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भारत में बढ़ता नाइट शिफ्ट्स में काम करने का चलन!

Jamil Ahmed Khan

Publish: Sep 19, 2019 18:16 PM | Updated: Sep 19, 2019 18:16 PM

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दुनियाभर में शिफ्ट में काम करने का चलन कोई नई बात नहीं है। भारत में भी इसका चलन आजकल जोरों पर है। चाहे वो मेडिकल फील्ड हो, परिवहन, आपातकालीन सेवाएं, रक्षा, पुलिस आदि विभागों में 24 घंटे शिफ्टों में काम चलता है। आजकल नाइट शिफ्ट का चलन दुनियाभर में तो है ही, भारत में भी इसका चलन बढ़ रहा है, खासकर आईटी और बीपीओ कंपनियों में।

दुनियाभर में शिफ्ट में काम करने का चलन कोई नई बात नहीं है। भारत में भी इसका चलन आजकल जोरों पर है। चाहे वो मेडिकल फील्ड हो, परिवहन, आपातकालीन सेवाएं, रक्षा, पुलिस आदि विभागों में 24 घंटे शिफ्टों में काम चलता है। आजकल नाइट शिफ्ट का चलन दुनियाभर में तो है ही, भारत में भी इसका चलन बढ़ रहा है, खासकर आईटी और बीपीओ कंपनियों में। हालांकि, जो उम्मीदवार रात में काम करने के इच्छुक हैं, उनके लिए बड़ी संख्या में नौकरियों के अवसर उपलब्ध हैं। ऐसी नौकरियों में सैलेरी अच्छी मिलती है और यहां तक उन लोगों के लिए भी ये फायदेमंद साबित हो सकती है जो पढ़ाई के साथ साथ परिवार की देखभाल करना चाहते हैं।

अपेक्षाकृत अच्छा वेतन और अपसंस्कृति का हिस्सा बनने का अवसर, भूमंडलीकृत काम का माहौल युवाओं को कॉल सेंटर की ओर आकर्षित करता है। वहीं, महिलाएं भी नाइट शिफ्ट में काम करने की इच्छुक हैं और कर भी रहीं हैं। भारत में कर्नाटक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने महिलाओं को कुछ शर्तों के साथ रात में काम करने की छूट दे दी है। नाइट शिफ्ट में काम करने के कई फायदे होते हैं, जैसे उच्च वेतन और कम सुपरविजन। इसलिए, कई युवा इस शिफ्ट में काम करना बेहद पसंद करते हैं। हालांकि, इस शिफ्ट में काम करने के नुकसान भी हैं।

स्वास्थ्य समस्या
नाइट शिफ्ट में काम आपके स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालती है क्योंकि दिमाग को रात में सोने के लिए प्रोग्राम किया गया है। चूंकि सोने का समय डिस्टर्ब होता है या पूरी तरह बदल जाता है, जिसके चलते शरीर पूरी तरह थका हुआ महसूस करता है। शरीर द्वारा किए गए ये समायोजन तनाव का कारण भी बन सकते हैं। इसके अलावा नाइट शिफ्ट अनियमित दिल की धड़कन और यहां तक दिल के दौरे का कारण बन सकती है क्योंकि तनाव बढऩे के कारण लोगों के दिल की बीमारियों और दिल के दौरे की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।

लाइफस्टाइल पर पड़ता है असर
हालांकि, रात में काम करना बहुत से लोगों के लिए अनुकूल होता है, लेकिन बहुत से लोगा रात में काम नहीं करते हैं। जो लोग रात में काम करते हैं, उनके सामाजिक जीवन पर असर पड़ता है क्योंकि वे रात में काम करते हैं और दिन में सोते हैं जिसके चलते वे अपने परिवार वालों और दोस्तों को समय नहीं दे पाते हैं।

कॅरियर पर पड़ता है असर
भले ही कुछ लोग रात की शिफ्ट में काम करने को बेहतर मानते हो, लेकिन यह कम प्रतिस्पर्धी कामकाजी माहौल के लिए एक कारक भी हो सकता है। यह संभव है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारी उतने प्रतिस्पर्धी नहीं होंगे जितने की दिन में काम करने वाले कर्मचारी।

सुरक्षा
नाइट शिफ्ट में काम करने वालों के लिए सुरक्षा कोई बड़ा मुद्दा नहीं हो, लेकिन देर रात तक काम करना जोखिम भरा हो सकता है।