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रामगढ़ विषधारी अभयारण्य होगा प्रदेश में चौथा टाइगर रिजर्व

Dhairya Kumar Mishra

Publish: Oct 14, 2019 00:31 AM | Updated: Oct 14, 2019 00:31 AM

Jaipur

बूंदी के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य को प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व बनाने की कवायद शुरू हो गई है।  रणथम्भौर में बाघों के टेरेटरी को लेकर संघर्ष के बाद बाघ पर्यावास के विकल्प तैयार करना जरूरी हो गया है। प्रदेश में अभी रणथम्भौर, सरिस्का व मुकुंदरा टाइगर रिजर्व हैं।

सवाईमाधोपुर. बूंदी के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य को प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए सात अक्टूबर को प्रदेश के वन अधिकारियों व नेशनल टाइगर कंजर्वेशन एथॉरिटी (एनटीसीए) के अधिकारियों की बैठक भी हो चुकी है। रणथम्भौर में बाघों के टेरेटरी को लेकर संघर्ष के बाद बाघ पर्यावास के विकल्प तैयार करना जरूरी हो गया है। प्रदेश में अभी रणथम्भौर, सरिस्का व मुकुंदरा टाइगर रिजर्व हैं।  गौरतलब है कि एनटीसीए ने रणथम्भौर से छह बाघों को रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में शिफ्ट करने की अनुमति भी दे दी है।

टाइगर रिजर्व में इन्हें शामिल करने की योजना
- इंद्रगढ़ से जैतपुर तक का रणथम्भौर का बफर जोन
- रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य
- देवझर से भीमलत महादेव तक कालदां का वन क्षेत्र
- गरड़दा व भीलवाड़ा में बांका-भोपतपुरा के जंगल

एक नजर में रामगढ़ विषधारी अभयारण्य
- 20 मई 1982 को हुई थी स्थापना
- 307.40 वर्ग किमी था क्षेत्रफल
- जनवरी 2017 में अभयारण्य की नई सीमा निर्धारित
- 357.23 हैक्टेयर का बूंदी शहरी क्षेत्र हुआ था डिनोटिफाइड
- 248 वर्ग किमी है एरिया


एक्सपर्ट व्यू...
चंबल के दोनों किनारों (राजस्थान व मध्यप्रदेश) के जंगलों को जोडऩे के लिए 2010 में चंबल लैण्डस्केप प्लान के नाम से प्रस्ताव तैयार किया था। इसमें रणथम्भौर से चितौडगढ़ के भैंसरोडगढ़ अभयारण्य व एमपी के जंगलों को शामिल किया था। इस प्रस्ताव पर काम होगा तो इससे बाघों को पर्यावास के लिए अधिक क्षेत्र मिलेगा।
- आर.एन. मेहरोत्रा, पूर्व वन्यजीव प्रतिपालक।

इनका कहना है...
राजस्थान के वन अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। इसमें रामगढ़ व अन्य कुछ जंगलों को जोड़कर एक नया टाइगर रिजर्व बनाने की चर्चा हुई थी। वन विभाग अभी इस पर काम कर रहा है।
- निशांत वर्मा, डीआईजी, एनटीसीए

- प्रदेश में चौथा टाइगर रिजर्व बनाने की कवायद की जा रही है। यह करीब आठ सौ वर्ग किलोमीटर का होगा। इससे बाघों को बेहतर पर्यावास मिलेगा।
- पृथ्वीसिंह राजावत, पूर्व मानद वन्य जीव प्रतिपालक, बूंदी