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कायमदास 24 वर्ष से कर रहे गोसेवा, 85 वर्ष की उम्र में भी जुनून बरकरार, 700 गायों की कर रहे सेवा

Datar singh Shekhawat

Publish: Nov 04, 2019 12:19 PM | Updated: Nov 04, 2019 12:19 PM

Jhunjhunu

पचलंगी. सेवा करने के जनून में घर परिवार व धन आड़े नहीं आता है। इसका जीता जागता उदाहरण मणकसास खोह के पहाड़ों में गो सेवा करने वाले कायम दास है। 85 वर्ष की उम्र में भी गो सेवा का जुनून इनका कम नहीं हुआ।

कायमदास 24 वर्ष से कर रहे गोसेवा, 85 वर्ष की उम्र में भी जुनून बरकरार, 700 गायों की कर रहे सेवा

पचलंगी. सेवा करने के जनून में घर परिवार व धन आड़े नहीं आता है। इसका जीता जागता उदाहरण मणकसास खोह के पहाड़ों में गो सेवा करने वाले कायम दास है। 85 वर्ष की उम्र में भी गो सेवा का जुनून इनका कम नहीं हुआ।
मणकसास के खोह गांव के पहाड़ों में स्थित ओम जनता गोशाला में आज सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद है।
दोनों गोशालाओं में करीब सात सौ गोवंश मौजूद है। खेतड़ी उपखण्ड के सेफरागुवार के निवासी कायम सिंह शेखावत ने अपना गृहस्थ जीवन छोडकऱ रामसुखदास से गो सेवा की प्रेरणा लेकर उदयपुरवाटी के मणकसास खोह गांव के पहाड़ों में गो शाला बनाने की सोची।
1994 में पहाड़ों में पेड़ों से बाड़ बंदी कर गोशाला शुरू की। इनकी इसी लगन ने उनको कायम सिंह से आज कायम दास बना दिया। 85 वर्ष के गो सेवक कायम दास ने बताया कि गोशाला का ओम जनता गोशाला के नाम से 1995 -96 में रजिस्ट्रेशन करवाया गया। दान - दाताओं के सहयोग से देखते देखते ही कायम दास की मेहनत रंग लाई।
कोई समय में पहाड़ी क्षेत्र की एक मात्र गोशाला जिले की आदर्श गोशाला बन गई। कायम दास ने बताया कि केन्द्र सरकार के भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड व राजस्थान गो सेवा आयोग के द्वारा मान्यता प्राप्त गोशाला में आज सभी सुविधाएं हैं ।

गो वंश की संख्या अधिक होने पर जोधपुरा में बनाई शाखा
कायम दास ने जानकारी दी की सडक़ों व गांवों में अपंग व बेसहारा गो वंश की सेवा का लक्ष्य ले कर चला थे। आज उनकी तीन पीढिय़ां बेटा व पौता इस गोसेवा में लगे हुए हैं। गोशाला मणकसास में अधिक गाय होने के कारण 2003 में पास के ही गांव जोधपुरा में गोशाला की दूसरी शाखा खोली गई। वर्तमान में मणकसास में 503 व जोधपुरा में लगभग 200 गाय है। दोनों जगह गो सेवा सुचारू है।

पोतों का नाम कृष्ण-बलराम
गो सेवा में इतने रचे बसे कायम दास ने अपने पोता का नाम भी बलराम व कृष्ण ही रख दिया। गायों का नाम अलग अलग रखा गया व इनके लिए अलग अलग वार्ड बनाए गए है।

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