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हाइड्रोपॉनिक से होगी संरक्षित खेती

Arun Tripathi

Publish: Dec 13, 2019 15:45 PM | Updated: Dec 13, 2019 15:45 PM

Jhalawar

हॉर्टिकल्चर कॉलेज में प्रशिक्षण शिविर शुरू

झालरापाटन. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के तत्चावधान में राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना नवोनमेशी अनुदान परियोजना के तहत उद्यानिकी और वानिकी महाविद्यालय के कृषक भवन में आयोजित 2 दिवसीय उद्यानिकी फसलों की संरक्षित खेती प्रशिक्षण शिविर शुरू हुआ।
मुख्य अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के नवोनमेशी अनुदान परियोजना राष्ट्रीय समन्यवेक्षक डॉ. आरबी शर्मा ने प्रदान की जाने वाली विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि नाहेप आईजी परियोजना में राष्ट्रीय स्तर पर 17 विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में कुल 20 परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। कृषि विश्वविद्यालय कोटा के उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय झालावाड़ में भी इसे शुरू किया है। इसके लिए महाविद्यालय को 5 करोड़ रुपए का अनुदान स्वीकृत किया है। इसके तहत महाविद्यालय परिसर में संरक्षित खेती ईकाई को स्थापित कर हाइड्रोपॉनिक्स ईकाई को भी स्थापित कर विभिन्न फसलों का भरपूर उत्पादन लिया जा रहा है।
डॉ. शर्मा ने महाविद्यालय की संरक्षित इकाई का अवलोकन किया। विशिष्ट अतिथि कृषि विश्वविद्यालय कोटा ऐमेरेट्स प्रोफेसर डॉ.एल के दशोरा ने कहा कि संरक्षित खेती वर्तमान परिपेक्ष में एक नितांत आवश्यकता है। कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी स्नात्तक पेशेवर डिग्री है। विद्यार्थी इसे लेने के बाद रोजगार लेने के बजाय रोजगार उपलब्ध कराने वाले बनें तभी यह सार्थक होगी।
कृषि विश्वविद्यालय कोटा छात्र कल्याण निदेशक डॉ. जितेन्द्र सिंह ने नालेज एटीट्यूड व एप्लीकेशन शब्दों के माध्यम से मानव संस्कृतिके अनुरूप व्यवहार करनेे की सलाह दी। उन्होंने बताया कि अमरूद का पौध प्रवर्धन कर एक छोटी सी पौधशाला इकाई से लाखों की आय प्राप्त की जा सकती है। कृषि विश्वविद्यालय कोटा के इंजीनियर आईएन माथुर ने कृषि एवं उद्यानिकी फसलों में सिंचाई के बारे में बताते हुए कहा कि फसल के अनुसार कब कितनी बार सिंचाई की जाए और घुलित उर्वरकों का प्रयोग कर फसलों में पानी देने के बजाय फव्वारा एवं बूंद-बूंद पद्धति से सिंचाई करें, इससे फसल में उत्पादकता के साथ गुणवत्ता बनी रहे।
अधिष्ठाता डॉ. आईबी मोर्य ने कहा कि भारतीय अर्थ व्यवस्था में उद्यानिकी खेती की 30 प्रतिशत सहभागिता है। कृषि के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। आने वाले समय में पानी के संकट को देखते हुए किसानों को पानी बचाने वाली पद्धति का अधिकाधिक खेती में उपयोग करना चाहिए। फूल एवं भूदृश्य विभाग के विभागाध्यक्ष आशुतोष मिश्रा ने फूलों की संरक्षित खेती कर आय बढ़ाने की सलाह दी। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. कविता अरविंदाक्षण ने बताया कि इस प्रशिक्षण में कुल 8 विभिन्न तकनीकी व्याख्यान प्रस्तुत किए जाएंगे। इस प्रशिक्षण में महाविद्यालय के 65 विद्यार्थी व कर्मचारी भाग ले रहे है। संचालन डॉ. प्रियंका सोलंकी ने किया। डॉ. पीएस चौहान ने आभार जताया।

प्रधानमंत्री फसल बीमा अंतिम तिथि 31
सारोलाकलां. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अंतिम तिथि में एक पखवाड़ा बचा है, लेकिन 2,200 किसानों ने खरीफ फसल ऋण जमा कर वापस रबी फसल ऋण नहीं उठाया। ऐसे में किसान रबी फसल बीमा से वंचित हो जाएंगे। बैंक सूत्रों ने बताया कि क्षेत्र की 10 सहकारी समिति में 3000 किसान है। इनमें महज 800 कृषकों ने खरीफ फसल ऋण जमा कराया है, जबकि 31 दिसम्बर बाद फसल बीमा का लाभ नहीं मिलेगा। जिन किसानों ने खरीफ फसल ऋण जमा कराया है, उसकी रबी ऋण में एमसीएल लिमिट है, तो स्वत ही 1.25 गुणा बढ़ोतरी से अधिक ऋण मिलेगा। सहकारी बैक शाखा प्रबन्धक गुलाबचंद शर्मा ने बताया कि किसान खरीफ फसल ऋण जमा कराके 31 दिसम्बर पहले रबी ऋण उठाए।

अल सुबह खाद लेने पहुंचे किसान
अकलेरा. नगर में किसान खाद के लिए अल सुबह पहुंच गए। किसानों ने बताया कि अभी गेहूं-सरसों की फसल को पानी पिला रहे हैं। ऐसे में उन्हें यूरिया की जरूरत है। मनोहरथाना रोड पर सुबह करीब 7 बजे ही किसान खाद के लिए पहुंच गए। उधर क्रय-विक्रय सहकारी समिति व्यवस्थापक सत्यनारायण शर्मा ने बताया कि नगर में अब तक 7 बार खाद पहुंच चुकी है और करीब 7000 कट्टे किसानों वितरण किए हंै। 45 किलो का एक कट्टा इफको-क्रपकों वितरण हुआ है। अब आईपीएल कम्पनी का खाद पहुंचने वाला है।

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