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राजस्थान में यहां एक साथ बरसा सवा पांच इंच पानी, किसानों के खिल उठे मुरझाए चेहरे

Dinesh Saini

Publish: Jul 19, 2019 14:15 PM | Updated: Jul 19, 2019 14:34 PM

Jhunjhunu

Monsoon in Rajasthan : राजस्थान में मानसून ( Monsoon ) के फिर से सक्रिय होने का मौसम विभाग ( IMD ) ने जो दावा किया था वह सही साबित होता नजर आ रहा है। झुंझुनूं के खेतड़ी में जमकर बारिश हुई। जिससे किसानों के चेहरे खिल गए...

झुंझुनूं। राजस्थान में मानसून ( Monsoon ) के फिर से सक्रिय होने का मौसम विभाग ( IMD ) ने जो दावा किया था वह सही साबित होता नजर आ रहा है। शुक्रवार को बीकानेर भी मानसूनी बारिश ( monsoon rain ) में तर हो गया। प्रदेश के कई हिस्सों में फिर से बारिश का दौर शुरू होने लगा है। गुरूवार को झुंझुनूं ( heavy rain in jhunjhunu ) के खेतड़ी में जमकर बारिश हुई। जिससे किसानों के चेहरे खिल गए। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए ये बरसात अमृत बनकर बरसी। खेतड़ी में सवा पांच और उदयपुरवाटी में पौने चार इंच बरसात दर्ज की गई। सीकर के रामगढ़ शेखावाटी में दो और सीकर में एक इंच से ज्यादा बारिश रेकार्ड की गई। सीकर शहर में शाम करीब पांच बजे तक 29 मिमी बारिश रेकार्ड की गई। अलवर जिले के बहरोड़ में 18 मिमी, टपूकड़ा में 10 मिमी और कोटकासिम में 48 मिमी बरसात हुई। भीलवाड़ा बनेड़ा में 30 और बिजौलियां में 25 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

 

वहीं राजधानी जयपुर में भी बादल उमड़ उमड़ कर आए। मानसून आने के 15 दिन बाद राजधानी में गुरुवार को फिर बारिश ( rain in jaipur ) हुई लेकिन पूरे शहर में नहीं बरसी। सांगानेर में 9.4 एमएम बारिश दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश हुई। चाकसू में सर्वाधिक 42 एमएम बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने एक दिन पहले ही मानसून फिर से सक्रिय होने का दावा किया था। गुरुवार को सुबह से तो बारिश के आसार नहीं दिखे मगर दोपहर को घटाएं छाईं, बंूदाबांदी शुरू हो गई। जेएलएन मार्ग जवाहर सर्कल, सांगानेर, प्रतापनगर इलाकों में जोरदार बारिश हुई।

 

मानसून के आने की तारीखों में हो सकता है बदलाव ( Monsoon Date in India )
राजस्थान सहित देशभर में मानसून की बेरुखी से मौसम विभाग चिंतित है। मौसम विभाग राजस्थान सहित सभी राज्यों के 50 साल के डेटा जुटाकर जलवायु और वातावरण की स्थितियों का विश्लेषण कर रहा है। मानसून के आने-जाने की तारीखों में बदलाव की जरूरत का अध्ययन कर रही समिति संभवत: अगले साल तक यह विश्लेषण पूरा कर लेगी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इसके बाद मानसून के आने-जाने की नई तारीखें घोषित की जा सकती हैं।