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राजस्थान के झुंझुनूं के एक बाबू ने पैसे लेकर बेच दिए एसडीएम के अधिकार

rajesh sharma

Publish: Aug 07, 2019 12:05 PM | Updated: Aug 07, 2019 12:05 PM

Jhunjhunu

सुनील ने पुलिस को बताया उसे एसडीएम कार्यालय के पोर्टल की आइडी एवं पासवर्ड कार्यालय न्याय शाखा में कार्यरत कार्मिक योगेश कृष्णियां ने पैसे लेकर दी थी, जिससे वह यह फर्जी कार्य कर रहा था। जानकारी के अनुसार योगेश कृष्णियां पूर्व में एसडीएम शाखा में कार्यरत था।

 

झुंझुनूं. कलक्टे्रट में न्याय शाखा में कार्यरत लिपिक योगेश कृष्णियां ने इमित्र संचालक को एसडीएम कार्यालय की पोर्टल आइडी व पासवर्ड बता दिए। जिसके बाद इमित्र संचालक ने करीब छह माह से अनाधिकृत रूप से लगभग 120-125 फर्जी फार्मो को ऑनलाइन कर दिया। पता चलने पर एसडीएम सुरेंद्र यादव ने कोतवाली में एफआइआर दर्ज करवाई है।
एसडीएम यादव ने बताया कि खाद्य सुरक्षा की ऑनलाइन अपीलों का निस्तारण पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। यह पोर्टल आइडी एवं पासवर्ड से लॉगिन किया जाता है। इमित्र संचालक सुनील कुमार कई दिनों से उक्त आइडी एवं पासवर्ड चुराकर उसका गलत उपयोग कर रहा था। पूछताछ के दौरान सुनील ने बताया कि उसके द्वारा पिछले 5-6 माह में अनाधिकृत रूप से लगभग 120-125 फर्जी फार्मो को ऑनलाइन किया गया है। सुनील ने पुलिस को बताया उसे एसडीएम कार्यालय के पोर्टल की आइडी एवं पासवर्ड कार्यालय न्याय शाखा में कार्यरत कार्मिक योगेश कृष्णियां ने पैसे लेकर दी थी, जिससे वह यह फर्जी कार्य कर रहा था। जानकारी के अनुसार योगेश कृष्णियां पूर्व में एसडीएम शाखा में कार्यरत था। सुनील कुमार के विरूद्घ विभिन्न धाराओं के तहत फर्जी कार्य करने, सरकारी कार्यालय की आईडी के मिसयूज करने की एफआईआर दर्ज करवाई गई है। उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है। बाद में उसे जेल भेज दिया। इधर लिपिक योगेश के खिलाफ भी जांच शुरू कर दी गई है।
बाकरा मोड़ पर दुकान
आरोपी सुनील की इ मित्र की दुकान पर पहले बाकरा मोड़ पर थी।फिर उसने गुप्त रूप से अपने घर पर इ मित्र का संचालन कर रहा था।

इनका कहना है
सुनील खाद्य सुरक्षा योजना में एंट्री करने पर एक व्यक्ति से दो हजार रुपए वसूल रहा था।उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया है।सुनील ने जो कार्य किया, उसकी जांच करवाई जा रही है।
-सुरेन्द्र यादव, एसडीएम


इ मित्रों का सच जानकार हैरान रह जाएंगे आप

झुंझुनूं. बेरोजगारी भत्ते के आवेदनों में आए दिन सामने आ रही अनियमितताओं को देखते हुए जिला कलक्टर रवि जैन के निर्देशानुसार रोजगार कार्यालय द्वारा गठित टीम ने गुढागौढजी एवं उदयपुरवाटी क्षेत्र में इमित्रों का निरीक्षण किया। जिसमें कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आई। जिला रोजगार अधिकारी दयानन्द यादव ने बताया कि गुढ़ा व उदयपुरवाटी में स्थित इ-मित्र सेवा केन्द्रों का औचक निरीक्षण किया गया। गुढागौढजी के कविता फोटोस्टेट एण्ड ऑफसेट पर राउमावि गुढागौढजी के व्याख्याता की मुहर, नोटेरी पब्लिक मदनसिंह के 17 आय घोषणा पत्र, नोटेरी पब्लिक श्रीकान्त जोशी द्वारा सत्यापित 12 आय घोषणा पत्र बगैर दिनांक के मिले। उसके बाद वहीं स्थित कमल बुक डिपो पर हांसलसर गांव के नाम से रजिस्टर्ड इ-मित्र सेवा केन्द्र मिला जो कि गुढ़ा में संचालित पाया गया, वहीं दो मुहर व्याख्याता राउमावि बड़वासी एवं प्रधानाध्यापक राउप्रावि भैंरू नगर किशोरपुरा की पाई गई। इसके अलावा 12 बेरोजगारी भत्ता, 7 उत्तर मैट्रिक छात्रवृति, 2 खाद्य सुरक्षा एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के इडब्लूएस के 6 आय घोषणा पत्र खाली मिले। जिनपर ओथ कमिश्नर श्रीराम बागवाला की मुहर एवं हस्ताक्षर लगी हुई मिली।
इसी स्थान पर एक और संचालित इमित्र पायल रोजगार सेन्टर में बेरोजगारी भत्ते के आवेदन के लिए उपयोग में लिए जाने वाले 2 खाली आय घोषणा पत्र जिस पर एक पर उत्तरदाययी व्यक्ति एवं राउमावि गुढ़ागौडजी के व्याख्याता की मुहर सहित दूसरे उत्तरदायी व्यक्ति की जगह गुढ़ागौडजी के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सा अधिकारी की मुहर व हस्ताक्षर मिले। इस दौरान 50 एवं 100 रुपए के रिक्त 25 स्टाम्प जो ऑथ कमिश्नर श्रीराम बागवाला की मुहर व हस्ताक्षर से सत्यापित किए हुए थे। यादव ने बताया कि गुढागौडजी स्थित पावर हाउस के सामने इ-मित्र सेवा केन्द्र के काउन्टर की दराज में एक प्राध्यापक, 2 ग्रामसेवक एवं पदेन सचिव व 2 सरपंच सहित 5 मुहर मिली। उदयपुरवाटी स्थित जयवीर हनुमान इ-मित्र एवं रोजगार सेन्टर के काउन्टर की दराज में राउमा विद्यालय उदयपुरवाटी के व्याख्याता व गजेन्द्र कन्सट्रक्शन कम्पनी उदयपुरवाटी की 2 मुहर पाई गई। इन इ-मित्र सेवा केन्द्रों से प्राप्त आवेदनों की जांच व निरीक्षण के दौरान उनसे की गई पूछताछ में सामने आया कि इ-मित्र संचालन कर्ताओं द्वारा नोटेरी पब्लिक से एक मुश्त रिक्त आय घोषणा पत्र को सत्यापित करवाया जाता है। उन्होंने कहा कि इन सभी इमित्रों द्वारा क्रियाकलाप एक अवैध जाली, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का है, जो कि गैरकानूनी है।
टीम में इनका रहा सहयोग: टीम में जिला रोजगार अधिकारी दयानन्द यादव, सूचना सहायक जितेन्द्र कुमार, कनिष्ठ सहायक पवन कुमार सैनी एवं कोतवाली के सिपाही योगेन्द्र का सहयोग रहा।