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अब ये नई 'मां' रखेगी कुपोषित बच्चों का ध्यान, सरकार ने तैयार किया है ये खास प्लान

Brij Kishore Gupta

Publish: Jul 17, 2019 12:29 PM | Updated: Jul 17, 2019 12:29 PM

Jhansi

कुपोषित बच्चों की जांच करेगी EPGM

मशीन में इंस्टाल्ड मां सॉफ्टवेयर कुपोषित बच्चों की करेगा निगरानी

स्मार्ट स्केल के जरिये पहचाने जाएंगे कुपोषित बच्चे

 

झांसी। सरकार ने बच्चों की सेहत को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए सरकार ने खास प्लान तैयार किया है। इसके तहत अब कुपोषित बच्चों का ख्याल नई तरह की टेक्नोलॉजिकल 'मां' (TECHNOLOGICAL MOTHER) रखेगी। बच्चों को सुपोषित करने के लिए अब इलेक्ट्रो फिजियो ग्रोथ मॉनीटरिंग मशीन (EPGM MACHINE) मदद करेगी। इसमें इन्स्टाल्ड मां सॉफ्टवेयर कुपोषित बच्चों की लगातार निगरानी करेगा। इस मशीन के जरिये बच्चों का वजन व लंबाई आदि को सटीक मापा जा सकेगा। ऐसे ही पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक मशीन का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी निखिल टीकाराम फुण्डे ने बड़ागांव ब्लॉक के छपरा आगनवाड़ी केंद्र

पर किया।

एक साथ दस आंगनवाड़ी केंद्रों पर हुई शुरुआत

इस अवसर पर स्वस्थ भारत प्रेरक कृति जैन ने बताया कि पायलेट प्रोजेक्ट के तहत अभी इस मशीन (EPGM MACHINE) को बड़ागांव ब्लॉक के 10 आंगनवाड़ी केंद्र पर शुरू किया गया है। इसके बाद यह अन्य केन्द्रों में संचालित किया जाएगा। इसमें बच्चों का वजन किया जाएगा और उनकी लंबाई अंकित करके यह पता लगाया जाएगा कि बच्चा सामान्य है या कुपोषित। इस मशीन को मां नाम के एक सॉफ्टवेयर (TECHNOLOGICAL MOTHER) से जोड़ा जा रहा है, जिसमें रियल टाइम मॉनीटरिंग की जा सकेगी। इसकी रिपोर्ट स्वतः उन अधिकारियों के पास चली जाएगी जो इसके अंकित होंगे। इसके साथ कुपोषित श्रेणी में आने वाले बच्चों के माता पिता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के मोबाइल पर बच्चों की स्थिति का संदेश पहुंचेगा, जिससे कि वह बच्चे पर ध्यान दे सकें।

मशीन व सॉफ्टवेयर से होगी ये सुविधा

इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी रामेश्वर पाल ने बताया कि इस मशीन और सॉफ्टवेयर से न सिर्फ रियल टाइम मॉनीटरिंग में मदद मिलेगी बल्कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जो समय रजिस्टर भरने और चार्ट बनाने में लगता है, वह भी कम होगा। कागजी काम भी कम हो जाएगा। साथ ही जरूरतमंद बच्चों को जल्द मदद पहुंचाई जा सकेगी। बड़ागांव की बाल विकास परियोजना अधिकारी स्नेह गुप्ता ने बताया कि यह मशीन टुमस और नीतिराज इंजीनियर्स लिमिटेड के सहयोग से संचालित की जा रही है। मुख्य विकास अधिकारी ने नीतिराज इंजीनियर्स लिमिटेड के देशमुख और टुमस के डा विनय सैनी से मशीन की गतिविधि के बारे में जानकारी ली।