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Pollution: दिल्ली एनसीआर को राहत

Rakhi Hajela

Publish: Oct 10, 2019 18:04 PM | Updated: Oct 10, 2019 18:04 PM

Jaipur

दिल्ली एनसीआर को राहत
5 सालों में सबसे कम प्रदूषित रही इस बार दशहरे से अगली सुबह
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है पटाखों की बिक्री पर रोक
न हुआ अधिक शोर, न आई सांस लेने में परेशानी

 

इस बार दशहरे ( Dussehra )से अगली सुबह पिछले 5 सालों के दौरान सबसे कम प्रदूषित रही। न तो हवा में पटाखों के जलने से निकलने वाले रसायन या धातु की ही अधिक मात्रा मिली और न शोर शराबा हुआ।

दिल्ली (Delhi )और एनसीआर (NCR में इस बार दशहरे की अगली सुबह पिछले पांच सालों में सबसे कम प्रदूषित (Least polluted) रही। न तो हवा में पटाखों के जलने से निकलने वाले रसायन या धातु की ही अधिक मात्रा मिली और न ही बहुत शोर शराबा हुआ। यही वजह रही कि दिल्लीवासियों को अगले दिन सांस लेने में कोई परेशानी नहीं हुई और बुधवार को दिल्ली का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स भी 2015 के बाद इस साल सर्वाधिक कम दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिकॉर्ड आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो इस साल दशहरे पर दिल्लीवासी धुंए से दम नहीं घुटा और उन्हें सांस लेने में भी परेशानी नहीं हुई।


हर साल की तरह इस बार भी दशहरे पर कई जगह सामान्य आतिशबाजी की गई। यहां तक कि रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों में पटाखे भी लगाए गए लेकिन इसके बाद भी इनसे वैसा प्रदूषण नहीं फैला जो अब तक दिल्ली एनसीआर में फैलता आ रहा था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की माने तो इसकी वजह मौसम को माना जा सकता है साथ ही पटाखे कम चलना भी इसकी वजह है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है एेसे में लोग हर साल की तरह पटाखे नहीं खरीद सके जो पटाखे दशहरे पर जलाए गए या रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों में लगाए गए वह अधिक प्रदूषण फैलाने वाले नहीं थे।

पिछले पांच सालों के दौरान दशहरे से अगले दिन का प्रदूषण
वर्ष एयर इंडेक्स
2019 173
2018 326
2017 196
2016 223
2015 292
.............
VO
ड्रोन से खोजेंगे कहा हो रहा ज्यादा प्रदूषण
आपको बता दें कि पर्यावरण प्रदूषण निवारक प्राधिकरण इस बार दिल्ली के बाहरी हिस्सों में प्रदूषण पर ड्रोन कैमरो से निगरानी रखने की प्लानिंग कर रहा है। पिछले कई सालों में होने वाले प्रदूषण के आधार पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली एनसीआर में 19 ऐसी जगहों की पहचान की है, जहां आम स्थानों की तुलना में अधिक प्रदूषण रहता है। इसमें औद्योगिक क्षेत्र और घनी आबादी वाले हिस्से शामिल हैं।
इन सब पर निगाह रखने के लिए 16 टीमों की तैनाती की गई है। ये टीमें खास तौर पर रात के समय औद्योगिक क्षेत्रों में होने वाले प्रदूषण पर निगाह रख रही हैं,लेकिन टीमों द्वारा एक ही समय में एक बड़े इलाके पर निगाह रखना मुश्किल भरा काम होता है। इसे देखते हुए ड्रोन कैमरों के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है।
सुरक्षा कारणों को देखते हुए दिल्ली के बाहरी हिस्सों में इसका इस्तेमाल करने की संभावना है। प्रदूषण पर निगरानी के लिए गली.गली जाकर निरीक्षण करने की तुलना में आसमान से निगाह रखना बेहतर साबित हो सकता है। इपका का मानना है कि ड्रोन कैमरों को नाइट विजन कैमरों से लैस किया जाना चाहिए, ताकि रात के समय भी अच्छी तरह निगरानी की जा सके। पूरे इलाके में धूल उड़ाने वाले कारणों को भी इसके जरिए आसानी से समझा जा सकेगा। ब्यूरो रिपोर्ट पत्रिका टीवी