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करोड़ खर्च, हजारों पौधे लगाने के बाद भी हरित नही हो पाई मंगलनाथ वाटिका

Jitendra Jaikey

Publish: Jul 20, 2019 10:55 AM | Updated: Jul 20, 2019 10:55 AM

Jhalawar

-परवान नहीं चढ़ सकी पर्यटक स्थल के रुप में विकसित करने की योजना
-तीनों ट्यूबवेल हुई नाकारा

करोड़ खर्च, हजारों पौधे लगाने के बाद भी हरित नही हो पाई मंगलनाथ वाटिका
-परवान नहीं चढ़ सकी पर्यटक स्थल के रुप में विकसित करने की योजना
-तीनों ट्यूबवेल हुई नाकारा
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. शहर के निकट स्थित मंगलनाथ डूंगरी को करीब एक करोड़ खर्च कर हरित मंगलनाथ वाटिका बनाकर पूरी पहाड़ी को तिरंगी फूलवारी व पौधों के रुप में विकसित करने की जिला प्रशासन की योजना परवान नही चढ़ सकी। पानी के अभाव में यह योजना फेल हो गई। जबकि डूंगरी पर तीन तीन ट्यूबवेल खोदी गई लेकिन कोई हल नही निकला। जिला प्रशासन की ओर से सन् 2016 में जिले की झालरापाटन पंचायत समिति की ग्राम पंचायत खानपुरिया के माध्यम से इस डूंगरी को हरा भरा कर पर्यटक स्थल के रुप में विकसित करने की योजना बनाई गई। कार्य को मनरेगा योजना के तहत 27 फरवरी 2016 को इस काम के लिए 42.72 लाख स्वीकृत किए गए। 6 मार्च 2016 से इसे विकसित करने का काम शुरु किया गया था। इसमें डूंगरी के चारो ओर तीन खंड़ बनाए गए। इसमें सबसे ऊपर केसरिया, फिर सफेद व नीचे हरे रंग की फुलवारी के लिए पौधे लगाए गए थे।
-पौधारोपण में यह हुआ सरकारी प्रयास
जिला प्रशासन की ओर से 17 जुलाई 2016 को मंगलनाथ जी की डूंगरी पर वृहद पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें अधिकारियों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनो के प्रतिनिधियों व वन विभाग की ओर से 10 हजार पौधे रोपे गए। इस दौरान नीम, पीपल, बड़, कचनार, अशोक, बोगनबोलिया आदि सजावटी व पुष्पदार पौधे लगाकर इनके गड्डों में वर्मी कम्पोस्ट, एण्टी टर्माइट तथा पानी डाला गया। जिले में जैव विविधता संरक्षण कार्यक्रम के तहत डूंगरी पर राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की ओर से पौधारोपण के लिए 37 लाख रुपए भी स्वीकृत हुए थे।
-कई कार्यक्रम भी हुए
जिला प्रशासन, वन विभाग व प्राईवेट स्कूल वेलफेयर सोसायटी की ओर से विश्व ओजोन दिवस पर 16 सितम्बर 2017 को भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर करीब 20 स्कूलों के करीब 11 सौ विद्यार्थियों ने करीब 500 पौधे लगाए। इस दौरान पोस्टर व निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित की गई व प्रतियोगिता में विजेताओं के अलावा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में योगदान करने वाले व्यक्तिओं को भी सम्मानित किया गया।
-पानी के लिए भी हुए प्रयास
मंगलनाथ जी की डूंगरी पर सबसे बड़ी समस्या पानी की रही। यहां पानी पर्याप्त उपलब्ध नही हो सका। मात्र टेंकरों के भरोसे इसे विकसित करने का प्रयास असफल रहा। इस पर 13 अप्रेल 2017 को प्रशासनिक व वित्तिय स्वीकृति के बाद झिर वन विभाग नर्सरी से लिफ्ट एवं ड्रिप सिंचाई सिस्टम के लिए 18.27 लाख स्वीकृत किए गए। इसके तहत डूंगरी तक पाइप बिछाकर पानी पहुंचाने का कार्य किया गया। लेकिन ट्यूबवेल भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नही करवा सकी। डूंगरी पर तीन तीन ट्यूबवेल खोदी गई लेकिन कोई हल नही निकला।
-प्रयास कर रहे है
इस सम्बंध में क्षेत्रीय वन अधिकारी राकेश मीणा का कहना है कि मंगलनाथ जी की डूंगरी क्षेत्र को विकसित करने का प्रयास किया गया था। कई कार्यक्रम भी हुए, सामाजिक संस्थाएं भी आगे आई लेकिन पानी की समस्या के कारण क्षेत्र की योजना परवान नही चढ़ सकी। फिर भी प्रयास कर रहे है।