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उद्योग-धंधों संग जम्मू-कश्मीर के विकास को लगेंगे पंख

Nitin Bhal

Publish: Aug 23, 2019 17:47 PM | Updated: Aug 23, 2019 17:47 PM

Jammu

Jammu Kashmir: जम्मू कश्मीर के विभाजन और अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के बाद राज्य को औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उद्योग व वाणिज्य विभाग देश

जम्मू (योगेश). जम्मू कश्मीर के विभाजन और अनुच्छेद 370 ( Article 370 ) को निष्प्रभावी करने के बाद राज्य को औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उद्योग व वाणिज्य विभाग देश की औद्योगिक क्रांति से पीछे छूट गए जम्मू कश्मीर में निवेश करवाने के लिए 12 से 14 अक्टूबर तक निवेशक सम्मेलन ( Investors meet ) भी कराने जा रहा है। राज्य में पहली बार होने वाले इस सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सितंबर से देश-विदेश में रोड-शो भी आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए विभाग ने देश की 15 प्रमुख इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों से टेंडर भी आमंत्रित किए हैं।

राज्य का उद्योग व वाणिज्य विभाग निवेशक सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सितंबर के पहले सप्ताह में नई दिल्ली में मीडिया मीट आयोजित करेगा। जिसके बाद रोड-शो शुरू होंगे। जम्मू कश्मीर में उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार भी खुलकर सहयोग करने के लिए आगे आई है। प्रोमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड विभाग, नीति आयोग व गृह मंत्रलय राज्य सरकार के इस प्रयास को सफल बनाने में सहयोग कर रहा है। प्रोमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड विभाग ने एक संगठन इनवेस्ट इंडिया को जम्मू कश्मीर सरकार के साथ लगाया है।

सितंबर से होंगे रोड शो

उद्योग-धंधों संग जम्मू-कश्मीर के विकास को लगेंगे पंख

उद्योग व वाणिज्य विभाग सितंबर से रोड-शो शुरू करेगा। विभाग अहमदाबाद, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता, बेंगलुरु व चेन्नई में यह रोड-शो करेगा। इसके अलावा दुबई, आबू धाबी, लंदन, नीदरलैंड, सिंगापुर व मलेशिया में भी ये रोड-शो होंगे। इस दौरान बिजनेस टू बिजनेस मीट और बिजनेस टू गवर्नमेंट मीट भी आयोजित की जाएगी ताकि निवेशकों के हर सवाल का जवाब दिया जा सके।

मिलेंगी कई रियायतें

उद्योग-धंधों संग जम्मू-कश्मीर के विकास को लगेंगे पंख

जम्मू कश्मीर में उद्योग लगाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार वर्तमान में उद्यमियों को कई रियायत दे रही है, लेकिन इस विशेष आयोजन के दौरान देश विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार विशेष रियायत की घोषणा कर सकती है। इसमें सबसे अहम पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप प्रोजेक्ट होगा। इस पर उद्योगपतियों की नजरें टिकी हुई हैं।