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जालोर नागरिक सहकारी बैंक का सिक्योरिटी सिस्टम हैक का यह था कारण जानिये...

Khushal Singh Bhati

Publish: Nov 09, 2019 10:24 AM | Updated: Nov 09, 2019 10:24 AM

Jalore


- जालोर नागरिक सहकारी बैंक के सिक्योरिटी सिस्टम हैक का मामला, 4 खातों से 26 खातों में 29 बार हुआ ट्रांजेक्शन

जालोर. साइबर अपराधियों के निशाने पर आए जालोर नागरिक सहकारी बैंक के चार खाता धारकों के खातों से 86.42 लाख रुपए ट्रांजेक्शन के मामले में साइबर टीम जयपुर जांच में जुटी हुई है। मामले में पहले स्तर की पड़ताल में साइबर टीम ने डेटा सेवर (सॉफ्टवेयर कंपनी) में गड़बड़ी की आशंका जताई और इस एजेंसी से पूछताछ की जा रही है। बैंक कार्मिकों के अनुसार यह एजेंसी आरबीआई एप्रूड होती है। नागरिक सहकारी बैंक की डेटा सेवर कंपनी अहमदाबाद की है, इस कंपनी के पास 20 से ज्यादा बैंक के डाटा सुरक्षित हैं। संभावना यह है कि यही से कहीं सुरक्षा में सेंधमारी हुई है। जिसके बार मोबाइल बैंकिंग के जरिये राशि निकाली गई है। घटनाक्रम 18 अक्टूबर का है और इस दिन सवेरे 10 बजे से 2 बजे के बीच ये ट्रांजेक्शन हुए है।
4 खातों से 26 खातों में राशि ट्रांसफर
इन 4 खातों से इस दिन 26 खातों में 29 बार ट्रांजेक्शन हुआ। उसके बाद इन खातों से आगे भी राशि को ट्रांसफर किया गया है। इस मामले में साइबर टीम जांच कर रही है। इस ठगी के पीछे साइबर एक्सपर्ट गैंग होने की आशंका है। जिसके बारे में भी पड़ताल की जा रही है। इन चारों खातों से ट्रांजेक्शन नोएडा, जयपुर, कर्नाटका राज्य के खातों में किया गया है और उसके बाद आगे से आगे राशि ट्रांसफर की गई है।
टीम जुटी जांच में
मामले में खास बात यह है कि ये सभी चारों खाते 20 लाख और अधिक राशि के है। इससे संबंधित प्रकरण जयपुर साइबर थाने में ही दर्ज हो सकता है। प्रकरण दर्ज होने के साथ टीम विभिन्न स्तर पर पूछताछ कर रही है। वहीं फोरेङ्क्षसक जांच भी चल रही है।
मोबाइल बैंकिंग सर्विस को रोका
सर्विस प्रोवाइडर कंपनी डेटा सेवर यूनिट टीएम सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड अहमदाबाद पर ही डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है। बैंक की क्षतिपूर्ति के लिए यह एजेंसी बाध्य है और उसकी ओर से क्षतिपूर्ति की जाएगी। दूसरी तरफ बैंक की ओर से सुरक्षा की दृष्टि से अभी मोबाइल बैंकिंग सर्विस को रोका गया है।
अभी बैंक ने जमा करवाई राशि
जालोर नागरिक सहकारी बैंक में यह एक अलग तरह का प्रकरण घटित हुआ। जिसमें सिस्टम हैक हुआ है। सिस्टम हैक होने के साथ राशि खातों से ट्रांसफर होने के बाद बैंक द्वारा यह राशि फिर से खातेदारों के खाते में जमा करवाई जा चुकी है। वहीं बैंक को क्षतिपूर्ति सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से होनी है। गौरतलब है कि 18 अक्टूबर को नर्मदा शंकर मीठालाल दवे, महावीर स्वामी पंचशिकारी जिनालय, कांता देवी एवं मंगलसिंह के खाते से रुपए ट्रांसफर हुए।
पत्रिका अलर्ट: सूचित करें पुलिस को
डिजिटाइजेशन के साथ ऑन लाइन ट्रांजेक्शन अधिक हो रहा है। यह तकनीक सुविधा जनक तो जरुर है, लेकिन कई मौकों पर यह नुकसान दायक भी साबित हो चुकी है। इन सुविधाओं का उपयोग करने के दौरान सुरक्षा के मानकों को पूरी तरह से पालन करें। यही नहीं ट्रांजेक्शन के दौरान ओटीपी को फोन पर शेयर न करें। वहीं इस तरह की वारदात होने पर पुलिस को जरुर इत्तला करें।
इनका कहना
बैंक का सिस्टम प्रभावित नहीं है और वर्किंग यथावत शुरू है। वहीं खातेदारों द्वारा जमा करवाई गई राशि भी पूरी तरह से सुरक्षित है। मामला हालांकि साइबर थाने में विचाराधीन है, लेकिन पहले स्तर की जांच में यह गड़बड़ी बैंक के स्तर की नहीं, बल्कि सर्विस प्रोवाइडर के यहां से होनी प्रतीत हो रही है। सर्विस प्रोवाइडर एजेंसी बैंक को क्षतिपूर्ति को बाध्य है। बैंक को किसी तरह की हानि नहीं हुई और सभी खातेदारों की राशि भी सुरक्षित है।
- नितिन सोलंकी, अध्यक्ष, जालोर नागरिक सहकारी बैंक, जालोर

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