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ब्रश कारोबारी ने होटल में खाया जहर, डुप्लीकेट चाबी से कमरा खोला तो बिस्तर पर मिला शव, 6 पेज का मिला सुसाइड नोट

Neeraj Patel

Publish: Sep 10, 2019 21:48 PM | Updated: Sep 10, 2019 21:48 PM

Jhansi

मौत से पहले ६ पेज के सुसाइड नोट में लिखा ताऊ का बेटा मकान में हिस्से के लिए कर रहा था तंग

झांसी. यूपी के ब्रश कारोबारी ने सोमवार रात होटल मेस्कॉट के रूम नंबर २०६ में आकर जहर खा लिया। सुसाइड से पहले उसने छह पेज का खत भी लिखा, उसमें ताऊ के बेटे को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया। दोपहर तक उसके रुम में हलचल नहीं हुई तो होटल स्टाफ को शक हुआ डुप्लीकेट चाबी से कमरे का गेट खोला तो उसका शव बिस्तर पर और टेबिल पर सुसाइड नोट रखा मिला। कारोबारी के सुसाइड का पता चलने पर उनकी बहन और परिजन भी होटल पहुंच गए। शव को देखते ही उन लोगों ने ताऊ के बेटे को ही घटना का जिम्मेदार बताया है।

विश्वविद्यालय टीआई रामनरेश यादव ने बताया वर्मा कॉलोनी बड़ा गेट निवासी प्रतीक उर्फ बंटी (३५) पुत्र गौरीशंकर अग्रवाल ब्रश के थोक कारोबारी थे। सोमवार रात को सामान खरीदने के लिए झांसी से दिल्ली जाते थे। मां आशा अग्रवाल से दिल्ली जाना बताकर ही घर से निकले, लेकिन ग्वालियर में उतर गए। रात करीब १२:३० बजे रेलवे स्टेशन के पास होटल मेस्कॉट के रुम नंबर २०६ में आकर रुके। होटल स्टाफ को कोई आर्डर नहीं दिया। रुम बंद कर लिया। मंगलवार दोपहर २:३० बजे तक उनके कमरे में हलचल नहीं हुई तो होटल स्टाफ को शक हुआ। प्रतीक के कमरे का दरवाजा खटकाया, जवाब नही मिला तो यह समझा कि प्रतीक सो रहे हैं, इसलिए करीब एक घंटे इंतजार किया, फिर भी रिस्पांस नहीं मिला तो डुप्लीकेट चाबी से कमरा खोला। बिस्तर पर प्रतीक का शव पड़ा था। टेबिल पर डायरी के ६ पेज में सुसाइड लिखा और उसके बाजू में पेन रखा था। घटना देखकर होटल स्टाफ ने पुलिस को बुलाया। प्रतीक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

सुसाइड नोट मे लिखा ताऊ का बेटा मौत का जिम्मेदार

पुलिस के मुताबिक सुसाइड नोट में लिखी इबारत से आशंका है कि प्रतीक आत्महत्या करना तय कर ही होटल में आए थे। नोट की शुरुआत में जय बालाजी से की है फिर लिखा है कि ताऊ शिवशंकर अग्रवाल का बेटा गौरव वर्मा कॉलोनी के मकान में हिस्से के लिए तंग कर रहा था। जबकि नारायण बाग कॉलोनी में बडा प्लॉट हिस्से में ले चुका है। गौरव की मां अरुणा और ताऊ संजय अग्रवाल भी उसकी बात को सही बताकर परिवार पर दवाब बना रहे थे कि मकान दो या ५० लाख रुपए दो। २००६ में पिता शिवशंकर अग्रवाल ने भी इसी दवाब में सुसाइड किया था। उन्होंने भी मौत की वजह सुसाइड नोट में लिखी थी लेकिन उसे गायब कर दिया गया था। सुसाइड नोट में प्रतीक ने लिखा है कि उम्मीद है कि उनका सुसाइड नोट गायब नहीं होगा। गौरव उनकी मां और बडे भाई राहुल निवासी नोएडा को भी जान से मारने की धमकी देता है। उस पर कार्रवाई होना चाहिए।

भाई को बचा लो, पुलिस से जिद डॉक्टर को दिखाओ

प्रतीक की मौत का पता चलने पर जीजा लकी और बहन प्राची भी होटल पहुंच गए। प्राची मानने को तैयार नहीं थी कि भाई गौरव की मौत हो चुकी है। उन्होंने पुलिस से जिद की उनका भाई जिंदा है उसका चेकअप कराओ। उनकी हालत देखकर गौरव के शव को होटल से उठाकर जेएएच में लाया गया यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत बता दिया। प्राची का भी कहना था कि गौरव गुंडा है, उनके परिवार को धमका कर सब कुछ हडपना चाहता है। उसने ही भाई की जान ली है।

मौके पर यह मिला

- रुम की डस्टबिन में कचरे के साथ कागज के फटे हुए टुकडे मिले इन पर गौरव का नाम लिखा था। इससे जाहिर है कि प्रतीक ने सुसाइड नोट लिखने के कई प्रयास किए हैं।
- कमरे में उनका बैग मिला है जिसमें सफर में इस्तेमाल होने वाला सामन रखा था।
- टेबिल पर जहरीली गोलियां रखी मिली हैं, उनका आधा पैकेट खाली है और आधी में गोलियां थीं।