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सिंचाई व पुलिस कॉलोनी 20 सालों से भी नहीं हुई मरम्मत, बरसात में रहता है डर सांप, बिच्छु का पढ़िए खबर...

Vasudev Yadav

Publish: Jul 17, 2019 18:37 PM | Updated: Jul 17, 2019 18:37 PM

Janjgir Champa

Government Quarter : ज्यादातर मकानों की स्थिति जर्जर होने से बरसात के समय कमरों में भर जा रहा पानी, अफसरों व कर्मचारियों को करनी पड़ती है जद्देजहद, शिकायतों के बावजूद समस्याओं का नहीं हो रहा समाधान

जांजगीर-चांपा. अफसरों व कर्मचारियों को रहने के लिए भले ही सरकारी क्वार्टर (Government Quarter) उपलब्ध करा दिया गया हो लेकिन ज्यादातर मकान काफी पुराने होने की वजह से पूरी तरह जीर्ण शीर्ण हो गए हैं। हर साल की समस्या को देखते हुए अब सरकारी नुमाईदें इन आवासों में रहना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं।
सरकारी अधिकारी कर्मचारियों को बाहर से आने जाने में असुविधा न हो और कार्यालयीन काम ठीक ढंग से हो सके इसके लिए बकायदा उन्हें जिला मुख्यालय में ही सरकारी मकान उपलब्ध तो कराया गया है लेकिन ज्यादातर सरकारी क्वार्टर (Government Quarter) जर्जर स्थिति में हैं। ऐसे में अब बरसात में वहां रहकर अपनी डयूटी कर पाना टेढ़ी खीर साबित हो रही है। हल्की सी बारिश होते ही मकानों में पानी टपकने लगता है। मूसलाधार बारिश से कमरों में लबालब पानी भर जाता है। पुराने क्वार्टर का छप्पा खपरैल का होने की वजह से परेशानी अधिक हो रही है। सड़ चुके बांस बल्ली व अन्य सामानों के गिरने का डर बना रहता है। शायद यही वजह है कि कई अफसर अपने परिवार के साथ यहां रहना नहीं चाह रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों के निर्देशों के अनुरुप वे मुख्यालय में ही रहकर बदहाली में दिन काट रहे हैं। ऐसा नहीं है कि क्वार्टरों की स्थिति के बारे में विभाग को जानकारी नहीं दिया गया या फिर इसकी शिकायत न की गई हो विडम्बना तो यह है कि इन सबके बावजूद आज तक न तो क्वार्टरों की मरम्मत की गई है और न ही अधिकारियों-कर्मचारियों को जर्जर मकान की जगह अन्य क्वार्टर उपलब्ध कराया गया। ऐसे में जान जोखिम में डाल कर सरकारी नुमांइदों को रहना पड़ रहा है। नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर अधिकारी व कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने क्वार्टर की मरम्मत करने के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की है लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है।

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बारिश से बचने वैकल्पिक व्यवस्था
ज्यादातर पुराने सरकारी क्वार्टरों में बारिश से नीचे टपकने वाली पानी की रोकथाम के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के रुप में छज्जे के ऊपर तालपतरी या फिर पालीथिन ढंककर काम चलाया जाता है। इससे कमरों में पानी तो नहीं टपकता लेकिन ऊपर में लगे पुराने हो चुके बांस बल्ली व खप्पर के गिरने का डर बना रहता है। ऐसे में कुछ अफसर भले ही जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं वहीं कई अफसर बाहर से आना जाना करने में ही भलाई समझ रहे हैं। कई लोग परेशानियों के मद्देनजर सरकारी क्वार्टर की बजाय किराए के मकान में रहकर दफ्तरों में अपनी डयूटी निभा रहे हैं।

नए क्वार्टर भी खस्ताहाल
अधिकारियों-कर्मचारियों की मांग को ध्यान में रखते हुए जिला मुख्यालय के हसदेव विहार में दर्जनों सरकारी क्वार्टर बनाए गए हैं। जिसमें कुछ मकानों पर तो अफसर निवास कर रहे हैं लेकिन कई क्वार्टर रखरखाव व विभागीय लापरवाही की वजह से लापरवाही की भेंट चढ़ गए हैं। क्वार्टरों को सुरक्षित नहीं रखने से सरकारी मकान के खिड़की दरवाजे व अन्य समान चोर पार करने लगे हैं।

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नए भवन बनने के बाद भी बदहाली मेें दिन काट रहे आरक्षक
दूसरों की सुरक्षा की कमान संभालने वाले पुलिस विभाग के कर्मचारी सरकारी क्वार्टरों की जर्जर स्थिति की वजह से बदहाली में दिन काट रहे हैं। महज दो कमरे के मकान में रहना इन कर्मचारियों की मजबूरी तो है पर मकान की जर्जर हालत होने से अपने परिवार के साथ पुलिस विभाग के कर्मचारी सुकुन के कुछ पल भी नहीं बिता पा रहे हैं। ऐसेे में पूरे शहर की सुरक्षा करने वाले कर्मचारी खुद ही असुरक्षित हैं। पुलिस के लिए नए मकान बनकर तैयार है। बावजूद बलहाली के दिन काट रहे है।