स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

सुहाने की जगह आंखों को चुभ रहा स्मृति वन

Arun Tripathi

Publish: Oct 09, 2019 21:55 PM | Updated: Oct 09, 2019 21:55 PM

Jhalawar

करोड़ों रुपए खर्च, देखरेख के अभाव में उगी जंगली घास-कटिली झाडिय़ां

झालरापाटन. नवलखा किले की पहाड़ी पर करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए स्मृति वन के रख-रखाव पर प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद यहां पेड़-पौधों की जगह झाड़-झंकार नजर आ रहे हैं।
वन विभाग ने नवलखा किला पहाड़ी को वर्ष भर हराभरा बनाने व आने वालों के लिए यादगार के रूप में 60 हैक्टेयर क्षेत्रफल में 1 करोड़ 22 लाख रुपए खर्च कर वनभूमि पर स्मृति वन विकसित किया था। इसके रखरखाव पर हर वर्ष लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं और बरसात के मौसम में यहां सैकड़ों नए पौधे लगाए जाते हैं। वर्तमान में देखरेख के अभाव में इसमें पेड़-पौधों की जगह जंगली घास, झाड़ झंकार, पंचपत्ती की बेले दिख रही हंै। इससे स्मृतिवन आंखों को सुहाने की जगह चुभ रहा है। यहां पर हवा खोरी पर आने वाले लोगों के लिए बनाए पाथवे के रास्ते पर कटिली झाडिय़ां उग आई हैं, जिससे लोगों को यहां से निकलने में जहरीले जीव का खतरा रहता है। सुबह चौकीदार के नहीं होने से घूमने के लिए आने वाले लोगों को शौचालय व मूत्रालय पर ताला लगा होने से परेशानी हो रही है। समाजकंटकों ने कई जगह से इसकी चार दीवारी को क्षतिग्रस्त कर दिया है।
-ये लगाए पौधे
स्मृति वन में बरगद, पीपल, नीम, गुलर, स्मृति कुंज हर्बल, अशोक, आवंला, जामुन, कदंब, शहतूत, मोलसरी, ढांक, तेंदू, चुरेल, बैर, करोंदा, बेरूल, रोज, जंग के पौधे लगाए थे। आज इनमें से गिनती के पौधे ही सुरक्षित बचे हैं।
-भ्रमण के लिए सुविधाएं
स्मृति वन के प्रति आमजन का आकर्षण बनाने व हवाखोरी के लिए आने वालों के लिए इसमें भ्रमणपथ, सोलर लाइट, जलमंदिर, लघु भ्रमणपथ, कुटी, बैंचे, लगाई गई हंै।
-बार बार आग लगने से बढ़ा नुकसान
गर्मी के समय स्मृतिवन में कई बार आग लगने की घटनाएं होने से वनस्पति व पौधों को भी कॉफी नुकसान पहुंचा है। इससे बचाव के लिए विभागीय स्तर पर इसमें कोई संसाधन मौजूद नहीं है।
जागरूक नागरिक ललित शारदा ने बताया कि स्मृति वन देखरेख के अभाव में पूरी तरह से उजाड़ हो रहा है, विभाग का इस और बिलकुल ध्यान नहीं है।
वहीं रविन्द्र स्वामी ने बताया कि करोड़ों रुपए खर्च कर सरकार ने स्मृति वन का निर्माण कराया, लेकिन आज इसकी हालत नाम के अनुरूप नहीं रही है। जिससे यहां पर आने वाला व्यक्ति प्रतिकूल संदेश लेकर जा रहा है। उधर अजय शर्मा ने बताया कि
स्मृतिवन की हालत काफी बुरी हो गई है, कई लोगों ने हवाखोरी के लिए आना बंद कर दिया है। इसके उजाड़ होने से जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है।
-राज्य सरकार ने इस वर्ष स्मृतिवन के रखरखाव के लिए बजट आवंटित नहीं किया है। विभाग ने सरकार को 4 लाख रुपए रखरखाव बजट के लिए प्रस्ताव भेज रखा है, फिर भी विभागीय कर्मचारियों के माध्यम से देखरेख कराई जाएगी।
नंदलाल प्रजापति वनमंडल अधिकारी


देररात तक चला कवि सम्मेलन
सुनेल. क्षेत्र की ग्राम पंचायत सेमला के तत्वावधान में माताजी चौक में विजय दशमी पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन हुआ। खानपुर से आए कवि वीरेन्द्र शृंगी ने सरस्वती वंदना से की। दौसा से आए हास्य कवि अनुराग प्रेमी ने अपनी हास्य रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया। मंदसौर के कवि कुलदीप नागर ने ठहाकों के साथ बेटी बचाओ का संदेश दिया। रतलाम के कवि रविराज कुमावत ने वीर रस से भरी मां भवानी की कविता सुनाई। हाड़ौती के कवि शिवचरण सेन शिवा ने बेटी को कोक में मत मारो गीत सुनाया। कोटा के कवि सुशील कलवार ने धुम्रपान निषेध पर हास्य व्यंग्य के द्वारा संदेश दिया। हाड़ौती के कवि हेमराज मालवी ने सासू सुन थारी बेटी की बात शृंगार गीत सुनाया। सुनेल की कवयित्री आशारानी जैन ने हर कदम पर कंटकों से लड़ती रही बेटियां गीत सुनाया। भवानीमंडी के कवि रामनारायण नागर ने भी हास्य व्यंग्य से श्रोताओं को गुदगुदाया। सोयत के कवि डॉ. सुरेश सिंघम ने कच्चा चि_ा खोलूंगा मैं भारत के गद्दारों का गीत सुनाकर मां भारती की वंदना की। सुनेल के कवि भैरू चौहान ने हास्य व्यंग के साथ कवितापाठ व मंच का संचालन कर श्रोताओं को गुदगुदाया। कवि सम्मेलन तड़के चार बजे तक चलता रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेमला सरपंच शोभाराम गुर्जर ने सभी कवियों का माला पहनाकर स्वागत किया। इसे पूर्व रात साढ़े आठ बजे हनुमान मंदिर के सामने दशहरे मैदान में 25 फीट के रावण के पुतले का दहन सरपंच शोभाराम गुर्जर ने किया।