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राजस्थान के बड़े शहरों में सियासी दलों के होंगे दो-दो अध्यक्ष!

Jagdish Vijayvergiya

Publish: Oct 22, 2019 09:00 AM | Updated: Oct 22, 2019 01:27 AM

Jaipur

दो नगर निगम और दो महापौर

जयपुर. नगरीय विकास विभाग की ओर से राजधानी जयपुर में दो नगर निगम और दो महापौर सहित 250 वार्ड बनाने की घोषणा के बाद जयपुर शहर भाजपा और जयपुर शहर कांग्रेस में नए वार्डों के लिए संगठन खड़ा करने का काम फिलहाल थम गया है। अब पार्टी कार्यकर्ताओं में दो निगम की तरह ही पार्टियों के दो संगठन बनाने की चर्चा भी शुरू हो गई है।
दरअसल, अभी दोनों ही दलों का आंतरिक ढांचा एक संगठन का है। इसमें एक शहर अध्यक्ष और उसके बाद ब्लॉक, मंडल व वार्ड स्तर के पदाधिकारी हैं। अब शहर में वार्डों की संख्या 91 से बढ़कर 250 तक पहुंचने पर दोनों दलों के लिए इसके हिसाब से संगठन खड़ा करना बड़ी चुनौती है। हालांकि अब जयपुर में छह महीने के अंदर चुनाव होंगे लेकिन उससे पहले संगठन को नया रूप देना होगा ताकि चुनाव में हर वार्ड में पार्टी दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतर सके। 
वहीं निकाय चुनाव से पहले निकाय प्रमुख आरक्षण लॉटरी और नगरीय विकास विभाग के फैसलों से दोनों ही दलों की अब तक की तैयारियां धराशायी हो गई हैं। पहले 91 वार्ड और उसके बाद 150 वार्डों के हिसाब से अभी तक चल रही तैयारियों को अब फिर नए सिरे से शुरू करना होगा। वार्ड आरक्षण लॉटरी निकलने के बाद तो दावेदारों ने अपने स्तर पर टिकट की कवायद भी शुरू कर दी थी। अब पार्टियों के साथ दावेदार भी फिलहाल निष्क्रिय होने लगे हैं। हालांकि दो संगठन के बारे में राजनीतिक दलों के पदाधिकारी अभी कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं हैं।
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निकाय चुनावों के बदले समीकरणों पर होगी चर्चा?
प्रदेश भाजपा की बुधवार को प्रदेश कार्यालय में होने वाली बैठक में मुख्य तौर पर निकाय चुनावों के बदले समीकरणों सहित जिलो में चल रहे संगठन चुनावों पर चर्चा होने की संभावना है। प्रदेश अध्यक्ष के पद पर सतीश पूनिया के मनोनीत होने के बाद हो रही इस बड़ी बैठक में सभी 25 सांसदों सहित भाजपा के विधायक व पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। हाल ही निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस सरकार की ओर से बार-बार फैसले बदले जाने के बाद पार्टी के आगामी रुख पर भी निर्णय किया जा सकता है।
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अलग-अलग होंगे समस्याएं व मुद्दे
जयपुर हैरिटेज
- परकोटे के बाजारों में जाम
- बाजारों में अतिक्रमण
- हैरिटेज का बिगड़ता स्वरूप
- प्रदूषण
- लावारिस पशु, सीवरेज व गंदगी
- रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां
- संकरी गलियों में से निकलना मुश्किल, आधी सड़कों तक पर कब्जा
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जयपुर ग्रेटर
- अविकसित कॉलोनियों में सुविधाओं का अभाव
- यातायात जाम और सार्वजनिक परिहवन के साधनों का अभाव
- अतिक्रमण व अवैध निर्माण
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बड़ी चुनौती
- अब नए सिरे से वार्डों का परिसीमन होगा, वार्डों की तस्वीर सामने आने के बाद ही वहां के मुद्दे तय हो पाएंगे
- परिसीमन के बाद ही नए वार्डों में संगठन और पार्षद टिकट दावेदार सामने आएंगे
- वार्ड वार अध्यक्ष और उनकी टीम तैयार करना भी दोनों दलों के लिए बड़ी चुनौती होगी

भाजपा मौजूदा संगठन से बढ़ेगी आगे!
भाजपा की बात करें तो अभी निचले स्तर तक मौजूद संगठन के जरिए पार्टी आगे बढ़ेगी। पार्टी का मानना है कि पूरे प्रदेश की तरह जयपुर शहर में भी बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की टीम पहले से बनी हुई है। ऐसे में पार्टी को 250 वार्ड बनने के बाद भी संगठनात्मक दृष्टि से परेशानी नहीं आएगी।
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वार्डों का नए सिरे से परिसीमन होगा। उसके बाद हम वार्ड अध्यक्षों की नियुक्ति करेंगे। 150 वार्ड होने के बाद संगठन ने वार्ड अध्यक्ष बनाने का काम शुरू कर दिया था। अब इसे रोक दिया गया है और परिसीमन के बाद शुरू किया जाएगा।
- प्रतापसिंह खाचरियावास, शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष
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पूरे प्रदेश में भाजपा के सभी बूथों पर 25-25 कार्यकर्ताओं की कार्यसमिति है। 5-6 बूथों पर शक्ति केन्द्र प्रभारी मॉनिटरिंग करते हैं। 50 से 60 बूथों पर एक मंडल है। सरकार किसी भी तरह से चुनाव करा ले, हमारी तैयारी पूरी है।
- भजनलाल शर्मा, प्रदेश महामंत्री, भाजपा