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गेेंहू को धूप में सुखाते, झर रहे आंखों से नीर

Jitendra Jaikey

Publish: Sep 18, 2019 13:13 PM | Updated: Sep 18, 2019 13:13 PM

Jhalawar

-बाढ़ से खराब हुए अनाज को सम्भालने की मशक्कत

गेेंहू को धूप में सुखाते, झर रहे आंखों से नीर
-बाढ़ से खराब हुए अनाज को सम्भालने की मशक्कत
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. गागरोन रोड़ पर बुधवार को एक खेत में बने मकान के परिसर में बड़ी संख्या में भीगें गेंहू को सुखाते दम्पति की आंखों में आंसू गिर रहे थे। बैक से ऋण लेकर बड़ी आशा से खेत में गेंहू बोए व फसल को सहेज कर रखा लेकिन घर में आए कालीसिंध नदी के उफान से सारे गेंहू भीग कर खराब हो गए। यहां एक खेत में रहने वाले बृजकिशोर कश्यव व उसकी पत्नी लक्ष्मी बाई घर के बाहर गेंहू को सुखाने में जुटे थे। खराब हुए गेंहू को देखकर लक्ष्मी बाई रहरह कर सिसक रही थी। रो रोकर उसकी आंखें सूज गई।
-बैक से लिया था ऋण
दम्पति ने बताया कि सहकारी बैक से 1 लाख रुपए का ऋण लेकर खेत में गेेंहू बोए थे अच्छी फसल आ भी गई थी बस अब उसे बेचने की तैयारी थी कि घर में नदी का पानी भर गया। इससे विभिन्न कक्षों में रखी करीब 30 बोरी गेंहू खराब हो गए। नदी का उफान इतना अधिक था कि गेंहू को रखने वाली लोहे की कोठी व ड्रम टूट गए थे। करीब 60 हजार रुपए का नुकसान हो गया। इतना कह कर दम्पति रुधे गले से फिर से गेंहू को फैला कर सुखाने में जुट गए।