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आपके घर की रसोई से निकलेगा टीबी से लड़ने वाला हथियार

Amit Purohit

Publish: Sep 23, 2019 14:03 PM | Updated: Sep 23, 2019 14:03 PM

Jaipur

टीबी के खिलाफ एकमात्र वैक्सीन बीसीजी की प्रभावकारिता को और अधिक बढ़ा सकता है नैनो-करक्यूमिन जो कि हल्दी का एक गुणकारी तत्व है

हल्दी, भारतीयों की रसोई में पाया जाने वाला एक आम मसाला है। अब भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि टीबी यानी तपेदिक के खिलाफ लड़ाई में हल्दी काफी कारगर साबित हो सकती है। अपनी रिसर्च में वैज्ञानिकों ने कहा है कि टीबी के खिलाफ दुनिया में एक मात्र वैक्सीन बीसीजी को और प्रभावी बनाया जा सकता है अगर इसके साथ हल्दी के गुणकारी तत्व करक्यूमिन के नैनो पार्टिकल्स उपयोग में लिए जाएं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज तपेदिक के खिलाफ लड़ाई में एक नया हथियार दे सकती है। इससे पहले कैंसर के खिलाफ भी हल्दी के गुणकारी तत्वों का फायदा कुछ शोध में सामने आ चुका है। गौरतलब है कि टीबी दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक है, जो हर वर्ष लाखों लोगों की जान ले लेती है।

हल्दी के औषधीय उपयोग में अधिक गुणकारी होने की एक बड़ी वजह है, हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन। बेशक, यह हल्दी में बहुत छोटे से हिस्से में मौजूद होता है, लेकिन सबसे अधिक कारगर भी यही होता है। अब वैज्ञानिकों ने हल्दी की इसी खासियत की वजह से हल्दी को टीबी की रोकथाम में भी मददगार पाया है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के जीवविज्ञानी टीबी के लिए मौजूदा उपचार विकल्पों में सुधार के तरीकों की तलाश कर रहे थे, इस बीच उन्होंने नैनो-करक्यूमिन पर भी गौर किया। अपने प्रयोगों में उन्होंने पाया कि नैनो-करक्यूमिन के साथ बीसीजी की एक बूस्टर खुराक, वैक्सीन की प्रभावकारिता को बढ़ा देती है।

नैनो-करक्यूमिन से घटेगी एंटी बायोटिक की अधिक जरूरत

नैनो-करक्यूमिन न केवल दुश्मन से लडऩे वाली कोशिकाओं को उत्तेजित करने और सक्रिय करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है बल्कि दो प्रमुख प्रतिरक्षा कोशिकाओं के उत्पादन को भी बढ़ाता है। टीम ने अमरीकन सोसायटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी की ओर से प्रकाशित एक जर्नल इंफेक्शन एंड इम्यूनिटी में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'करक्यूमिन नैनो-कण टीबी टीकों की प्रभावकारिता को बढ़ाने का भरोसा जगाते हैं।' जेएनयू के वैज्ञानिक और टीम के एक सदस्य आनंद रंगनाथन कहते हैं, 'इसका मतलब है कि कम एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता पड़ेगी।' करक्यूमिन नैनो-कण बीसीजी टीकों की प्रभावकारिता बढ़ाने का भरोसा दिलवा रहे हैंहालांकि अन्य पशु मॉडल में इसकी सुरक्षा और प्रभावकारिता का मूल्यांकन करने के लिए और अधिक प्रयोगों की आवश्यकता है।

रोज हल्दी का सेवन करने से कई बीमारियों से बचाव

शोध के टीम लीडर गोवर्धन दास का कहना है कि हल्दी के कोई साइड-इफेक्ट नहीं है, ऐसे में तपेदिक के इलाज का यह तरीका और भी बेहतर है, हालांकि इस संबंध में अभी और शोध की आवश्यकता है। गौरतलब है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन में एंटी-ऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेट्री और हड्डियों को विकसित करने की क्षमता होती है। कई शोध पहले भी प्रमाणित कर चुके हैं कि खाने में रोज हल्दी का सेवन, कई तरह की बीमारियों से बचा सकता है। मैग्नेशियम, पोटैशियम, आयरन, विटमिन बी6, ओमेगा 3, ओमेगा 6 फैटी ऐसिड और एंटी-सेप्टिक गुणों से भरपूर हल्दी प्राकृतिक हीलर का काम करती है। आयुर्वेद में इसे एक चमत्कारिक औषधि का दर्जा दिया गया और सदियों से हल्दी का सेवन शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने के लिए किया जा रहा है।

बड़ा खतरा है क्षय रोग
लगभग 28 लाख मामलों के साथ, 2016 में दुनिया के सबसे अधिक टीबी रोगी भारत से थे। आशंका यह भी है कि लाखों और भी लोग हैं जो निगरानी में नहीं आ पाए। वर्ष 2006 से 2014 के बीच यह बीमारी लगभग 340 बिलियन डॉलर के आर्थिक बोझ के अलावा हर 90 सेकंड में एक मौत और सालाना 12 लाख नए संक्रमण की वजह थी।