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दशरथ की भूमिका में ही नसीब हुई मौत

Gunjan Shekhawat

Publish: Sep 19, 2019 12:01 PM | Updated: Sep 19, 2019 12:01 PM

Jhunjhunu

jhunjhunu news: मलसीसर. समाज के रामायण कथा के अनुसार भगवान श्रीराम को वनवास देने के बाद उनके पिता दशरथ राम के वियोग में संसार को त्याग देते हैं। ऐसा ही कुछ संयोग हुआ तारानगर क्षेत्र के गांव भुवाडी निवासी कुन्दनमल के साथ, जो पिछले 30 सालों से रामलीला परिषद समिति मलसीसर एवं आर्दश रामलीला रंगमंच कंकडेऊ कलां में दशरथ का अभिनय करते थे। कुन्दनमल हमेशा की तरह मगंलवार को भी कंकडेऊ कलां में चल रही रामलीला के दौरान दशरथ का अभिनय कर रहे थे उसी वक्त भगवान राम को वनवास दिया जाता है जिसके वियोग में महाराज दश

मलसीसर. समाज के रामायण कथा के अनुसार भगवान श्रीराम को वनवास देने के बाद उनके पिता दशरथ राम के वियोग में संसार को त्याग देते हैं।
ऐसा ही कुछ संयोग हुआ तारानगर क्षेत्र के गांव भुवाडी निवासी कुन्दनमल के साथ, जो पिछले 30 सालों से रामलीला परिषद समिति मलसीसर एवं आर्दश रामलीला रंगमंच कंकडेऊ कलां में दशरथ का अभिनय करते थे। कुन्दनमल हमेशा की तरह मगंलवार को भी कंकडेऊ कलां में चल रही रामलीला के दौरान दशरथ का अभिनय कर रहे थे उसी वक्त भगवान राम को वनवास दिया जाता है जिसके वियोग में महाराज दशरथ संसार को त्याग देते हैं।
रामलीला का यह दृश्य कुछ देर बाद संयोगवश हकीकत में बदल गया। हुआ ऐसा की कुन्दनमल दशरथ का अभिनय करने के बाद स्टेज के पीछे चले गए और कुछ ही देर बाद ह्दयगति रूकने से मौत हो गई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से एक बार हर कोई हतप्रभ रह गया। रामलीला परिषद समिति के संरक्षक संतोष कुमार हाकिम ने बताया कि कुन्दनमल करीब 30 वर्षों से समिति से जुड़े थे।
रामलीला आयोजन पर वे दशरथ के अलावा कैकयी व कौशल्या का अभिनय भी बखूबी निभाया करते थे। दशरथ के अभिनय में इतना पारंगत थे कि उनका अभिनय देख कर दर्शक भावूक हो जाते हैं और सभी की आंखों में आंसु निकल आते हैं।

बाल लच्छीराम रामलीला का मंचन


मण्ड्रेला. कस्बे की बाबा हड्डिया नाथ की बगीची स्थित श्रीबाल लच्छीराम रामलीला श्रेणी की ओर से चल रही रामलीला में सातवें दिन मंगलवार को सीता हरण से आगे की लीला का मंचन किया गया। लीला में राम व लक्ष्मण सीता को खोजते हुए भक्त शबरी की कुटिया में जाते हैं। भगवान को देखकर शबरी उन्हें मिठ्ठे बेर खिलाने के लिए पहले खुद खाकर फिर भगवान को जूठे बेर खिलाती हैं। भगवान राम ने शबरी का उनके ऊपर प्रेम देखकर उनकी ओर से दिए जूठे बेर खाकर भक्त की लाज रखी एवं भक्ति की महिमा बताई। शबरी के आग्रह पर भगवान राम ऋषिमुख पर्वत पर सुग्रीव से मित्रता करने जाते हैं। पर्वत पर हनुमान प्रकट होते हैं। इस अवसर पर श्रेणी की ओर से रजनीश सेन की अगुवाई में हनुमान की आकर्षक झांकी सजाई गई। इसके साथ ही लीला में बाली वध, हनुमान द्वारा लंका स्थित अशोक वाटिका को उजाडऩा, रावन के पुत्र अक्षय कुमार का वध, मेघनाथ द्वारा हनुमान को बंदी बनाने सहित रावण-हनुमान के संवाद का मंचन किया गया। रामलीला के अंत के दृश्य में हनुमान द्वारा लंका को जलाने का दृश्य दिखाया गया। मुरली एण्ड पार्टी हात्याज सीकर ने रामलीला में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। हनुमान प्रकट पर प्रसाद वितरित किया गया। रामलीला को देखने के लिए देर रात तक काफी संख्या में दर्शक मौजूद थे।