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दिल्ली अग्निकांड से लें सबक... नहीं तो राख होते देर नहीं लगेगी

Manoj Kumar Sharma

Publish: Dec 09, 2019 00:23 AM | Updated: Dec 09, 2019 00:23 AM

Jaipur

गली-गली में सजाए बैठे हैं 'मौत का सामानÓ

घनी आबादी के बीच चल रही हैं गोदाम-फैक्ट्रियां
25 दिन पहले ही लगी थी बड़ी आग, अभी तक नहीं चेते जिम्मेदार

जयपुर। दिल्ली में आबादी के बीच चल रही फैक्ट्री में लगी आग से हुई 43 लोगों की मौत ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इस हृदय विदारक घटना के बाद राजस्थान पत्रिका टीम ने जयपुर के हालात देखे तो स्थिति कुछ ज्यादा ठीक नहीं है। यहां भी गली-गली में आबादी के बीच व्यावसायिक गतिविधियां खूब चल रही हैं। लकड़ी के गोदाम से लेकर कैमिकल दुकान और गत्ता फैक्ट्रियां अवैध रूप से संचालित हैं। हैरान करने वाली बात है कि परकोटा की तंग गलियां भी इसमें शामिल हैं। यहां चारपहिया वाहन जा भी नहीं सकता, फिर भी घर-घर में गोदाम चल रहे हैं। खास बात है कि जिम्मेदार को वर्षों से इसकी जानकारी भी है, मगर हालात आज भी जस के तस हैं। ना तो इन पर जिला प्रशासन कार्रवाई करता है और ना ही निगम। खुदा ना करे कि कोई ऐसी अनहोनी हो, मगर कभी छोटी सी चिंगारी भी उठी को आसपास के सैकड़ों घरों को राख किए बिना आग शंात नहीं होगी।

आग की तरह ही 'जलतेÓ हैं और फिर शांत हो जाते हैं
देश-प्रदेश में आग लगने के बाद जिम्मेदारों की आंख खुल जाती है। आनन-फानन में दो-चार के खिलाफ फोरी कार्रवाई करते हैं और जैसे ही मामला ठंडा पड़ता है, चुपचाप बैठ जाते हैं। जिला प्रशासन-निगम और पुलिस कागजी कार्यवाही तक सीमित रहते हैं। इंदौर में हॉस्टल में लगी आग के बाद भी जयपुर में जिला कलक्टर से लेकर निगम के अधिकारी जागे थे, लेकिन 15 दिन बाद फिर सब सो गए। इतना ही नहीं राजधानी में ही 25 दिन पहले रेलवे स्टेशन पर लगी आग के बाद भी आबादी क्षेत्र में गोदाम आदि पर कार्रवाई शुरू की गई, लेकिन यह भी आगे नहीं बढ़ सकी।

शहर में 2019 में ये हुए बड़े हादसे

12 नवबंर : रेलवे स्टेशन के पास गोपालबाड़ी कालवाड़ स्कीम में आबादी के बीच चल रही कैमिकल गोदाम में आग लगी। नौ दुकानों सहित मकान को आग को चपेट में लिया। 12 दमकलों से आग पर काबू पाया।
11 सितंबर : दादी के फाटक के पास रिहायशी इलाके में चल रहे टैंट गोदाम में भीषण आग लग गई। आग इतनी भयानक थी कि पांच किमी लग धुंआ दिखा, लोगोंं के घरों में दम घुटने लगा।

21 सितंबर : एसएमएस स्टेडियम के सामने रूफटॉप रेस्टोरेंट में अचानक सिलेंडर फटने से आग लग गई। रेस्टोरेंट के पास फायर एनओसी नहीं थी। बड़ा हादसा होते टल गया।
31 मई : हरमाडï़ा स्थित लोहामंडी में कैमिकल के एक गोदाम में आग लग गई। आग की लपटें दूर तक गई। 12 दमकलों ने आग बुझाई।

ये चार उदाहरण तो बस बानगी मात्र है

केस-1

ब्रह्मपुरी के कंवरनगर में कॉलोनी के बीच घरों में गोदाम बने हैं। एक मकान के बाहर गत्ते बनाने का काम चल रहा है। सामान इतना है कि घर से बाहर जमा रखा है। खुलेआम गोदाम चलने के बाद भी अभी तक प्रशासन की नजर नहीं गई है।
केस-2

बासबदनपुरा रिहायशी क्षेत्र में लकड़ी को गोदाम चल रहा है। आस-पास घर होने के बाद भी संचालक धड़ल्ले से व्यावसायिक गतिविधि चल रही है। गोदाम में भारी मात्रा मेें लकडिय़ां जमा थी। ऐसे में आग लग जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है।
केस-3

जालुपुरा इलाके में कॉलोनी के बीचों-बीच लकड़ी बेचने का काम चल रहा है। घरों में लकडिय़ों के गठ्ठर पड़े हैं। आबादी क्षेत्र में ऐसे व्यावसायिक काम से आग लगने का खतरा रहता है, लेकिन जिम्मेदारों की नजर यहां नहीं गई।
केस-4

झालाना बस्ती में कबाड़ के ढेर प्रशासन और निगम की खामियां बता रहे हैं। हर घर के ऊपर ऐसे कबाड़ भरा पड़ा है, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं की गई। अगर यहां आग लग जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है।

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