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बच्ची ने लगाया पिता पर आरोप, कारीगर बोले जल गया रावण

Jagdish Vijayvergiya

Publish: Oct 22, 2019 08:25 AM | Updated: Oct 22, 2019 01:17 AM

Jaipur

सीएम ने सुनी सबकी पीड़ा

जयपुर. अब तक आपने फसल खराबा, सड़क हादसे में जनहानि और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा मांगते हुए लोगों को देखा होगा लेकिन सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर कुछ लोग रावण के पुतलों का मुआवजा लेने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उनकी बात गंभीरता से सुनी और मदद का भरोसा दिलाया।
दरअसल, दशहरे से एक दिन पूर्व आई तेज बरसात से राजधानी में सड़कों किनारे तैयार पड़े रावण के पुतले खराब हो गए थे। इससे कारीगरों को भारी नुकसान हुआ था। ये कारीगर दूर-दराज से महीनों पहले जयपुर में आकर रावण के पुतले तैयार करते हैं। मुआवजे की मांग को लेकर ये कारीगर सोमवार को सपरिवार सीएम हाउस पहुंचे और मुख्यमंत्री के समक्ष मुआवजे की मांग रखी। इन कारीगरों का कहना था कि वे दूसरे प्रदेशों से कर्ज लेकर जयपुर आते हैं और इस उम्मीद में पुतले बनाकर बेचते हैं कि वे अपना कर्ज चुका पाएंगे और पेट पालेंगे। इस बार बारिश ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं। अब वे अपने घर ही कैसे जाएं?

बच्ची ने कहा : मां मर चुकी है, पिता मेरा विवाह कराना चाहते हैं
मुख्यमंत्री ने लगभग साढ़े तीन घंटे तक जनसुनवाई की। तबादलों से असन्तुष्ट कई लोग भी सुनवाई में पहुंचे और नाराजगी जताई। टोंक जिले से अपने चाचा के साथ आई 15 वर्षीय बालिका ने मुख्यमंत्री को बताया कि उसकी मां की मृत्यु हो चुकी है, पिता उसका विवाह कराना चाहते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बाल विवाह रुकवाने के निर्देश दिए। सुनवाई में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों, महिलाओं, बुजुर्गों एवं युवाओं ने भी समस्याएं रखीं।

पीसीसी में कम आए फरियादी
दूसरी ओर, कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय पर सोमवार को सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने जनसुनवाई की। इसमें बमुश्किल 50 फरियादी ही पहुंचे। इनमें पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी शामिल थे। ऐसे में लोगों के लिए लगाई गईं कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। हालांकि चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग कह भी चुके हैं कि जनसुनवाई सप्ताह में एक-दो दिन से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। गौरतलब है कि शुरुआती दिनों में जनसुनवाई में भीड़ उमड़ी थी। पहले दिन जलदाय मंत्री डॉ. बीडी कल्ला के बाद अब तक कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, परिवहन मंत्री प्रताप सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश, भजनलाल जाटव, अर्जुन बामणिया सुनवाई कर चुके हैं।