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बनाएं अपने बच्चों को जिम्मेदार

Chand Mohammed Shekh

Publish: Jan 18, 2020 13:19 PM | Updated: Jan 18, 2020 13:19 PM

Jaipur

बच्चों में बचपन में जिस तरह के बीज बोए जाते हैें आगे चलकर वे बीज वैसे ही पुष्पित और पल्लवित होते हैं। पेरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चों में बेहतर गुण विकसित करें। बच्चों के लिए यह भी जरूरी है कि उनमें जिम्मेदारी का भाव विकसित किया जाए।

जल्दी करें शुरुआत
बच्चों को जिम्मेदार बनाने का काम कोई एक दिन का नहीं है बल्कि यह बहुत मेहनत और समय मांगता है। पेरेंट्स को इसकी शुरुआत बहुत जल्दी कर देनी चाहिए। कम उम्र के बच्चों को छोटे-छोटे काम बताकर इसकी शुरुआत की जा सकती है। जैसे बच्चे को कहा जाए कि वह चम्मच ले आए या फिर पानी का गिलास पकड़ाए। ये छोटी-छोटी बातें बच्चों को आज्ञाकारी बनाती है और उन्हें जिम्मेदार बनाने की तरफ ये छोटे मगर बहुत महत्वपूर्ण कदम होते हैं।

उनसे मदद मांगे
कई बार बच्चा चाहता है कि आप उसके साथ खेलें या उसको समय दें और ऐसे में अगर आप व्यस्त हैं तो आप उन्हें अपने काम से जोड़ सकते हैं। उनसे छोटी-मोटी मदद ले सकते हैं। रसोई के काम में हैं तो आप उनसे रसोई से संबंधित छोटी-मोटी मदद ले सकती हैं। आप उन्हें कोई काम चुनौतीपूर्ण अंदाज में बता सकती हैं जैसे-क्या मेरा बेटा ऊपर रखी चीज को यहां लाकर रख सकता है। इससे बच्चा जिम्मेदार बनता है और उत्साहपूर्वक अपने काम करता है।

उनका हौसला बढ़ाएं
अगर आपका बच्चा आपके बताए हुए काम या निर्देशों की पालना कर रहा है तो आपकी यह जिम्मेदारी बनती है कि उसके काम की अनदेखी करने के बजाय उसकी प्रशंसा कर उसका हौसला बढ़ाए। उसके काम पर उसे शाबाशी दें और उसे एहसास कराएं कि उसने बहुत महत्वपूर्ण काम किया है। इससे बच्चों को एक नई एनर्जी और उत्साह मिलता है। वह अपने काम को लेकर अधिक संजीदा और सक्रिय होते हैं। वे ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं और अधिक जिम्मेदार बनने की सोच उनकी बनती है।

उन्हें गाइड करें
जब भी आप अपने बच्चों से मदद मांगे या किसी काम के लिए कहें तो आपकी जिम्मेदारी यह भी बनती है कि आप उन्हें यह जरूर बताएं कि वह इस काम को किस तरह करें। जैसे आप उन्हें खिलोना किसी जगह रखने के लिए कह रहे हैं तो बताएं कि इससे कमरा साफ नजर आएगा।

अधिक अपेक्षाएं!
पेरेंट्स अपने बच्चों को जिम्मेदार बना रहे हैं इसके मायने यह कतई नहीं कि वे उनसे अधिक अपेक्षाएं रखने लगे। रूटीन की लाइफ में सहज और सरल तरीके से सिखाने का प्रोसेज जारी रखें। उन पर ऐसा बोझा न डालें कि वे दबा सा महसूस करें। आसान तरीके से सब सिखाएं।

रूटीन तय करें
अपने बच्चे का रूटीन तय करें। उसके उठने-सोने पढऩे, खाने-पीने आदि सबका समय तय करें। इससे बच्चा समय और अपने रूटीन को लेकर अनुशासित बनेगा। वह समय की कीमत और अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह समझ पाएगा।

कद्र करना सिखाएं
बच्चों को उनके पास जो भी चीजें हैं उनकी संभाल और कद्र करना सिखाएं। उनकी हर फरमाइश पूरी करने के बजाय चर्चा कर जरूरी चीजें ही लाएं। उन्हें चीजों की अहमियत समझाएं। इससे उनमें जिम्मेदारी का भाव पैदा होगा।

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