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Janmashtami-2019: तीन सौ साल पुराना है ये मंदिर, वृंदावन से आती है खास पोषाक

Brij Kishore Gupta

Publish: Aug 22, 2019 12:13 PM | Updated: Aug 22, 2019 12:13 PM

Jhansi

यहां पर इस बार चांदी के एक सौ आठ दीपकों से आरती कराए जाने की व्यवस्था है।

झांसी। हर तरफ Janmashtami के कार्यक्रमों के आयोजनों के लिए तैयारियों की धूम है। कहीं, 23 अगस्त को, तो कहीं 24 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जानी है। जन्माष्टमी के आयोजनों की यहां पर तीन सौ साल पुराने कुंजबिहारी मंदिर में भी तैयारियां हैं। यहां पर इस बार चांदी के एक सौ आठ दीपकों से आरती कराए जाने की व्यवस्था है। इसके अलावा यहां पर राधा-कृष्ण के लिए वृंदावन से खास पोषाक भी आने वाली है।

पहले यहां हुआ करता था जंगल

ग्वालियर रोड स्थित कुंज बिहारी मंदिर के महंत राधामोहन दास बताते हैं कि करीब तीन सौ साल पहले मंदिर के स्थान पर जंगल हुआ करता था। यहां साधु-संत कुटिया बनाकर भजन किया करते थे। उस समय छबीलेदास द्वारा कुंजबिहारी मंदिर की स्थापना की गई। कुंज बिहारी दास इस मंदिर के प्रथम महंत थे। उनका नाम भगवान कुंज बिहारी के नाम पर ही रखा गया था। इस वक्त उनकी सातवीं पीढ़ी के रूप में राधामोहन दास गद्दी पर हैं।

वृंदावन से आएगी खास पोषाक

मंदिर के पुजारी का कहना है कि भगवान के लिए वस्त्र वृंदावन से ही आते हैं। जन्माष्टमी और राधा अष्टमी पर भगवान के लिए विशेष पोषाक मंगवाई जाती है।

108 दीपक से होगी आरती

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां चांदी की मुख्य आरती १०८ दीपक से युक्त है। राधा अष्टमी और जन्माष्टमी वाले दिन ही इससे आरती होती है। इस बार भी चांदी की मुख्य आरती में १०८ दीपक जलाकर कुंजबिहारी की आरती उतारी जाएगी।