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रेलवे ने खड़ी की दीवार, अब तक नहीं बन पाए अंडरपास-फुटओवरब्रिज

Anant Kumar Das

Publish: Sep 22, 2019 21:29 PM | Updated: Sep 22, 2019 21:34 PM

Jaipur

यूं तो रेलवे लाइन को पार करना कानूनन जुर्म है। लेकिन सवाल जीवनयापन का हो, सवाल पढ़ाई का हो या फिर सवाल मेहनत-मजदूरी का तो इंसान हर दिन जिंदगी को दांव पर लगाने को मजबूर हो ही जाता है।

संगरिया में रेलवे की ओर से रेल सीमा को रेल लाइन स्लीपर की दीवार बनाकर पूरी तरह से बंद करने का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन इस काम ने आधे शहर की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, रोजाना बाजार में व्यापार करने, खरीददारी करने, छात्रों को स्कूल-कोचिंग जाने और अन्य जरूरी कामों के लिए स्थानीय लोगों को रेल लाइन को पार कर बाजार में जाना होता है। रेलवे प्लेटफार्म के दक्षिणी छोर से शुरुआत करते हुए मुख्य मार्ग पर क्षतिग्रस्त दीवार की जगह नई दीवार बना दी गई है। जबकि यहां से हर दिन सैकड़ों की संख्या में लोग, क्षेत्र के बस यात्री और ट्रेन से उतरने वाले यात्री शहर में प्रवेश करते हैं।

-ये है ख़ास परेशानी

नहीं बन पाए अंडरपास-फुटओवरब्रिज
रेलवे फाटक पर हर दिन जाम
ओवरब्रिज पर बड़े वाहन या ट्राले से जाम


रेलवे लाइन के उस पार रहने वाले लोगों की ओऱ से पिछले एक दशक से टिब्बी बस स्टैण्ड से डॉ. फौजी-नेहरू मार्केट के नजदीक फुटओवरब्रिज और स्वामी केशवानंद चौक से रेलवे लाईन के पार अंडर पास की मांग की जा रही है। जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। रेलवे ओवरब्रिज आबादी के हिसाब से छोटा होने से जाम की स्थिति बनी रहती है। ओवरब्रिज पर बड़े वाहन या ट्राले के फंसने से इस मार्ग पर घंटों जाम की स्थिति बन जाती है। हालांकि इसके अलावा ग्रामोत्थान विद्यापीठ के पास रेलवे फाटक है, जो आबादी क्षेत्र के बीच होने के कारण यहां भी हमेशा जाम की स्थिति बनी रही रहती है। ऐसे में शहर से बाहर निकलने का रास्ता नहीं होने से लोगों को परेशानी होती है। उत्तर पश्चिम रेलवे के सहायक मंडल अभियंता संदीप डांगरा का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाया गया है। जिसके तहत रेलवे स्टेशन परिसर से लेकर भगवान श्रीकृष्ण गोशाला और सरस्वती माता मंदिर क्षेत्र तक रेल लाइन के दोनों ओर दीवार बनाने का काम शुरू किया गया है। हर दिन आवारा पशुओं के पटरियों पर आने से रेल के पटरी से उतरने का खतरा बना रहता है। जिससे बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है। इतना ही नहीं, रेलवे स्टेशन से उत्तरी छोर की ओर भी इसी प्रकार की दीवार बनाने की योजना है।

आमलोगों के आने-जाने में होने वाली परेशानियों के बारे में उनका कहना है कि आमजन की सुविधा के लिए अनेक बार नियमों की ढील दे दी जाती है। यदि मामला सुरक्षा का हो तो रेलवे किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठा सकती है। इसकी व्यवस्था स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार को करना चाहिए। बतादें कि शहर के वार्ड 19 से 24का पूरा क्षेत्र और वार्ड 16 का आधा हिस्सा रेलवे लाइन के पार स्थित है। जो पूरे शहर की आबादी का एक तिहाई हिस्से के करीब है। ऐसे में अब लोगों को उम्मीद है की क्षेत्र के जनप्रतिनिधि या फिर प्रशासन इस समस्या नजरअंदाज नहीं करेंगे।