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बेटी के दिल में छेद, आर्थिक मदद की आस में दिन काट रहे माता-पिता

Arun Tripathi

Publish: Sep 21, 2019 15:03 PM | Updated: Sep 21, 2019 15:03 PM

Jhalawar

रुपए खत्म, ईलाज बंद, राशन कार्ड में नाम जोडऩे के लिए लगा रहे चक्कर

मनोहरथाना. ग्राम पंचायत खाताखेड़ी के मदनपुरा निवासी मजदूर पन्नालाल तंवर की दो वर्षीय बालिका प्रियंका के दिल में छेद होने से परिवार परेशान हैं। माता-पिता पिछले एक वर्ष से इलाज करा रहे हैं, लेकिन रुपए खत्म होने से पिछले एक माह से इलाज बंद है। वहीं भामाशाह कार्ड तो है, लेकिन राशन कार्ड में बालिका का नाम नहीं होने व आधार कार्ड नहीं होने से सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा हैं। पिता पन्नालाल ने बताया की ऑपरेशन में दो से तीन लाख का खर्चा होने से इलाज बंद कर दिया है। पंचायत में राशन कार्ड में नाम जोडऩे के लिए पिछले आठ दिनों से चक्कर लगा रहे हैं। मां रामू बाई ने बताया कि उनके चार पुत्रियां हैं। प्रियंका सब से छोटी है। इलाज नहीं मिलने से पिछले 8 दिनों से वह खाना नहीं खा रही है। सरकारी मदद की सख्त जरूरत है।

तालाब की दीवार से रिसाव होने से गांव में घुस रहा पानी
-ग्रामीणों ने मैठून में कलक्टर को बताई समस्याएं
अकलेरा. ग्राम पंचायत मैठून में कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग की अध्यक्षता में जन समस्या समाधान शिविर लगा। वहीं शिविर प्रभारी उपखण्ड अधिकारी डॉ. सत्यप्रकाश कंसवा ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और निस्तारण किया।
इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि गांव के आंगनबाड़ी केंद्र प्रथम पर अतिक्रमण है, इसे हटाया जाए। इस पर कलक्टर ने पुलिस की सहायता से अतिक्रमण हटाने की बात कही। ग्रामीणों ने फसलों के नुकसान को लेकर मुआवजा देने की मांग की। वहीं मैठून के ग्रामीणों ने मृत जानवरों के लिए स्थान उपलब्ध कराने की मांग की। गांव स्थित तालाब की दीवार से रिसाव होने से गांव में पानी घुसने की जानकारी दी। प्रधान कैलाश मीना, जिला स्तर के अधिकारी समेत तहसीलदार रामनिवास मीना, उपाधीक्षक जसवीर मीना, पुलिस निरीक्षक राजेश मीना, विकास अधिकारी कैलाश मीना सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान कलक्टर को तहसील के निरीक्षण के दौरान अभिभाषक परिषद की ओर से ज्ञापन दिया। इसमें बताया कि स्टाम्प वेंडर घनश्याम शर्मा की ओर से स्टाम्प को निर्धारित मूल्य से अधिक राशि लेकर बेचा जा रहा है। इस पर कलक्टर ने उपखण्ड अधिकारी को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

प्रदर्शनकारियों ने धरना स्थल पर खाना बना जताया विरोध
-इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थियों का आंदोलन जारी
झालरापाटन. राज्य सरकार के अभियांत्रिकी महाविद्यालय का राजकीय दर्जा समाप्त करने को लेकर लिए निर्णय पर विद्यार्थियों के आंदोलन के बावजूद बैरूखी अपनाने से विद्यार्थी गेट के बाहर धरने पर बैठे रहे।
पिछले 10 दिन से आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों ने शुक्रवार को भी महाविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार का ताला नहीं खोलने दिया और इसके सामने धरने पर डटे रहे। इससे प्राचार्य सहित अन्य स्टाफ को अपने वाहन बाहर ही खड़े करके पास ही स्थित छोटे गेट से पैदल प्रशासनिक भवन तक आना जाना पड़ा। धरने पर बैठे विद्यार्थियों ने दिनभर जिला प्रशासन व राज्य सरकार के विरोध में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया और प्रदर्शन स्थल पर ही सभी आंदोलनकारियों का भोजन तैयार किया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि राज्य सरकार व जिला प्रशासन के स्तर से उनसे कोई बातचीत करने को तैयार नहीं है। राज्य सरकार को यदि महाविद्यालय से राजकीय दर्जा समाप्त करना है तो शैक्षणिक सत्र की शुरूआत से इस निर्णय को लागू किया जाए। इस महाविद्यालय में जम्मू-कश्मीर के 11 विद्यार्थी हैं। जिन्होंने इस महाविद्यालय के राजकीय होने से ही इसमें दाखिला लिया है। सरकार दूर-दूर से पढऩे के लिए आए विद्यार्थियों के साथ निर्णय लागू कर धोखा कर रही है, यदि सरकार निर्णय को नहीं बदलती तो महाविद्यालय की बुनियाद रखने से लेकर अब तक की सभी गतिविधियां राजकीय स्तर की होने से विद्यार्थी इसको लेकर न्यायालय में याचिका लगाकर स्थगन के लिए कार्रवाई करेंगे।

महाविद्यालय की सभी सींटों को मिले राज्य पोषित श्रेणी का दर्जा
-महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक संकाय सदस्यों ने ज्ञापन दिया
झालरापाटन. राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक संकाय सदस्य ने प्राचार्य को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन दिया।
ज्ञापन में विद्यार्थियों व कार्मिकों की समस्याओं एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के महाविद्यालय के नाम से राजकीय शब्द हटाने का विरोध करते हुए इसे पूर्ण सरकारी दर्जा देने व महाविद्यालय की सभी सींटों को राज्य पोषित श्रे
णी का दर्जा दिलाने की मांग की। महाविद्यालय में हर वर्ष विद्यार्थियों का प्रवेश कम होने से वित्तीय स्थिति खराब हो रही है। इसे देखते हुए यहां कि बीटेक व एमबीए की सभी सीटों को राज्य पौषित श्रेणी का दर्ज देकर प्रवेशित विद्यार्थियों की फीस आधी अथवा न्यूनतम की जाए, इससे परिजनो पर आर्थिक बोझ नहीं होगा। वर्तमान में फीस अधिक होने से कई विद्यार्थी प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं।