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एक किमी के सीधे रास्ते पर बेरियर, भुगत रहे बीस किमी डाइवर्जन

Jitesh kumar Rawal

Publish: Nov 18, 2019 12:44 PM | Updated: Nov 18, 2019 12:44 PM

Jalore

www.patrika.com/rajasthan-news

फैलाकर रखी निर्माण सामग्री के कारण रोका सीधा रास्ता, लम्बे व दुरूह मार्ग पर पांच माह से कर रखा है डाइवर्जन, आसानी से गुजर सकती हैं बसें पर जिम्मेदार बेपरवाह


जालोर. बागरा में रेलवे फाटक के दोनों ओर लगभग एक किमी का रास्ता बसों को गुजारने लायक है, लेकिन नामालूम कार्यकारी एजेंसी इसे शुरू क्यों नहीं करना चाह रही। इस एक किमी के अवरोध के कारण वाहनों को बीस किमी का लम्बा व दुरूह डाइवर्जन भुगतना पड़ रहा है। इसमें हादसे का अंदेशा तो रहता ही है समय व धन की बर्बादी भी हो रही है। दोनों तरफ से बेरियर हटा दिए जाए तो बसें सीधे रास्ते पर ही आसानी से गुजर सकती है। लेकिन, न तो बेरियर हटाए जा रहे है और न रास्ता शुरू हो रहा है। कार-जीपें भी अभी तक गांव की गलियों से होकर आगे-पीछे निकल रही है, वे भी सीधे ही गुजर सकेंगे। बताया जा रहा है कि फाटक के आसपास की भूमि पर ओवरब्रिज बनाने वाली एजेंसी ने निर्माण सामग्री फैला रखी है। कार्य करने के लिए पूरी भूमि उपयोग में आ रही है इसलिए वाहनों का आवागमन रोक देना एजेंसी के लिए फायदेमंद बना हुआ है। नियमानुसार निर्माण कार्य चल रहा होने पर वाहनों को पुख्ता रूप से डाइवर्जन देना चाहिए, लेकिन यहां टूट-फूटे मार्ग पर ही वाहन डाइवर्ट कर रखे हैं। हालांकि सीधे मार्ग पर कार-जीप आदि गुजार रहे हैं, लेकिन बसों को पार नहीं किया जा रहा है। ऐसे में बस यात्रियों को जान जोखिम में डालते हुए लम्बे व दुरूह मार्ग से निकलना पड़ रहा है। डाइवर्जन मार्ग पर पांच माह से वाहन हादसे की जद में चल रहे हंै, लेकिन जिम्मेदारों की नींद नहीं खुल रही।

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फायदे के लिए ताक पर रखे कायदे
माना जा रहा है कि कार्यकारी एजेंसी ने अपने फायदे के लिए सरकारी कायदे ताक पर रखे हुए हैं, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बन रहा है। निर्माण कार्य चल रहा होने से इस मुख्य मार्ग को लम्बे व दुरूह मार्ग पर डाइवर्ट कर रखा है। यह व्यवस्था एक-दो दिन से नहीं बल्कि पांच माह से चल रही है। लगभग बीस किमी का यह डाइवर्जन मार्ग बुरी तरह से जर्जर है तथा इस पर चलते हुए वाहन अक्सर हादसे का शिकार हो रहे हैं। डाइवर्जन मार्ग की खराब स्थिति का आकलन इसी से किया जा सकता है कि इस मार्ग को पार करने में घंटाभर लग जाता है।


आजकल-आजकल में टाल रहे
बताया जा रहा है कि कार्यकारी एजेंसी आजकल-आजकल की बात कहते हुए दिन गुजार रही है। प्रशासनिक अधिकारी भी मानते हैं कि एजेंसी के अधिकारी हर बार दो-चार दिन में सीधा रास्ता खोले जाने की बात कहते हैं, लेकिन पांच माह गुजर गए दो-चार दिन की यह समयावधि खत्म नहीं हुई। एजेंसी की टालमटोल वाली इस नीति से यात्रियों को मुश्किल झेलनी पड़ रही है।

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कार-जीप भी गलियों से गुजर रही
वाहन चालक बताते हैं कि रेलवे फाटक के पास से बसों को निकालने जितनी पर्याप्त जगह है, लेकिन कार्यकारी एजेंसी रास्ता नहीं दे रही। फाटक के दोनों ओर कुछ आगे सीमेंटेड पिलर लगा कर रास्ता अवरुद्ध कर रखा है। रास्ते पर निर्माण सामग्री भी डाल रखी है। ऐसे में कार-जीपों को भी फाटक क्रॉस करने के बाद गांव की गलियों से होकर आगे-पीछे निकलना पड़ रहा है।


हर बार एक ही बात कह रहे...
कार्यकारी एजेंसी के अधिकारी से बात की थी वे हर बार दो-चार दिन में मार्ग शुरू करने की बात कह रहे हैं। सही है कि वाहनों को निकालने के लिए डाइवर्जन दे रखा है, लेकिन यह जर्जर हो चुका है।
- तेजाराम चौधरी, एक्सइएन, पीडब्ल्यूडी, जालोर


दो-चार दिन में खोल देंगे...
बारिश होने से कुछ समस्या आ गई थी, लेकिन दो-चार दिन में सीधा रास्ता खोल देंगे। इस सीधे रास्ते पर अभी डामर किया जा रहा है। तक तक वाहनों को गुजारने के लिए डाइवर्जन दे रखा है।
- सोमाभाई पटेल, मुख्य अधिकारी, कार्यकारी एजेंसी, बागरा

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