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विसर्जन में नहीं बरतें लापरवाही वरना...

Khushal Singh Bhati

Publish: Aug 12, 2019 11:03 AM | Updated: Aug 12, 2019 11:03 AM

Jalore

- सीलू के निकट नर्मदेश्वर घाट के पास दशा माता की प्रतिमा का विसर्जन के दौरान दो भाइयों की डूबने से मौत, गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार

जालोर/ हाड़ेचा. दशामाता नवरात्र महोत्सव के बाद सांचौर के सरवाना थाना क्षेत्र के अंतर्गत सीलू हैड के पास नर्मदेश्वर घाट में माता की मूर्ति के विसर्जन के दौरान हुए हादसे में दो सगे भाइयों की डूबने से मौत हो गई। घटनाक्रम रविवार सवेरे का है, जब महोत्सव की समाप्ति के बाद धूमधाम से ग्रामीण माता की प्रतिमा विसर्जन के लिए घाट पर पहुंचे। इस दौरान सीलू के निकट नर्मदेश्वर घाट में विसर्जन के दौरान दो भाई सुरा भील (20) और पुखराम (18) निवासी माखुपुरा पानी में डूब गए। जिसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया। सूचना के बाद पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और दोनों भाइयों की तलाश शुरू की। मशक्कत के बाद दोनों भाइयों के शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सुपुर्द किए गए। दोपहर बाद गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। घटनाक्रम के बाद मृतकों के मामा सामाराम ने रिपोर्ट पेश की।
सुरक्षा जरुरी, लेकिन गणपति पर ही सजगता
मानसून की सीजन के दौरान या उसके बाद कई पर्व आते हैं, जिनमें विसर्जन की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। जिसमें सबसे अधिक विसर्जन गणपति महोत्सव के तहत किए जाते हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से अक्सर इस प्रमुख पर्व पर ही सुरक्षा के लिए एहतियात बरती जाती है। जबकि गणपति महोत्सव के अलावा मुख्य रूप से दशा माता महोत्सव, नवरात्र महोत्सव के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इसके अलावा कृष्ण जन्मोत्सव के बाद कानुड़ा का विसर्जन किया जाता है और इस दौरान माटी से बनी प्रतिमाओं को मान्यता के अनुसार जल संग्रह के स्थानों में जिसमें मुख्य रूप से तालाब और नदी के बहाव क्षेत्र प्रमुख है, उनमें लोग पहुंचते हैं। अक्सर नजरअंदाजी के चलते हादसे भी होते हैं या डूबने से मौतें भी होती है।
सो रहा प्रशासन
अधिकतर प्रवाह वाले क्षेत्रों में अवैध रूप से बजरी या माटी का खनन हुआ है। जिससे प्रवाह क्षेत्र के बीच म गड्ढे बन चुके है। जिससे गड्ढों का अनुमान लगाना मुश्किल है। नदी में रॉयल्टी ठेकेदारों के लिए भी मापदंड तय है, लेकिन प्रशासन के मौन के चलते खनन माफियाओं ने बिना मानक बजरी खनन के लिए गड्ढे खोद दिए हैं, जो अब मौत का सबब बन रहे हैं। गौरतलब है वर्ष २०११ में नदी के बहाव के दौरान रपट के पास इसी तरह बेतरतीब ढंग से बजरी के लिए अवैध तरीके से खोदे गए गड्ढों में जालोर के निकट जवाई नदी में डूबने से ९ बच्चों की मौत हो गई थी।
पत्रिका सरोकार: बरतें सावधानी
इस साल हालांकि बारिश कम हुइ है। इसलिए जलस्रोतों में पानी की आवक कम है, लेकिन कुछ दिनों बाद गणपति महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसके बाद गणपति विसर्जन के लिए लोग जल प्रवाह या भराव वाले क्षेत्रों में पहुंचेंगे। हर साल इन हालातों में पानी में डूबने से मौतें भी होती है। इसलिए आवश्यक है कि विसर्जन के दौरान सावधानी बरती जाए। थोड़ी सी लापरवाही या चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। वहीं पानी का भराव होने से अब इनमें गड्ढों का अनुमान लगा पाना मुश्किल है। ऐसे में विशेषतौर से बच्चों पर ऐसे स्थानों पर नजर रखें और उन्हें जहां तक हो सके ऐसे स्थानों तक नहीं पहुंचने दें।