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मानसून में भी सूखा है यह बांध, पानी के लिए वर्षों से लोग कर रहे इंतजार

Anant Kumar Das

Publish: Sep 22, 2019 20:46 PM | Updated: Sep 22, 2019 20:46 PM

Jaipur

राजस्थान में मानसून विदाई के करीब है। इस मानसून में अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश भी हुई है। चंबल नदी के उफान पर आने से बाढ़ जैसे हालात बन गए। भीमसागर बांध के गेट खोलकर 2 हजार क्यूसेक पानी प्रति सेकंड छोड़ा जा रहा है। उजाड़ नदी में पानी की आवक हो रही है। बांध का जलस्तर ख़तरे के ऊपर चल रहा है। लगातार बारिश के चलते कई बांध लबालब हो गए तो वहीं, सपोटरा उपखंड के ग्रामीण क्षेत्र में पानी की पूर्ति करने वाला भूमेन्द्र सागर बांध बारिश के बाद भी सूखा है।

राजस्थान में मानसून विदाई के करीब है। इस मानसून में अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश भी हुई है। चंबल नदी के उफान पर आने से बाढ़ जैसे हालात बन गए भीमसागर बांध के गेट खोलकर 2 हजार क्यूसेक पानी प्रति सेकंड छोड़ा जा रहा है। उजाड़ नदी में पानी की आवक हो रही है। बांध का जलस्तर ख़तरे के ऊपर चल रहा है। लगातार बारिश के चलते कई बांध लबालब हो गए तो वहीं, सपोटरा उपखंड के ग्रामीण क्षेत्र में पानी की पूर्ति करने वाला भूमेन्द्र सागर बांध बारिश के बाद भी सूखा है।

बतादें कि भूमेन्द्र सागर बांध गोठरा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को पानी की पूर्ति करता है। बांध की कुल भराव क्षमता 18 फीट है, जबकि बांध मे पानी की आवक नहीं होने से बांध सूखा पड़ा है। पिछले वर्षों के मुताबिक इस बार अच्छी बारिश हुई है, जिससे बांध के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोग पिछले 20 वर्षों से बांध में पानी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि बांध के भरने के बाद ही क्षेत्र के कुएं में जल स्तर बढ़ता है, लेकिन बांध में पानी की आवक वाले स्थानों पर जगह जगह पर पक्की दीवार खड़ी होने से जलभराव के रास्ते बंद हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग और ग्राम पंचायत की ओर से कराए गए मेड बंधी और तलाई निर्माण के कामों से बांध को किसी प्रकार का फायदा नहीं हुआ है। पानी आने के स्रोत बंद हो गए हैं।

बांध से सपोटरा के मांगरोल, बाजना, सूरतपुरा, गोठरा, गैरई, आडाडूंगर, हरिया का मन्दिर आदि क्षेत्रों में फसल सिंचाई के लिए पानी मिलता है। यहां कई वर्षो से बांध की मरम्मत और सफाई भी नहीं कराई गई है। बांध के पूरा भरने पर सपोटरा के एकट, हाड़ौती, चौड़ागांव, बूकना, पहाड़पुरा, औडच, डाबिर, डूड्यापुरा, गज्जूपुरा, तुरसंगपुरा, बापोती, गैरई, सूरतपुरा आदि कई गांवों में कुआं, बावड़ी आदि में जलस्तर बढ़ता है।