स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

प्रतिबंधित सैटेलाइट फोन: फोरेनर की भूल या आंखों में झौंक रहा था धूल

Satyendra Porwal

Publish: Sep 14, 2019 00:36 AM | Updated: Sep 14, 2019 00:36 AM

Jammu

Banned Satellite Phone: आखिर क्या थी उसकी मंशा, खुलेगा राज। कानूनन अनुमति जरूरी, फिर क्यों किया नजरअंदाज। लद्दाख में मिले सिग्नल,भारत में प्रतिबंधित सैटेलाइट फोन इस्तेमाल करते हुए विदेशी नागरिक को लेह पुलिस ने दबोचा।

योगेश
(जम्मू). सैटेलाइट फोन ( SATELLITE PHONE) सामान्य सेल फोन के विपरीत उपग्रहों से जुड़ता है, जो स्थलीय मोबाइल साइटों से जुड़ा होता है। स्थानीय दूरसंचार प्रणाली को बायपास करके इसमें बातचीत होती है। हर देश के कानून में इसके उपयोग के अलग-अलग नियम कायदे हैं। इसको नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है और वही लद्दाख में हुआ। हाल ही केन्द्र शासित प्रदेश बने लद्दाख से विदेशी व्यक्ति को सैटेलाइट फोन के साथ गिरफ्तारी किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार कई दिन से लेह के आसपास विभिन्न स्थानों जैसे नामगेल टेस्मो गोंपा, सांकड़, पैंगोंग झील और चीन के साथ सीमावर्ती खारू शांग क्षेत्रों में विशिष्ट थुराया गतिविधि (सैटेलाइट फ़ोन के सिग्नल) ( SIGNAL OF SATELLITE PHONE) देखे जा रहे थे। इसके लिए पुलिस ने विभिन्न जगहों पर बड़े पैमाने पर सर्च अभियान भी चलाया।

इंडियन टेलीग्राफ अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि संकेतों को ट्रेस करते हुए पुलिस स्टेशन लेह की टीम एक विदेशी नागरिक को पकड़ा, जो जुमा बाग के पास होटल में रह रहा था और प्रतिबंधित थुराया संचार प्रणाली उपयोग कर रहा था। उन्होंने कहा कि चार्जर के साथ थुराया उपग्रह फोन का उपयोग किया गया सिम भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। इस संबंध में पुलिस स्टेशन लेह की ओर से उल्लंघनकर्ता के खिलाफ धारा 4/20, 21 इंडियन टेलीग्राफ अधिनियम ( INDIAN TELEGRAPH ACT) के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

पर्यटन से पहले दें जानकारी
घटना के बाद, लेह पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है और सभी टूर ऑपरेटरों, होटल और गेस्ट हाउस मालिकों, टैक्सी ऑपरेटरों से अनुरोध किया कि वे अपने संबंधित ग्राहकों को ट्रेक और पर्यटन से पहले संक्षिप्त जानकारी दें ताकि भारत में इसकी वैध अनुमति के बिना थुराया संचार का उपयोग न किया जा सके।

बारीकियों का रखना पड़ता है ध्यान
गृह मंत्रालय भारत के 15 जनवरी 2018 को जारी परिपत्र का हवाला देते हुए रक्षा और रणनीतिक संबंध विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में जब सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल किया जाता है, तो खुफिया एजेंसियों (INTELLIGENCE AGENCIES IN INDIA) को नियमों की कई बारीकियों का सामना करना पड़ता है।

रिकॉर्ड प्राप्त करना बड़ी समस्या
यदि इसका उपयोग उग्रवाद से संबंधित गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, तो एजेंसियों के लिए समान वास्तविक समय को ट्रैक करना मुश्किल है। रिकॉर्ड प्राप्त करना बड़ी समस्या है क्योंकि यह पूरी तरह से देश के उपग्रह पर निर्भर करता है। जिसके माध्यम से फोन को जोड़ा गया है। भारत में अभी भी इंटरनेट और कॉल डेटा स्कैन के कई मामलों में काम आ रहा है, और इस तरह के एक मोड़ पर सैटेलाइट फोन ट्रैक करना बेहद जटिल कार्य है।

ऐसी जटिल होती है प्रक्रिया
सैटेलाइट फोन से बातचीत की जानकारी हासिल करने में एजेंसियां असमर्थ होती हैं। इसके अलावा यह उन संकेतों के साथ भी हस्तक्षेप करता है जो सेना के स्टेशनों और खुफिया एजेंसियों द्वारा उठाए जाते हैं। ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं कि यह सामान्य पुलिस संकेतों में हस्तक्षेप कर सकता है।