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1971 2ड्डह्म् के नायक..डुबोए थे पाक के दो युद्धपोत

raktim tiwari

Publish: Dec 16, 2015 12:37 PM | Updated: Dec 16, 2015 12:37 PM

Jaipur

अजमेर के सिकरवाल ने दिखाया था साहस। 1971 के युद्ध में डुबोए थे युद्धपोत।

बांग्लादेश की आजादी के लिए भारत-पाक युद्ध में भागीदारी निभाने वाले भारतीय नौसेना के अधिकारी रहे अजमेर निवासी जगदीश सिंह सिकरवाल 16 दिसम्बर 1971 को भारत-पाक युद्ध में विजयश्री मिलने पर साथियों के साथ भारत माता की जयकार करते झूम उठे थे।

 सिकरवाल बांग्लादेश की आजादी के लिए लड़े गए युद्ध के लम्हों को अपने परिजन ही नहीं बल्कि भारत के नागरिकों को सुनाकर देशभक्ति की लौ को जलाए रखना चाहते हैं। उनके दिलो दिमाग में आज भी भारत-पाक युद्ध की यादें ताजा हैं। उन्होंने बताया कि इस युद्ध में करीब 4 हजार आम्र्ड फोर्सेज के लोग शहीद और 10 हजार घायल हो गए। कई हमेशा के लिए अपंग हो गए।

मिला वीरता पदक
सिकरवाल सीएचएमई हैड ऑफ दी एमई डिपार्टमेंट के आईएनएस रणजीत सिंह डिस्ट्रोवर मदरशिप मिसाइल बोट्स पर तैनात थे। युद्ध के दौरान रियर एडमिरल आर.के. एस.गांधी वैस्टर्न नेवल कोलीट के कमाडिंग इन चीफ ने आईएनएस मैसूर क्रूजर वारशिप से हेलीकॉप्टर से नीले रंग के मेल बैग में युद्ध आदेश आईएनएस रणजीत डिस्ट्रोयर के कमांडर आरएन सिंह को भेजा 23.56 ऑवर्स बोम्बार्ड कराची Ó रात्रि ग्यारह बजकर छप्पन मिनट पर बोमबार्ड कराची इस मिशन में सिकरवाल ने अपनी जान की परवाह नहीं कर पाकिस्तान के शक्तिशाली शाहजहां एवं खैबर युद्धपोतों को अरब सागर में डुबोने में अदम्य साहस का परिचय दिया। बाद में वे वीरता पुरस्कार मेन्शन-इन-डिस्पेच से सम्मानित हुए जो भारत के राजपत्र एक जुलाई1972 में भी प्रकाशित है।

सामान को किया बांग्लादेश को गिफ्ट

सिकरवाल ने बताया कि पाकिस्तान के दो जहाजों को डुबोने के बाद पाकिस्तान का मधुमति जहाज को भी घेर लिया गया। यह जहाज कपड़ों आदि से भरा था। नियमानुसार इसका सारा माल/कपड़ा पुरस्कार के रूप में नौ सेना अधिकारियों, सैनिकों को मिलना था। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा मैं इसे बांग्लादेश को गिफ्ट करना चाहती हूं। बाद में उन्होंने ऐसा ही किया।