स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

पूर्व मुख्यमंत्रियों के पास आवास और सुविधाएं अब तक क्यों

Jagdish Vijayvergiya

Publish: Nov 19, 2019 00:44 AM | Updated: Nov 19, 2019 00:44 AM

Jaipur

कोर्ट ने मुख्य सचिव से अवमानना याचिका पर मांगा जवाब

जयपुर. राजस्थान हाइकोर्ट ने 4 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास सहित अन्य सुविधाएं देने का गलत ठहराया था। आदेश की पालना नहीं होने पर मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार और न्यायाधीश अभय चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। मिलापचंद डांडिया की याचिका पर कोर्ट ने राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम 2017 की धारा 7 बीबी और धारा 11 (2) को रद्द कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में माना था कि लोकतंत्र में पूर्व मुख्यमंत्री और आमजन समान हैं। ऐसे में उन्हें आजीवन कोई सुविधा नहीं दी जा सकती। डांडिया के वकील विमल चौधरी ने अवमानना याचिका दायर कर कहा कि अदालत के आदेश के बावजूद राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई सुविधाएं वापस नहीं ली हैं। न ही उनके आवास खाली कराए हैं। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील भी पेश नहीं की है। ऐसे में हाइकोर्ट का 4 सितंबर का आदेश अंतिम आदेश हो गया है। इसलिए आदेश की पालना करवाते हुए अवमानना करने वाले अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
————————————————————
इधर नोटिस जारी
दूसरी ओर, सार्वजनिक निर्माण विभाग खंड प्रथम ने सिविल लाइंस में बंगला नंबर 14 को खाली कर कब्जा शीघ्र विभाग को देने के लिए नोटिस जारी किया है। अधिशासी अभियंता अनिल पारीक ने विक्रमादित्य सिंह के नाम जारी नोटिस में कहा कि संपदा अधिकारी और एडीजे कोर्ट से अपील खारिज हो गई है, आवास खाली कर कब्जा दें।

[MORE_ADVERTISE1]