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सवा सौ साल पहले अमरीका से स्वामी विवेकानंद ने फोनोग्राफ से खेतड़ी में भेजा था ऑडियो संदेश

rajesh sharma

Publish: Sep 11, 2019 12:04 PM | Updated: Sep 11, 2019 12:04 PM

Jhunjhunu

खेतड़ी के लोगों को यह संदेश सुनाने के लिए राजा ने महल के 'दरबार हॉलÓ में एक खास दरबार का आयोजन किया था। इसमें खेतड़ीवासियों को यह संदेश सुनाया था। यहां के लोगों ने जब फोनोग्राफ से यह संदेश सुना तो उन्हे बहुत आश्चर्य हुआ था। यह बात उस समय दूर-दूर तक चर्चा का विषय बन गई थी। फोनोग्राफ चुनिंदा लोगों के पास था।


आज ही के दिन शिकागो में सम्बोधित किया था धर्म सम्मेलन

राजेश शर्मा

झुंझुनूं. आज से करीब सवा सौ वर्ष पहले भले ही वाट्सएप, फेसबुक आदि नहीं थे, लेकिन तकनीक तब भी थी। पहले भी विदेश में ऑडियो संदेश आते थे। हालांकि उसमें समय लगता था। अमरीका से करीब सवा सौ वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद ने फोनोग्राफ से खेतड़ी के तत्कालीन राजा अजीत सिंह को एक ऑडियो संदेश भेजा था। यह ऑडियो फोनोग्राफ से भेजा गया था। इसमें स्वामी विवेकानंद ने चार मिनट का संदेश दिया था। खेतड़ी के लोगों को यह संदेश सुनाने के लिए राजा ने महल के 'दरबार हॉलÓ में एक खास दरबार का आयोजन किया था। इसमें खेतड़ीवासियों को यह संदेश सुनाया था। यहां के लोगों ने जब फोनोग्राफ से यह संदेश सुना तो उन्हे बहुत आश्चर्य हुआ था। यह बात उस समय दूर-दूर तक चर्चा का विषय बन गई थी। फोनोग्राफ चुनिंदा लोगों के पास था।


यह था संदेश
फोनोग्राफ के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया था कि आप अपनी निर्धन प्रजा को शिक्षित करने के लिए प्रेरित करें। गांव-गांव में पाठशाला खोलें। रोगियों के लिए औषधालय की व्यवस्था करें। प्रजा को अपनी संतान समझकर उनका पालन करें।

क्या होता था फोनोग्राफ

फोनोग्राफ ध्वनि के अभिलेखन के लिए काम में लिया जाने वाला एक उपकरण है जिसका आविष्कार 1877 में हुआ। वर्तमान में इसे ग्रामोफोन अथवा रिकॉर्ड प्लेयर के रूप में भी जाना जाता है। इसका आविष्कार थॉमस एडीसन ने किया था।


अब वेलूर मठ में है वह फोनोग्राफ
खेतड़ी के तत्कालीन राजा के पास भी एक फोनोग्राफ था। वर्तमान में यह फोनोग्राफ वेलूर स्थित मठ के संग्रहालय में रखा हुआ है। इसकी फोटोग्राफी करना मना है।


खेतड़ी पहुंचने में लग गए थे छह माह
स्वामी विवेकानंद पर शोध करने वाले तथा उन पर अनेक पुस्तक लिख चुके भीमसर निवासी डॉ जुल्फीकार के अनुसार स्वामी विवेकानंद के अमरीकन दोस्त हेनरी वेल ने यह संदेश 4 अक्टूबर 1893 को रेकॉर्ड किया था। उसके बाद अमरीकन एक्सप्रेस कम्पनी से सड़क व जलमार्ग से भारत भेजा था। खेतड़ी पहुंचने में उस समय छह माह लग गए थे। मार्च 1894 में यह संदेश खेतड़ी पहुंचा था।
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आज का दिन और खेतड़ी का रिश्ता
आज ही के दिन 11 सितम्बर 1893 को स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में विश्व धर्म महासभा को सम्बोधित किया था। जब उन्होंने अपने सम्बोधन की शुरुआत में 'अमरीकी भाइयों और बहनों...Ó, बोला तो पूरा पंडाल तालियों की गडगड़़ाहट से गूंज उठा था। खास बात यह है इस धर्म महासभा में स्वामी विवेकानंद के जाने का खर्चा खेतड़ी के राजा ने वहन किया था। खेतड़ी आने से पहले उनका नाम नरेन्द्र था, विवेकानंद नाम भी खेतड़ी के राजा ने दिया था। जिस पगड़ी व चोगा को पहनकर विवेकानंद ने सम्बोधन दिया था, वह भी खेतड़ी की देन है। डॉ जुल्फीकार के अनुसार स्वामी विवेकानंद अपने जीवन में तीन बार वर्ष 1891, 1893 और 1897 में खेतड़ी आए थे।