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जमशेदपुर ने पूरे किये 100 साल,जानिए इसके निमार्ण के पीछे की खास वजह

Prateek Saini

Publish: Jan 02, 2019 17:08 PM | Updated: Jan 02, 2019 17:08 PM

Jamshedpur

जब हम सौ वर्षों पीछे मुड़ कर देखते हैं। साकची के इस छोटे-से गांव को “जमशेदपुर“ का नाम देने के लिए हम लॉर्ड चेम्सफोर्ड की विचार प्रक्रिया की प्रशंसा करते हैं...

(रांची,जमशेदपुर): 100 साल पहले (2 जनवरी, 1919) को, भारत के गवर्नर जनरल और वाइसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916-1921) ने कहा था कि- “हम शायद ही सोच सकते हैं कि इन चार साल के (प्रथम विश्व युद्ध) दौरान हमारे पास क्या होता, यदि टाटा कंपनी हमें स्टील की रेलों का उपहार देने में सक्षम नहीं होता, जो न केवल मेसोपोटामिया के लिए, बल्कि मिस्र, फिलिस्तीन और पूर्वी अफ्रीका के लिए भी प्रदान की गई हैं, और मैं अपना धन्यवाद व्यक्त करने आया हूं ... यह कल्पना करना कठिन है कि 10 साल पहले, यह जगह झाड़ और जंगल था; और यहाँ, अब हमारे पास अपनी सभी फाउंड्री और इसके वर्कशॉप्स तथा 40,000 से 50,000 लोगों की आबादी है। यह महान उद्यम स्वर्गीय जमशेदजी टाटा की कल्पना के कारण है। यह स्थान अपने नाम में परिवर्तन देखेगा और अब इसे साकची के नाम से नहीं जाना जाएगा, बल्कि इसके संस्थापक के नाम से पहचाना जाएगा - जमशेदजी टाटा का नाम-जिससे यह प्रभावित होगा। अब से यह स्थान जमशेदपुर के नाम से जाना जाएगा। “


आज, लॉर्ड चेम्सफोर्ड द्वारा दिये गये इस भाषण के सौ साल बाद, जमशेदपुर सिर्फ स्टील ही नहीं, बल्कि अनेकाअनेक चीजों का पर्याय है। व्यापार के लिए पहली बार जमशेदपुर आने वाले, या यहां के निवासियों के रिश्तेदार और दोस्त, जब शहर पहुंचते हैं, तो पेड़ों व सड़कों, स्टेडियमों व पार्कों के साथ एक स्वच्छ और हरियालीयुक्त शहर और व्यवस्थित आस-पड़ोस - जो दूरदर्शी संस्थापक, जमशेदजी नसरवानजी टाटा की एक विरासत है- को देख कर उन्हें सुखद आश्चर्य होता है। निवासियों को पता है कि उनका इस्पात शहर में हमेशा से गहर सांस्कृतिक हृदयस्थली रहा है, और खेल के लिए इसका अनूठा लगाव रहा है।


जमशेदपुर ने हमेशा से ही हर क्षेत्र के दिग्गजों को आकर्षित किया है - प्रख्यात गायक, नृत्य किंवदंतियां, थिएटर समूह से लेकर उनक कलाकार को, जो यहां प्रस्तुति देने आये। यह शहर खेल प्रेमियों के बीच प्रसिद्ध है, इसके गोल्फ टूर्नामेंट में हर तरफ से उत्साही लोग आते हैं, इसने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की मेजबानी की है, और फुटबॉल और तीरंदाजी के लिए एक स्थापित राष्ट्रीय केंद्र है।


आज, जब हम सौ वर्षों पीछे मुड़ कर देखते हैं। साकची के इस छोटे-से गांव को “जमशेदपुर“ का नाम देने के लिए हम लॉर्ड चेम्सफोर्ड की विचार प्रक्रिया की प्रशंसा करते हैं। एक ऐसा नाम जो युगों से आज भी प्रासंगिक बना हुआ है और वास्तव में कॉस्मोपॉलिटन और वाइब्रेंट इंडिया का एक शानदार उदाहरण है।