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अतिक्रमण हटाने का किया था विरोध, अब पल-पल में जाम से बेहाल

Arun Tripathi

Publish: Aug 20, 2019 15:43 PM | Updated: Aug 20, 2019 15:43 PM

Jhalawar

कब्जे हटते तो ये दिन नहीं देखने पड़ते

खानपुर. कस्बे को 32 करोड़ की लागत से स्मार्ट सिटी बनाने के दौरान दुकानदारों व व्यापारियों को अतिक्रमण हटाने का विरोध करना अब महंगा पडऩे लगा है। समूचे कस्बे में पल-पल में जाम से लोग बेहाल है। वहीं दुकानदारों व व्यापारियों का कारोबार भी जाम के कारण बुरी तरह से बाधित होने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यहां कस्बे को स्मार्ट सिटी बनाने के दौरान राज्य सरकार द्वारा सभी मार्गों पर चिन्हीकरण कर अतिक्रमण हटाकर सड़कें चौड़ी करने का निर्णय लिया गया था लेकिन व्यापारियों व दुकानदारों के विरोध के चलते निर्णय को वापस ले लिया गया। इसके बाद सड़क निर्माण के बाद मुख्य मार्ग पहले से ज्यादा संकरे हो गए। ऐसे में कस्बे में दिन में कई बार जाम के चलते खरीदारी के लिए आए ग्रामीण अब कस्बे में होकर वाहनों को लेकर जाने से भी कतरा रहे हैं। सोमवार को भी यहां गुदरी चौराहे से लेकर अटरू तिराहे तक दुपहिया व चारपहिया वाहन फंस जाने से घंटों तक जाम लगा रहा। दुकानदारों द्वारा समूचे सामानों को सड़कों पर जमाने के साथ वाहनों को भी दुकानों के आगे खड़ा करने से जाम से लगातार हालात बिगड़ रहे हैं।
पुलिस व प्रशासन का भी ध्यान नहीं
पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी भी कई बार कस्बे में लगे जाम में फंसने के बाद भी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे। ऐसे में कस्बे के लोग बुरी तरह से परेशान है। यहां दोपहर 12 बजे बाद से निजी व सरकारी विद्यालयों में छुट्टी होने के साथ ही बारां रोड, झालावाड़ रोड, सारोला रोड पर वाहनों की आवाजाही के कारण जाम लगना शुरू हो जाता है। एक साथ सैकड़ों की संख्या मे मोटरसाइकिलें, ट्रैक्टर, भारी वाहन कस्बे में होकर प्रवेश करने पर आमने सामने से जाम में फंसे रहते है इसके बावजूद पुलिस द्वारा वाहनों को निकालने मे किसी प्रकार की मदद नहीं की जाती।
सीएलजी बैठकों में उठती है समस्या
कई वाहन चालक जाम में फंसने पर वाहनों को उल्टा निकालकर वैकल्पिक मार्गों पर होकर गुजर जाते है लेकिन स्कूली बसों व बाइकों पर आ रहे स्कूली छात्र उमस व गर्मी मे जाम में परेशान होते रहते है। जबकि कस्बे मे जाम की समस्या को लेकर खानपुर पुलिस द्वारा आयोजित हर सीएलजी की बैठक मे जनप्रतिनिधियों द्वारा दिन मे भारी वाहनो का कस्बे में पं्रवेश बंद कर बाजारों मे खड़े होने वाले वाहनों, फ्रूट के ठेलों को बाजार से हटाकर अन्यत्र लगाने की मांग करते आ रहे है। लेकिन पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस ओैर ध्यान दिए जाने का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।

 

कुंड के यहां मौखे बंद करने से हर्बल गार्डन में पानी भरा, वनस्पति डूबी
झालरापाटन. हर्बल गार्डन में गोमती सागर तालाब का पानी भरने से सैकड़ों पेड़-पौधे व वनस्पति जलमग्न हो गए। जिनके लगातार पानी में डूबे रहने से नष्ट होने का खतरा बना हुआ है। पिछले दिनों लगातार वर्षा होने से गोमती सागर तालाब के लबालब भर जाने से इसके पानी की झिरन फूटने से पाल में होकर नियमित रूप से पानी का रिसाव हो रहा है जिससे यह पानी हर्बल गार्डन में भरता जा रहा है। हर्बल गार्डन में इस पानी की निकासी के लिए बने मौखे नगर सेठजी के कुंड के यहां से बंद कर दिए जाने से पानी की निकासी अवरूद्ध हो गई है और लगातार यहां पानी भरते जाने से पीछे के भाग में बने सभी ब्लॉक में जल स्तर बढ़ता जा रहा है जिससे धीरे धीरे शेष बचे पेड़ पौधे भी और पानी में डूबते जा रहे है। गेपरनाथ महादेव मंदिर परिसर व रास्ता भी जलमग्न होकर बंद हो गया है। जिससे यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी निराश लौटना पड़ रहा है। हर्बल गार्डन कर्मचारी अब्दुल रशीद ने बताया कि पानी से कई दुर्लभ पेड़ पौधे व वनस्पति और तैयार की जा रही पौध नष्ट हो रही है। नगरपालिका अध्यक्ष अनिल पोरवाल, उपाध्यक्ष चंद्रप्रकाश लाला राठौर, अधिशाषी अधिकारी महावीर ङ्क्षसह सिसोदिया ने सोमवार को जलमग्न क्षेत्र का अवलोकन कर बंद मौखो को खुलवाने के आदेश दिए। वन विभाग के अधिकारियों ने भी हालात का जायजा लिया। व्यापार संघ पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर प्रजापति ने जिला कलक्टर को पत्र भेजकर हर्बल गार्डन की सुरक्षा की समय समय पर समीक्षा करने की मांग की। उल्लेखनीय है कि हर्बल गार्डन में केवड़े सहित कई औषधीय पौधे व वनस्पति मौजूद है जिन पर रिसर्च करने के लिए देश के कोने कोने से विशेषज्ञ यहां आते है इसके अलावा दूर दराज तक के लोग इस गार्डन को देखने के लिए यहां आते है।