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जालोर में केवल वाहवाही लूटने को शुरू करवाई थी नर्मदा परियोजना से जालोर को सप्लाई और अब यह हो रही परेशानी

Khushal Singh Bhati

Publish: Dec 08, 2019 11:01 AM | Updated: Dec 08, 2019 11:01 AM

Jalore

- नर्मदा परियोजना के एफआर प्रोजेक्ट में बरती गई बड़ी लारवाही, जिसका खामियाजा आज भी भुगत रहे जालोरवासी

जालोर. पेयजल संकट के साथ साथ फ्लोराइड के दंश को झेल रहे जालोर जिलेवासियों के साथ नर्मदा परियोजना के नाम पर बड़े स्तर पर छलावा हुआ है। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में लापरवाही बरती गई, जिससे तीन साल से जालोरवासी परेशानी का सामना कर रहे हैं। मामले में खास बात यह है कि एफआर प्रोजेक्ट के तहत जालोर समेत 281 गांवों तक पानी पहुंचाने के लिए तैतरोल में पंपिंग स्टेशन बनाया गया है। यहां से वर्तमान में प्रतिदिन पंपिंग हो रही है। दूसरी तरफ इसी पंपिंग स्टेशन के पास रॉ-वॉटर रिजरवायर का निर्माण होना था। यह एक स्टॉक टैंक होता है, जिसका उपयोग परियोजना में क्लोजर होने पर रिजर्व टैंक के लिए किया जाता है। तत्कालीन जनप्रतिनिधियों व सांसद ने वाहवाही लूटने को आनन फानन में परियोजना में बिना तैयारी पानी की आपूर्ति शुरू करवा दी, जबकि विभागीय अधिकारी भी दबे स्वर में स्वीकार कर रहे हैं कि यह बड़ी भूल थी। जिसके कारण क्लोजर के हालातों में बार बार जल संकट के हालात पैदा होते हैं। राजनीतिक लाभ लेने के लिए उस समय आनन फानन में बिना तैयारी के सप्लाई शुरू करवाई गई। जिसका नतीजा यह है कि आज तीन साल गुजरने के बाद भी स्टॉक टैंक का निर्माण तक नहीं हो पाया है।
21 दिन स्टॉक की क्षमता
राजनीतिक और विभागीय लापरवाही को इस तरह से समझा जा सकता है कि यह स्टॉक टैंक 2100 एलएलडी (मिलियन लेक लीटर) क्षमता का बनाया जाना है। इसके लिए पहले स्तर पर खुदाई का काम पूरा किया गया था। लेकिन उसके बाद पूरा काम बकाया ही पड़ा है। यदि इस टैंक का निर्माण अब भी पूरा हो जाता है तो यदि नर्मदा परियोजना में क्लोजर भी हो तो इस टैंक के भरोसे जालोर, आहोर समेत अन्य गांवों में 21 दिन से अधिक की सप्लाई हो सकती है। वहीं वर्तमान में हालात यह है कि नर्मदा परियोजना में सप्लाई बंद तो नर्मदा से जुड़ी पूरी सप्लाई भी पूरी तरह से बंद हो जाती है।
अब री-टेंडरिंग की कवायद
पेयजल सप्लाई से जुड़ा यह एक बड़ा मसला है, जिस पर जिले के जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं है। इसी कारण यह यह कार्य कछुए की चाल से ही चल रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पूर्व की एजेंसी ब्लेक लिस्टेड होने के बाद वर्तमान में पेयजल सप्लाई और देखरेख के लिए 6 माह के लिए टेंडर किए गए हैं। वहीं इस प्रोजेक्ट के बचे हुए कार्य के लिए री-मेजरमेंट और उसके साथ साथ री-टेंडरिंग के लिए कार्य चल रहा है। रिस्क एंड कोस्ट के आधार पर यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उसके बाद अगले कुछ समय में फिर से टेंडर प्रक्रिया होगी, जिसमें स्टॉक टेंक निर्माण, उसके मेंटिनेंस, सप्लाई समेत अन्य सभी प्रक्रियाओं को शामिल किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्टॉक टैंक का निर्माण कार्य लगभग 6 माह में पूरा हो सकता है। सीधे तौर पर समय पर टैंडर लगने के साथ एजेंसी द्वारा स्टॉक टैंक का निर्माण कार्य शुरू भी किया जाता है तो इस कार्य को पूरा होने में कम से कम 6 माह का समय लग जाता है। ऐसे में यह कार्य 2020 के मध्य या अंत तक पूरा हो सकता है। जिसके बाद भविष्य में परियेाजना में क्लोजर की स्थिति में जालोर में पेयजल संकट के हालात नहीं बनेंगे।
तो ये बनते हैं हालात
मामले में खास बात यह है कि अभी जालोर शहर की सप्लाई नर्मदा परियोजना के साथ साथ 33 ट्यूबवैल पर भी निर्भर है। नर्मदा परियोजना से 40 से 50 लाख लीटर पानी प्रतिदिन मुहैया होता है और ट्यूबवैल से 25 से 30 लाख लीटर पानी। ऐसे में जब कभी नर्मदा परियोजना में क्लोजर आता है तो सीधे तौर पर पूरी आपूर्ति ट्यूबवैल पर ही निर्भर करती है और इन हालातों में पानी की आपूर्ति का शैड्यूल बिगड़ जाता है और सप्लाई भी आधी अधूरी होती है। वहीं गर्मी के दिनों में तो पेयजल संकट इतना गहरा जाता है कि लोगों को टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ता है।
10 साल से अटका है यह प्रोजेक्ट
आरडब्ल्यूआर होने से क्लोजर की स्थिति में स्टॉक किए पानी से सप्लाई जारी रखी जा सकती है। इसका निर्माण प्रोजेक्ट के साथ 2009 में ही पूरा होना था, लेकिन 201२ तक हुई भूमि अवाप्ति की वजह से देरी हुई और उसके बाद एजेंसी ने यह कार्य पूरा नहीं किया और दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी मामले में ढिलाई बरती।
अभी कहां, कितना स्टॉक
बागोड़ा पंपिंग स्टेशन पर 6 एमएलडी (मिलियन लेक लीटर), उम्मेदाबाद में 5 और तैतरोल में 8 एमएलडी का स्टॉक रहता है।
इनका कहना
एजेंसी द्वारा यह कार्य पूरा नहीं किया गया था। अभी प्रोजेक्ट के लिए री टेंडरिंग की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन उससे पहले री-मेजरमेंट हो रहा है। जल्द से जल्द इस काम को पूरा करवाने का प्रयास चल रहा है।
- केएल कांत, एसई, नर्मदा परियोजना

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