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'सुपातर बीनणी' से कम नहीं राजस्थान की यह बहू, कर रही 'वीर ससुर' का नाम रोशन

rajesh sharma

Publish: Sep 13, 2019 12:23 PM | Updated: Sep 13, 2019 12:23 PM

Jhunjhunu

राष्ट्रपति भवन में 13 नवम्बर को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन ने उनको वीर चक्र से नवाजा तो तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी खड़े हो गए। चलकर उनके पास गए और अयूब खान को सीने से लगा लिया था। साथ ही कहा था कि भारतीय अयूब से मिलकर उन्हें बहुत गर्व हो रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी उनकी वीरता के कायल थे।

राजेश शर्मा
झुंझुनूं. भारत-पाक के बीच वर्ष 1965 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना के अमरीका निर्मित पैटन टंैकों को उडाने वाले कैप्टन अयूब खान तो अब नहीं रहे, लेकिन उनकी यादें युवा पीढ़ी को सदियों तक प्रेरणा देती रहेंगी। यह प्रेरणा देने का कार्य उनकी पुत्रवधू शबनम कर रही है। वीर चक्र विजेता अयूब खान के नाम से उनके पैतृक गांव नूआं में 'वीर चक्र इंडियन अयूब द्वारÓ का निर्माण उनकी बहू ने करवाया है। इसका लोकार्पण उनकी पुण्यतिथि पर 15 सितम्बर को किया जाएगा। इसके बाद उनकी याद में सेना का एक टैंक जिला मुख्यालय पर लगाया जाएगा। खास बात यह है कि इस द्वार का लोकार्पण कोई मंत्री नहीं, बल्कि उनके अजीज मित्र अमरीका प्रवासी डॉ घासीराम वर्मा करेंगे।


प्रेरणा दायक रहा जीवन

23 जून 1932 को जन्मे अयूब खान 18 साल की उम्र में भारतीय सेना में भर्ती हुए। 1965 के युद्ध में गजब की वीरता दिखाई। पाकिस्तान सेना की ताकत अमरीका निर्मित पैटन टैंक को उडाकर पूरे देश की सुर्खियां बने। पाकिस्तान की सरहद में घुसकर एक टैंक भारत में ले आए थे। उनकी बहादुरी पर 9 सितम्बर 1965 को उन्हें वीर चक्र से सम्मानित करने की घोषणा की गई। इस युद्ध में पाक के राष्ट्रपति अयूब खान थे। इस युद्ध को 'इंडियन अयूब वर्सेज पाकिस्तानी अयूबÓ का नाम भी दिया गया। इसके बाद राजस्थान के पहले मुस्लिम लोकसभा सदस्य बने। केन्द्र में मंत्री भी रहे। लेकिन जीवन सादगी से भरा रहा।

लौटा दिया था जयपुर में मिला भूखंड

जयपुर स्थित शास्त्री नगर में करीब 24 सौ वर्गगज में मिला सरकारी भूखंड उन्होंने वापस सरकार को यह कहकर सौंप दिया था कि यह जमीन देश हित या जरूरतमंद के काम में आए। केन्द्र में मंत्री रहने के बावजूद उन्होंने अपना पूरा जीवन गांव नुआं में ही बिताया। उनका छोटा सा घर खुद उनकी सादगी बयां करता है। उन्होंने जिले के विकास के लिए अनेक कार्य करवाए। केवीके आबूसर व स्टेडियम की स्थापना,एसटीडी/आइएसडी टेलीफोन एक्सचेंज, टीवी ट्रंासमीटर लगाए कई ट्रेन चलवाई इसके अलावा भी अनेक कार्य करवाए।
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अब लाएंगे टैंक
जब अयूब खान जिंदा थे, तब ही उनके पुत्र का निधन हो गया था। पुत्रवधू शबनम ने बताया कि उसका सपना है कि युवा पीढ़ी अयूब खान के जीवन से प्रेरणा ले। इसके लिए उनका अगला सपना है कि उनकी याद में भारतीय सेना का एक टैंक झुंझुनूं जिला मुख्यालय पर लगाया जाए। इसकी तैयारियां चल रही है। जिला मुख्यालय पर एक स्मारक भी बनाया जाएगा।
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सम्मान में खड़े हो गए थे प्रधानमंत्री
राष्ट्रपति भवन में 13 नवम्बर को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन ने उनको वीर चक्र से नवाजा तो तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी खड़े हो गए। चलकर उनके पास गए और अयूब खान को सीने से लगा लिया था। साथ ही कहा था कि भारतीय अयूब से मिलकर उन्हें बहुत गर्व हो रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी उनकी वीरता के कायल थे।
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बेटियों को शिक्षित कर ही बहू
कैप्टन की पुत्रवधू अब महिला शिक्षा की अलख जगा रही है। वे गली मोहल्लों में जाकर मुस्लिम बेटियों व उनकी माताओं को शिक्षा का महत्व बता रही है। उनके प्रयासों से जेके मोदी राजकीय बालिका उमावि झुंझुनूं में उर्दू पढऩे वाली बेटियों की संख्या 500 पार हो गई है।