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सुप्रीम कोर्ट का सीएए पर रोक से इनकार, 4 सप्ताह में मांगा जवाब

Vijayendra Kumar Rai

Publish: Jan 23, 2020 01:50 AM | Updated: Jan 23, 2020 01:50 AM

Jaipur

सीजेआइ बोले, संविधान पीठ को भेज सकते हैं मामला
असम और त्रिपुरा की याचिकाओं पर अलग से होगी सुनवाई

नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में 144 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने कानून पर रोक से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा, अंतरिम रोक के लिए तीन जजों की बेंच आदेश नहीं दे सकती, सिर्फ पांच जजों की संविधान पीठ ही अंतरिम राहत दे सकती है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट में सीएए के खिलाफ दाखिल याचिकाओं की सुनवाई पर भी रोक लगा दी है। सीजेआइ एसए बोबडे, जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने असम और त्रिपुरा की याचिकाओं को अलग से सुनने पर सहमति जताई है। कोर्ट ने मामले को पांच जजों की संविधान पीठ को भेजने का भी संकेत दिया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुझाव दिया कि नई याचिका दाखिल करने पर रोक लगनी चाहिए। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, उत्तर प्रदेश में 19 जिलों में 40 हजार लोगों को संदिग्ध बताकर पुष्टिकरण की प्रक्रिया चल रही है।
क्या यह लोगों में डर पैदा करने के लिए काफी नहीं है, जो प्रक्रिया 70 सालों में नहीं हुई तो क्या उसे मार्च तक टाला नहीं जा सकता। एक अन्य वकील ने कहा कि अगर एक बार एनपीआर में किसी को संदेहजनक बताया गया तो उसका नाम मतदाता सूची से कट जाएगा। यह अल्पसंख्यकों के लिए बडी चिंता है, इस पर कपिल सिब्बल ने भी हामी भरी।
इस तरह रोक ठीक नहीं : सीजेआइ अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, अगर ये लोग इस तरह रोक चाहते हैं तो अलग से याचिका दाखिल करना चाहिए। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि बंगाल और असम विशिष्ट राज्य हैं। सुनवाई आज ही शुरू होनी चाहिए। असम में बांग्लादेशियों का मुद्दा है। इनमें आधे बांग्लादेश से आने वाले हिंदू और आधे मुस्लिम हैं। असम में 40 लाख बांग्लादेशी हैं। इस कानून के तहत आधे ही लोगों को नागरिकता मिलेगी। ये पूरी डेमोग्राफी को बदल देगा, इसलिए सरकार को फिलहाल कदम उठाने से रोका जाना चाहिए।

एकतरफा रोक नहीं लगा सकते
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, पहले ये तय हो कि इसे संविधान पीठ भेजा जाना है या नहीं। हम कानून पर रोक नहीं मांग रहे, लेकिन इस प्रक्रिया को तीन महीने के लिए रोका जाए। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में 30 हजार लोग चुने गए हैं। सिब्बल बोले कि इसी पर फरवरी में कोई तारीख सुनवाई के लिए तय होनी चाहिए। सीजेआइ ने कहा, फिलहाल हम सरकार को अस्थाई नागरिकता देने के लिए कह सकते हैं। हम एकतरफा रोक नहीं लगा सकते।

99 प्रतिशत याचिकाएं सुननी चाहिए: सीजेआइ
सीजेआइ ने कहा कि ये अहम है कि क्या हमें 99 प्रतिशत याचिकाकर्ताओं को सुनना चाहिए और इसके बाद आदेश जारी करना चाहिए। अगर हम केंद्र सरकार व कुछ की बात सुनकर हम आदेश जारी करते हैं तो बाकी याचिकाकर्ता कहेंगे कि हमारी बात नहीं सुनी गई।

रोक पर बाद में करेंगे सुनवाई
मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने कहा कि मामले को संविधान पीठ को भेजा जाए। सिब्बल ने कहा कि तब तक कुछ माह के लिए इस पर रोक लगा दी जानी चाहिए, जिसका अटार्नी जनरल ने विरोध किया और कहा यह एक तरह का स्टे होगा। सीजेआई ने कहा कि मामला संविधान पीठ को जा सकता है। हम रोक पर बाद में सुनवाई करेंगे।

‘भीड़ के लिए कुछ करना होगा’
सुनवाई से पहले कोर्ट नंबर खचाखच था, जिसकी वजह से कोर्ट के तीनों दरवाजे खोलने पड़े। सीजेआइ एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ मामले की सुनवाई में भीड़ के चलते परेशानी हुई। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि वकील अंदर नहीं आ पा रहे हैं, शांतिपूर्वक माहौल होना चाहिए, कुछ किया जाए। इस पर सीजेआइ ने कहा कि कोर्ट रूम बढ़ती गैरजरूरी भीड़ को काबू करने के लिए व्यवस्था बनानी होगी। इसमें वकील आसानी से आ जा पाएं।

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