स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

Kashmir: युवाओं में शिक्षा की अलख जगा रहे ‘बुकवाले बाबा’

Nitin Bhal

Publish: Jul 18, 2019 22:23 PM | Updated: Jul 18, 2019 22:23 PM

Jammu

Kashmir: पुलिस अधिकारी (IPS) का नाम सुनते ही मन में एक कडक़ अफसर की छवि सामने आती है। लोग खासतौर से बच्चे व युवा पुलिस अधिकारी से जल्द सम्पर्क साधने में हिचकिचाते हैं।

श्रीनगर

पुलिस अधिकारी का नाम सुनते ही मन में एक कडक़ अफसर की छवि सामने आती है। लोग खासतौर से बच्चे व युवा पुलिस अधिकारी से जल्द सम्पर्क साधने में हिचकिचाते हैं। लेकिन हम आपको मिलवा रहे हैं एक ऐसे आईपीएस ( IPS ) अधिकारी से जो किताबों के जरिए युवाओं का दिल जीत रहा है। प्रदेश के जनरल होम गार्ड्स अधिकारी बसंत रथ ( Basant Rath ) को युवा ‘बुक वाले बाबा’ के नाम से ज्यादा पहचानते हैं। मूल रूप से उड़ीसा निवासी रथ जम्मू कश्मीर ( Jammu-Kashmir ) में आईजी ट्रैफिक के रूप में भी काम कर चुके हैं। कश्मीर में जहां सुरक्षा कारणों से हर पुलिस अधिकारी आमतौर पर कई गार्डों से घिरा हुआ होता है, रथ हमेशा बिना सुरक्षा गार्ड के चलना पसंद करते हैं। सामाजिक सेवा की वजह से वह लोगों के बीच इतने लोकप्रिय हो गए हैं कि अक्सर प्रशंसकों से घिरे रहते हैं। जम्मू कश्मीर में जरूरतमंद युवकों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए मुफ्त किताबें देने की मुहिम शुरू की है। वह सोशल मीडिया का उपयोग कर के उन उम्मीदवारों तक पहुंचने की कोशिश करता हैं जो नीट ( NEET ) और जेइइ ( JEE ) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंध लगाना चाहते हैं।

हर रविवार लगती है कतार

हर रविवार को श्रीनगर और अन्य क्षेत्रों के छात्र बसंत रथ के आधिकारिक आवास चश्माशाही में हट नंबर 224 पर पुस्तकें प्राप्त करने के लिए लाइन में लगे होते हैं। जो युवा यहां नहीं आ पाते हैं उन्हें कुरियर सेवाओं के माध्यम से भेजी जाती हैं। बसंत रथ ने अब तक युवाओं के बीच कई हजार पुस्तकें वितरित की हैं। रथ विज्ञान, कला, इंजीनियरिंग, अर्थशास्त्र और पत्रकारिता पर पुस्तकें वितरित करते हैं।

 


बचपन की मजबूरियों से सीखा

रथ बताते हैं कि बचपन में उनके सामने आई मजबूरियों को देख कर उनके मन में जरूरतमंद लोगों की मदद का जज्बा जगा। उन्होंने कहा कि मैं उन दिनों को नहीं भूल सकता जब मैं 11 साल का था और सबसे ज्ञानी व्यक्ति बनना चाहता था। उस दिन को भी नहीं भूल सकता जब मेरी माँ मेरे लिए भूखा रहती थी ताकि मैं पढ़ाई कर सकूं। बसंत रथ लाइम लाइट में आना पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने बताया कि वे जरूरतमंद छात्रों को वितरण के लिए दिल्ली, जम्मू और श्रीनगर से किताबें खरीदते हैं।


युवा पढ़ें, आगे बढ़ें

अपनी इस पहल के पीछे मकसद बताते हुए बसंत रथ बोले की वह चाहते हैं कि कश्मीर के युवा भी पढ़ें और आगे बढ़ें। रथ ने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सोशियोलॉजी का अध्ययन किया और बाद में 2000 में यूपीएससी की परीक्षा पास की। बसंत ने जम्मू-कश्मीर में IPS के रूप में नियुक्त होने के एक वर्ष से जम्मू और कश्मीर की यातायात व्यवस्था में सुधार किया। उन्होंने राज्य के इच्छुक लोगों के लिए 2008 में पहल शुरू की सिविल और पुलिस सहित लगभग 50 छात्रों को मुफ्त आवास और कोचिंग प्रदान करने के लिए मदद करते रहे हैं।

सोशल मीडिया करते हैं सम्पर्क

कई छात्र सोशल नेटवर्किंग साइटों फेसबुक, ट्विटर और ईमेल पर बसंत रथ से संपर्क करते हैं। जिसके बाद वह अपनी जरूरत की पुस्तकों के बारे में जानकारी देते हैं। महानिरीक्षक रैंक के पुलिस अधिकारी बसंत रथ ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर भी अपने अभियान की जानकारी दी है। उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल पर किताबों की फोटो शेयर की हैं। इसके साथ उन्होंने लिखा, जिस किसी को भी परीक्षा की तैयारी के लिए पुस्तकें चाहिए, अपना पूरा पता और मोबाइल नंबर निर्धारित फार्मेट में सीधा मुझे मैसेज करें। सब्र का फल किताब होता है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि मित्रों अगर आप कुपवाड़ा, कुलगाम, अनंतनाग, पुलवामा या शोपियां से हैं और आप इन किताबों को पाना चाहते हैं तो आप मेरे निवास पर रविवार को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक आ सकते हैं। आपसे कोई सवाल-जवाब नहीं होगा, सिर्फ आपको आपके मतलब की किताब दी जाएंगी।