोधपुर प्रदूषण निवारण ट्रस्ट (जेपीनएनटी) की पाइप लाइनों से ट्रस्ट तक जाने और वहां पर लगे ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीट होने के बाद जोजरी नदी में छोडऩे का प्रावधान है। कई मामलों में जेपीएनटी की खामियां सामने आ रही है, जिसकी सजा उद्यमियों को भुगतनी पड़ रही है।

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पानी डिस्चार्ज की सही गणना नहीं

टेक्सटाइल इकाइयों में कपड़े धोने के लिए 'जिगरÓ मशीन काम मेें ली जाती है। जेपीएनटी की ओर से एक जिगर मशीन पर करीब डेढ़ से दो केएलडी पानी उपयोग की अनुमति दी गई है। जबकि वास्तविकता यह है कि एक जिगर मशीन पर कपड़े धुलाई के लिए करीब 6-8 केएलडी पानी उपयोग में आ रहा है। इससे इकाइयों से निर्धारित मात्रा से ज्यादा पानी निकलता है। जो जेपीएनटी की पाइपलाइनों से आेवरफ्लो होता रहता है और रीको नाले से सीधे जोजरी में जाता है।

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एनओसी में भिन्नता

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इकाइयों से निर्धारित मात्रा में पानी के उपयोग के लिए एनओसी जारी की जाती है। जबकि जेपीएनटी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जारी एनओसी के अनुरूप एनओसी जारी नहीं करता है।

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जेपीएनटी के पास ही सीटीओ नहीं

एनजीटी के नियमानुसार किसी इकाइ के संचालन के लिए कन्सेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) होना अनिवार्य होता है। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में जेपीएनटी स्वयं बिना सीटीओ ही चल रहा है। इसका सीटीओ जून 2018 में ही पूरा हो गया था। एेसे में जेपीएनटी का संचालन भी नियमानुसार नहीं हो रहा है।

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इनकी सूची हुई जारी

औद्योगिक क्षेत्र---- इकाइ संख्या

एमआइए बासनी --- 69

हैवी इंडस्ट्रियल एरिया-- 18

लाइट इंडस्ट्रियल एरिया- 04

नाकोड़ा इंडस्ट्रियल एरिया- 06

बोरानाडा इंडस्ट्रियल एरिया- 01

बीएनपीएच इंडस्ट्रियल एरिया- 05

नॉन इंडस्ट्रियल एरिया- 07

अदर इंडस्ट्रियल एरिया- 01

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कुल-------------111

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मंत्री से राहत की मांग यहां भूमि में पानी ज्यादा है।भूमिगत पानी का उपयोग नहीं किया गया तो औद्योगिक क्षेत्रों मे परेशानी होगी। वैसे ही यहां पानी व्यर्थ बहाया जाता है। हमने उद्योगों को बचाने के लिए केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावतजी से मिलकर बोरवेल के पानी के उपयोग के एनओसी दिलाने की मांग की है।

जसराज बोथरा, मैनेजिंग ट्रस्टी

जेपीएनटी