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डिजिटाइजेशन के युग में मशीनें बनी अनुपयोगी

Khushal Singh Bhati

Publish: Dec 11, 2019 10:51 AM | Updated: Dec 11, 2019 10:51 AM

Jalore


करोड़ों रूपए खर्च कर ई-मित्र प्लस मशीन को ग्रामीणों तक पहुंचाया, लेकिन इसका सही मायने में नही ंहो रहा उपयोग

सायला. डिजिटल इंडिया योजना के तहत सरकार ने गांवों को डिजिटल बनाने के मकसद से ग्राम पंचायत मुख्यालय पर स्थित अटल सेवा केन्द्रों में ई मित्र प्लस मशीनें लगवाई थी। लेकिन यह मशीनें अटल सेवा केन्द्र में शोपीस बनकर रह गई हैं। सरकार ने कई महीनों पहले मशीनें तो अटल सेवा केन्द्रों में पहुंचा दी, मगर इस मशीन का उपयोग लेने की जानकारी किसी को भी नहीं मिली। ना ही गांवों में इसे संचालित करने के लिए अब तक किसी ऑपरेटर को नियुक्त की गई है। ऐसे में अटल सेवा केंद्रों में लगी ई मित्र प्लस मशीन का उपयोग नहीं हो रहा है। इसके चलते यह मशीनें महज शोपीस बन कर रह गई हैं।
नहीं मिल रहा फायदा
ई-मित्र प्लस मशीन दिखने में एटीएम जैसी दिखाई देती है। इसमें 32 इंच की एलईडी के साथ मॉनिटर, वेब कैमरा, कैश असेप्टर, कार्ड रीडर, मैटलिक की-बोर्ड, रसीद के लिए वार्मल प्रिंटर आदि मौजूद हैं। ई मित्र प्लस मशीन के माध्यम से आमजन को ई मित्र कियोस्क से मिलने वाली सभी सुविधाएं मिल सकती हैं। उपभोक्ता की ओर से ली जाने वाली सुविधा का शुल्क कैश या कार्ड स्वाइप कर किया जा सकता है। भुगतान करने के बाद लेजर प्रिंटर से रसीद भी मिलेगी। इस मशीन के जरिए जमाबंदी की नकल, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र का प्रिंट, बिजली बिल सहित कई सेवाएं मिलनी थी। लेकिन अब तक इनका फायदा नहीं मिल रहा।

ग्रामीणों को आज भी काटने प ड़ रहे चक्कर
उपखण्ड के सभी ग्राम पंचायतों, समिति व सरकारी ऑफिसों में ई-मित्र प्लस मशीनें किसी काम नहीं आ रही। पूर्ववर्ती सरकार के समय में मशीनें जनता की जरुरतों को ध्यान में रखकर यह योजना शुरू की गई थी।
इनका कहना
उपखंड क्षेत्र में 40 मशीनें है। इनकी देखरेख ग्राम पंचायत स्वयं करती है। हमारी ओर से इसकी मॉनिटरिंग की जाती है, अगर किसी ग्राम पंचायत में ये मषीने बंद है तो उसे चालू करवा दी जाएगी।
- जितेन्द्र कुमार, सूचना सहायक

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