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शराब की तस्करी बेलगाम, थानों में नहीं है मैन पावर

Hari Singh Gujar

Publish: Nov 15, 2019 11:20 AM | Updated: Nov 15, 2019 11:20 AM

Jhalawar

 

- जिले में चार सर्किल में एक में ही इंस्पेक्टर


- प्रदेशभर में मात्र 100 निरीक्षण


- प्रदेश में 7000 हजार शराब की दुकाने

,


एक्सक्लूसिव

हरिसिंह गुर्जर
झालावाड़. शराब तस्करी को रोकने व अवैध शराब की धरपकड़ के लिए गठित आबकारी विभाग में निरीक्षकों का टोटा होने से कार्रवाई करने में विभाग को नाको चने चबाने पड़ रहे हैं। रात आठ बजे बाद बिकने वाली शराब को न तो यह रोक पा रहे है और न ही तस्करी पर इनकी किसी तरह से लगाम है। सालाना विभाग पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके बाद भी विभाग से ज्यादा पुलिस विभाग तस्करी की दारू पकड़ रहा है। विभाग में कर्मचारियों के नहीं होने से अवैध मदिरा बिकने व गड़बड़ी होने पर भी यह कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं, गौरतलब है कि सरकार ने लाइसेंसी दुकानों पर कार्रवाई का पूरा अधिकार आबकारी विभाग को दे रखा है। लेकिन प्रदेशभर में विभाग में निरीक्षकों की संख्या महज 100 है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। जिले की बात करें तो सर्किल में मात्र एक सर्किल में ही निरीक्षण है, शेष भगवान भरोसे ही चल रहे है। ऐसे में तस्करों की मौजा हो रही है। विभाग में मैन पावर की कमी के चलते तस्करी नहीं रूक पा रही है। अन्य जिलों के मुकाबले अवैध शराब की धरपकड़ भी जिला काफी पिछड़ा हुआ है।

सरकार की मंशा क्या, स्पष्ट नहीं-
प्रदेश में अवैध शराब के साथ ही लाइसेंसी दुकानों की पड़ताल, आठ पीएम पर शराबबंदी का अधिकार आदि आबकारी निरीक्षकों को दे रखा है। लेकिन पर्याप्त निरीक्षण नहीं होने से कार्रवाई नहीं हो पा रही है। प्रदेश में करीब 7 हजार देशी व अंग्रेजी शराब की दुकानें है। इसके मुकाबले प्रदेश में मात्र 100 निरीक्षण है। ऐसे में दुकानों के मुकाबले जांच अधिकारियों की संख्या ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

गठन किया लेकिन काम नहीं हो रहा-
तस्करी व अवैध शराब की रोकथाम के लिए सरकार ने आबकारी प्रवर्तन निदेशालय का गठन कर 1 अप्रेल 2005 को राज्य में 150 थाने स्वीकृत किए, इनमें पहले राजस्थान पुलिस एवं बार्डर होमगार्ड लगाए गए। बाद में सरकार ने भर्ती की। हर थाने में अच्छा भवन, सरकारी मोबाइल हथियार दस से पन्द्रह जवानों की नफरी उपलब्ध करवाई गई। लेकिन इनका काम सिर्फ बाहर से आने वाली तस्करी की शराब को रोकना है। लेकिन जिले में इनकी संख्या नहीं होने से यह काम भी जिले में नहीं हो पा रहा है।

जिले में ऐसी स्थिति है
सर्किल दुकानें निरीक्षण प्रेहराधिकारी
झालावाड़ 50 1 रिक्त
भवानीमंडी 45 रिक्त 1
अकलेरा 32 रिक्त रिक्त
चौमहला 12 रिक्त 1

- जिले में 2018 में दर्ज प्रकरण- 216
- जिले में 31 अक्टूबर तक दर्ज प्रकरण- 137
- गिरफ्तारी-204
- अवैध मदिरा - 505 बोतल
- देशी मदिरा - 3167 पव्वे
-जिले में कुल दुकानों-158
- जिले में वाष्प नष्टीकरण हुआ- 77460 लीटर
- गत वर्ष के मुकाबल कम प्रकरण दर्ज हुए है।

प्रदेश में ऐसी स्थिति है-
- राज्य में अंग्रेजी मदिरा की दुकाने -1000
- देशी मदिरा की दुकाने राज्य में- 6000
-आबकारी निरीक्षक- 100
- राज्य में प्रवर्तन निदेशालय में जाप्ता- 1200

विभाग में कर्मचारी नहीं होने से उदयपुर की टीम ने की कार्रवाई-
जिले में अधिकारियों की कमी होने से जिले में लगातार शिकायतें मिल रही थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से जागरूक लोगों ने गत दिनों सीएमओ में शिकायत की थी। इसके बाद उदयपुर की टीम ने जिले में कार्रवाई कर आधा दर्जन दुकानों को एक सप्ताह के लिए सील कर दिया था। जिले में कई दिनों से लगातार अधिक रेट लेने की शिकायतें लगातार मिल रही थी।


करते है कार्रवाई-
जहां से शिकायत मिलती है, वहां कार्रवाई करते हैं। हमारे पास एक ही निरीक्षक है, व दो पहराधिकारी है। फिर भी समय-समय पर कार्रवाई तो करते हैं।
अनिल जैन, जिला आबकारी अधिकारी, झालावाड़।

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