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भारत छोड़ो आंदोलन की 77वीं वर्षगांठ पर यूनिवर्सिटी में लिया गया ये बड़ा संकल्प

Brij Kishore Gupta

Publish: Aug 08, 2019 21:52 PM | Updated: Aug 08, 2019 21:52 PM

Jhansi

मनुष्य जीवन बिना जल, जंगल और जमीन के संभव नहीं है।

झांसी। भारत छोड़ो आन्दोलन की 77वीं वर्षगांठ के अवसर पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में बड़ा संकल्प लिया गया। इसमें तय किया गया कि इस दौरान 1000 पौधों का रोपण किया जाएगा। इस अवसर पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव नारायण प्रसाद ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन के अभिन्न अंग तथा आधारशिला हैं। मानव जीवन तभी तक है जब तक वन संरक्षित हैं। मनुष्य जीवन बिना जल, जंगल और जमीन के संभव नहीं है। उन्होंने यह विचार बुंंदेलखंड विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर छात्रों में वृक्षारोपण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए आयोजित नुक्कड़ नाटक के अवसर पर व्यक्त किए।

वृक्षारोपण करके चुकाया जा सकता है ऋण

इस अवसर पर नारायण प्रसाद ने कहा कि हमारे द्वारा वृक्षों का ऋण वृक्षारोपण करके ही चुकाया जा सकता है। जब जितना इस धरा से लेते हैं, हमें उसका कम से कम कुछ हिस्सा तो वापस करना चाहिए, अन्यथा की स्थिति में आने वाली पीढ़ी कभी हमें माफ नहीं करेगी। वहीं, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. देवेश निगम ने कहा कि आधुनिकीकरण ने वृक्षों को बाजार का माध्यम बना दिया है। जबकि वृक्ष हमारे घर परिवार का हिस्सा हैं और मानव जीवन की सफलता दोनों के सह अस्तित्व में है।

वृक्षों का महत्व बताया

इस अवसर पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्रों ने वृक्षों का महत्व बताया। नाटक में बताया गया कि हमें जीवन में जितनी आक्सीजन की आवश्यकता होती है, उतनी आक्सीजन हमें तीन पेड़ों से प्राप्त हो सकती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम तीन पेड़ लगाने चाहिए। नुक्कड़ नाटक का मंचन विश्वविद्यालय के छात्र सत्यपाल सिंह, आयुश, ऋषभ व्यास, कोमल समसेरिया एवं अन्य सहयोगियों ने किया। इस अवसर पर सहायक अधिष्ठाता छात्र कल्याण डा. रेखा लगरखा, डा. विनीत कुमार, डा. कौशल त्रिपाठी, डा. उमेश कुमार के साथ ही डा. संतोष कुमार पाण्डेय, उमेश शुक्ला, सतीश साहनी, सास्वत सिंह तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।