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Vaibhav Gehlot को RCA प्रेसिडेंट बनाने की जी-तोड़ कोशिश, CP Joshi ने सम्भाला मोर्चा

Nakul Devarshi

Publish: Sep 23, 2019 09:56 AM | Updated: Sep 23, 2019 10:04 AM

Jaipur

Rajasthan Cricket Association Election 2019 का चुनाव एक बार फिर पूरी तरह से सियासी अखाड़ा बना हुआ है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Ashok Gehlot ) के पुत्र वैभव गहलोत ( Vaibhav Gehlot ) को आरसीए प्रेजिडेंट ( RCA President ) बनाने को लेकर जोशी ( CP Joshi ) गुट जी-तोड़ कोशिशों में उठा हुआ है। रविवार को वैभव गहलोत खुद सामने आ गए और आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी के निवास पर जिला क्रिकेट संघों के पदाधिकारियों ( Cricket Association office bearers ) से मुलाक़ात की।

जयपुर।

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) का चुनाव एक बार फिर पूरी तरह से सियासी अखाड़ा बना हुआ है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत ( Vaibhav Gehlot ) को आरसीए प्रेजिडेंट बनाने को लेकर जोशी गुट जी-तोड़ कोशिशों में उठा हुआ है। रविवार को वैभव गहलोत खुद सामने आ गए और आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी ( CP Joshi ) के निवास पर जिला क्रिकेट संघों के पदाधिकारियों से मुलाक़ात की।


सूत्रों ने बताया कि सीपी जोशी गुट ने वैभव गहलोत को चुनाव में उतारने की तैयारी तेज कर दी है। इसी कड़ी में जिला संघों से मिलने के लिए वैभव रविवार को सीपी जोशी के घर पहुंचे। यहां वैभव ने करीब 15 से अधिक जिला संघों के पदाधिकारियों से मुलाकात कर चुनाव को लेकर चर्चा की।


जोशी ने भी वैभव की उम्मीदवारी को लेकर जिला संघों से सहमति बनाने की कोशिश की। जोशी खेमे का मोर्चा कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, महेन्द्र शर्मा, रामपाल शर्मा व अमीन पठान ने संभाल रखा है। जिला संघों को जोशी व गहलोत से मिलवाया जा रहा है।

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जोशी गुट उनके समर्थक जिला संघों को एकजुट रखने की कोशिश में लग गया है। इसके चलते सोमवार को फिर से जिला संघों को बुलाया गया है, जहां से इन्हें किसी होटल या रिसोर्ट में बाड़ेबंदी के लिए ले जाया जा सकता है।


जोशी गुट का कहना है कि ललित मोदी गुट से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। दूसरी ओर ललित मोदी गुट के आरएस नांदू कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामेश्वर डूडी को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। डूडी के तेवर भी तीखे बने हुए हैं। वह अपने खेमे को मजबूत करने के लिए जोशी गुट में सेंध लगाने की कोशिश में है।

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गौरतलब है कि गहलोत पुत्र वैभव हाल ही में राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष बने हैं। वैभव को पहले जोधपुर जिला संघ से एंट्री कराने के प्रयास किए गए, लेकिन हाईकोर्ट का स्टे लगने के बाद उन्हें राजसमंद से पदाधिकारी बनाया गया। ये भी ध्यान दिला दें कि विभानसभा और आरसीए अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी भी राजसमंद के कोषाध्यक्ष रहते हुए पहली बार आरसीए के अध्यक्ष बने थे।


वैभव गहलोत की ऐसे हुई थी एन्ट्री

राजसमंद जिला क्रिकेट एसोसिएशन ने वैभव गहलोत को निर्विरोध कोषाध्यक्ष चुना था। निर्वाचन प्रक्रिया में 19 में से 16 सदस्यों के समर्थन से वैभव को कोषाध्यक्ष चुना गया। यह पद 22 जुलाई को तत्कालीन कोषाध्यक्ष प्रदीप पालीवाल के निधन से खाली हो गया था, जिसका 21 दिन का नोटिस आरसीए और सहकारिता विभाग को जारी किया गया था। पहले वैभव को सदस्य बनाया गया और फिर उन्हें कोषाध्यक्ष पद दिया गया।


जोशी गुट उठा चुका है चुनाव प्रक्रिया पर सवाल

तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार आरसीए के चुनाव 27 सितंबर को होने हैं। लेकिन जोशी गुट ने चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े किये हैं। पिछले दिनों ही एकेडमी में आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान जोशी गुट के जिला संघों के पदाधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाये थे।


20 अगस्त को जारी चुनाव के नोटिस पर आपत्ति जता उनकी दलील थी कि राजस्थान क्रीड़ा परिषद स्वीकृत जिला संघों के पदाधिकारियों की सूची ही मान्य हो। जोशी गुट ने सुनवाई से पहले इस पर फैसले का दबाव डाल चुनाव अधिकारी पर मोदी गुट के वकीलों से मिलीभगत होने का भी आरोप लगाया था।


सियासी पिच पर डूडी : लड़ाई की जड़ जोशी

कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक रामेश्वर डूडी ( Rameshwar Dudi ) ने कहा था, लड़ाई की जड़ सीपी जोशी ( CP Joshi ) हैं। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि जोशी हार जाने के डर से ऐसा करवा रहे हैं। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हो रहा है।

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वैभव को कर रहे गुमराह, मैं लड़ूंगा चुनाव

डूडी पहले ही कह चुके हैं कि वैभव गहलोत को जोशी गुमराह कर रहे हैं। अब बीसीसीआइ जो भी फैसला करेगी, उन्हें मंजूर होगा। यदि जिला संघ चाहेंगे तो वह अध्यक्ष का चुनाव जरूर लड़ेंगे, सामने कोई भी हो।


जोशी गुट का 'डीआरएस' : बैन से पहले कैसा नोटिस?

जोशी गुट के संयुक्त सचिव महेंद्र नागर ने कहा कि चुनावी नोटिस 20 अगस्त को निकला। उस वक्त आरसीए निलंबित थी। बीसीसीआइ चुनाव कैसे करा सकती है। पदाधिकारियों की सूची क्रीड़ा परिषद व रजिस्ट्रार से स्वीकृत नहीं है। राज्य मेंं लागू खेल कानून के मुताबिक चुनाव हों।