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जम्मू-कश्मीर है अरुण जेटली का ससुराल, ससुर रहे हैं बड़े कांग्रेसी, यूं जीता था दिल

Prateek Saini

Publish: Aug 24, 2019 18:04 PM | Updated: Aug 24, 2019 18:04 PM

Jammu

Arun Jaitley Life Story: जम्मू-कश्मीर के दिग्गज कांग्रेसी ( Jammu Kashmir Congress ) नेता ( GL Dogra ) गिरधारी लाल डोगरा ( Girdhari Lal Dogra ) ने बीजेपी से ताल्लुक रखने वाले अरुण जेटली को अपने दामाद के रूप में क्यों चुना ( Arun Jaitley Life Hidden Facts ) इसके पीछे बहुत बड़ी कहानी ( Arun Jaitley Marriage Story ) है...

(जम्मू,योगेश कुमार): भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली नहीं रहें। इस ख़बर से पूरे देश के साथ ही जम्मू-कश्मीर में भी शोक की लहर दौड़ गई। जेटली का जम्मू-कश्मीर से गहरा नाता रहा है। उनकी पत्नी जम्मू कश्मीर के दिग्गज कांग्रेसी नेता गिरधारी लाल डोगरा की बेटी हैं। आइए जानते है कैसे बीजेपी के कद्दावर नेता अरुण जेटली ने विपरीत विचारधारा के बावजूद अपने ससुर का दिल जीता...


दिग्गज कांग्रेस नेता की बेटी से हुई शादी

Arun Jaitley Life Story
अरुण जेटली के विवाह समारोह की फोटो जो उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट की थी IMAGE CREDIT:

24 मई 1982 अरुण जेटली की शादी गिरधारी लाल डोगरा की सुपुत्री संगीता से हुई। गिरधारी लाल जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्य थे। डोगरा ने दो बार सांसद बने और छह बार विधान सभा के सदस्य के रूप में कार्य किया।


छात्र संघ से की थी शुरूआत

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गिरधारी लाल डोगरा की वकालत के समय की तस्वीर IMAGE CREDIT:

गिरधारी लाल डोगरा का जन्म जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के भैया गांव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृह जिले में हुई। हिंदू कॉलेज अमृतसर से स्नातक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने लाहौर लॉ कॉलेज से कानून की शिक्षा ली। इसके बाद वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्हें हिंदू कॉलेज अमृतसर का छात्र संघ महासचिव चुना गया।

 

पत्रकारिता में भी आजमाया हुनर

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गिरधारी लाल डोगरा IMAGE CREDIT:

कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह जम्मू आ गए और एक प्रसिद्ध वकील लाला दीना नाथ महाजन के जूनियर वकील के रूप में कार्य शुरू किया। वह जम्मू से प्रकाशित होने वाले एक साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक भी रहे। 1942 में वह नेशनल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सक्रिय भाग लेना शुरू कर दिया।

जब नेहरूवादी नेता ने ठुकराया इंदिरा गांधी का प्रस्ताव

 

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इंदिरा गांधी और नेहरू से मुलाकात करते हुए गिरधारी लाल डोगरा IMAGE CREDIT:

1952 में उन्हें हीरानगर निर्वाचन क्षेत्र से जम्मू-कश्मीर संविधान सभा के लिए नामित किया गया था। वह 1957, 1962, 1967, 1972 और 1975 में हीरानगर से विधायक के रूप में चुने गए। वह क्रमशः जम्मू और उधमपुर से 7वीं और 8वीं लोकसभा के सदस्य रहे। उनकी पहचान एक कट्टर नेहरूवादी नेता के रूप होती थी। डोगरा कभी चुनाव नहीं हारे और तत्कालीन वित्त मंत्री के रूप में 26 बजट पेश किए। उन्होंने दो बार संसदीय चुनाव भी जीते, पहला 1980 में जम्मू-पुंछ सीट से और बाद में 1984 में उधमपुर- कठुआ सीट से। इंदिरा गांधी द्वारा लोकसभा स्पीकर का पद भी ऑफर किया था लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया था।

जेटली की राजनीतिक प्रतिभा को पहचाना

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राजनीतिक के शुरूआती दिनों में अरुण जेटली IMAGE CREDIT:

डोगरा के बारे में बताया जाता है की वह जमीन से जुड़े अनुभवी नेता थे। डोगरा समाज कलयाण से साथ अच्छे बुरे लोगों को बहुत आसानी से पहचान जाते थे। बताया जाता है विपरीत विचारधारा के बावजूद डोगरा को अरुण जेटली पसंद आ गए। डोगरा प्रारंभ से युवा अरुण की छात्र संग गतिवधियों से प्रभावित थे। वकालत में अच्छी पकड़ के साथ भाजपा से जुड़े संगठनो में उनका बढ़ता कद देखते हुए और डोगरा को पूरा यकीन था की अरुण जेटली बहुत क़ामयाब रहेंगे और इसी वजह से उन्होंने अपनी बेटी का हाथ उनके हाथ में दे दिया।

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