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लगातार बजरी खनन से पांच हजार हैक्टेयर में भूजल पहुंचा रसातल

Dharmendra Ramawat

Publish: Jan 18, 2020 10:33 AM | Updated: Jan 18, 2020 10:33 AM

Jalore

www.patrika.com/rajasthan-news

तुलसाराम माली
भीनमाल. भीनमाल और आसपास के क्षेत्र के सैकड़ों कुओं के लिए जीवनदायी खजुरिए नाले को बजरी खनन माफिया ने जगह-जगह खोद खोद कर खत्म कर दिया है। इससे आस पास के करीब पांच हजार हैक्टेयर क्षेत्र के कुओं का जलस्तर रसातल में पहुंच गया है। इसका असर ये है कि सैकड़ों कुएं सूख गए हैं। जमीन बंजर हो गई और इन खेतों के आसरे रहने वाले लोग बेकार और बेरोजगार हो गए हैं। बजरी खनन पर रोक के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की यहां धज्जियां उड़ती देखी जा सकती हैं। भीनमाल का खजुरिया नाला पहाडि़यों से आने वाले पानी का प्राकृतिक बहाव क्षेत्र है। भीनमाल शहर से सटते अधिकांश कुएं इसी नाले के आसपास हैं। नाले में धीमा-धीमा बहाव आसपास के कुओं को रिचार्ज रखता था। बजरी खनन माफिया ने इस नाले को इस कदर छलनी किया कि अब बजरी नहीं होने से पानी का ठहराव नहीं होता और पानी जमीन के अंदर नहीं पहुंच पाता है। जिसकी वजह से इस नाले के आसपास केे करीब तीन सौ कुएं व ट्यूबवैल सूख गए है। कुओं से सिंचित होने वाली करीब पांच हजार हैक्टेयर उपजाऊ जमीन भी अब बंजर हो गई है। बजरी खनन होने के बाद भीनमाल-बी की ढाणियों में साल-दर-साल भूजल स्तर रसातल में पहुंच गया है। ऐसे में सैकड़ों किसानों की रोजी रोटी पर भी संकट खड़ा हो गया है। कभी हरी-सब्जियों व बगीचों से सरसब्ज रहने वाले कृषि कुएं दम तोड़ चुके हैं। हरियाली से आच्छादित रहने वाले इस क्षेत्र के किसान अब खजुरिए नाले में अवैध खनन का दंश झेल रहे हैं।
फ्लोराइड की मात्रा भी बढ़ी
किसानों की माने तो नब्बे के दशक में भीनमाल-बी की ढाणियों में भूजल स्तर 90 फीट के करीब था। यहां अब भू-जल स्तर 700 फीट के करीब पहुंच गया है। भूजल से खारापान व फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित मानकों से कई गुणा अधिक बढ़ गई है। मालियों की ढाणी, दासपां रोड की ढाणियां व मीरपुरा रोड की ढाणियों के सैकड़ों कृषि कुएं सूख गए हैं। किसान दीपाराम माली का कहना है कि बजरी के खनन से नाले में बरसाती पानी का ठहराव नहीं होने से कुएं सूख गए हैं। किसान मूंगाराम मेघवाल का कहना है कि खजुरिए नाले पर एनिकट या मिनी बांध बनने पर किसानों को राहत मिल सकती है।
किसान भंवरलाल सोलंकी व भगवानाराम माली का बताया कि यहां के कृषि कुओं में पानी की गुणवत्ता घट गई है। पीने के लिए भी किसानों को टैंकर मंगवाने पड़ते है।
एनिकट की मांग
खजुरिए नाला क्षेत्र के कुओं के लिए एक वरदान है, नब्बे के दशक में नाले में बजरी होने से पानी का ठहराव होता था। लेकिन अब पानी नहीं ठहरने से भूजल स्तर गहरा गया है। यहां पर एनिकट बने तो, भूजल स्तर बढ़ सकता है। हमने कई बार एनिकट की मांग की, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई।
- मसराराम मेघवाल, किसान
पुन: प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे
खजुरिए नाले पर बजरी के खनन से पानी का ठहराव नहीं होने से कृषि कुएं रिचार्ज नहीं हो पाते है। नाले पर एनिकट बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली है। नाले पर एनिकट बनाने के लिए पुन: प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे।
- अब्दुल हमीद, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग भीनमाल

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