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एडवोकेट जनरल ऑफिस के अस्थाई कर्मचारियों को नियमित वेतन देने के निर्देश

Mukesh Sharma

Publish: Nov 16, 2019 20:58 PM | Updated: Nov 16, 2019 20:58 PM

Jaipur

(Rajasthan highcourt )हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार को (AG )एडवोकेट जनरल ऑफिस के अस्थाई तौर पर कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और एलडीसी को (Regular) नियमित वेतन देने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने यह आदेश हरी मोहन मीणा व अन्य की याचिका का निपटारा करते हुए दिए।

जयपुर


एडवोकेट तनवीर अहमद ने बताया कि याचिकाकर्ता चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उम्मेद सिंह,रामजीलाल शर्मा,रामरतन शर्मा और ब्रजेश शर्मा ५ मई,२००५ से महाधिवक्ता और राजकीय अधिवक्ता कार्यालय में कार्यरत हैं। अदालत ने उक्त चारों को विश्वास सैनी व अन्य के मामले में दिए फैसले के अनुसार ही न्यूनतम नियमित वेतन का लाभ देने के निर्देश और इसके लिए महाधिवक्ता को सूची में चारों नाम शामिल करने को कहा है।

इसके अतिरिक्त अस्थाई तौर पर एलडीसी पद पर कार्यरत मोहन मीणा,रेवंतदान चारण,नीरज कुमार जांगिड़,मनोहर सिंह और अब्दुल सत्तार ने भी नियमित करने व नियमित वेतन श्रंखला दिलाने की गुहार की थी। अदालत ने माना है कि उक्त पांचों कांट्रेक्ट पर काम कर रहे थे और उनका कोई नियुक्ति पत्र भी कभी जारी नहीं हुआ। लेकिन,विभाग ने माना है कि यह वही काम कर रहे थे जो एक नियमित कर्मचारी करता है। महाधिवक्ता का कहना था कि उक्त पांचों अतिरिक्त महाधिवक्ता और राजकीय अधिवक्ता के ऑफिस में काम करते हैं। सरकार इन्हें सीधे कोई भुगतान नहीं करती बल्कि इन्हें भुगतान भी एएजी व राजकीय अधिवक्ता ही करते हैं और सरकार पुर्नभुगतान करती है।
अदालत ने माना है कि उक्त पांचों कर्मचारी एक नियमित कर्मचारी के समान ही काम कर रहे हैं। उनमें और नियमित नियुक्त एलडीसी में अंतर केवल इतना ही है कि यह पांचों आरपीएससी से सलेक्टेड नहीं हैं और टाइप टैस्ट भी पास नहीं किया है। अदालत ने एलडीसी के पद पर कार्यरत पांचों याचिकाककर्ताओं की याचिका को आंशिक तौर पर मंजूर करते हुए उन्हें नियमित एलडीसी की न्यूतनम वेतन श्रंखला के अनुसार वेतन देने के निर्देश दिए हैं। अदालत सरकार को छूट दी है कि यदि सरकार चाहे तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट के प्रेम सिंह व अन्य के मामले में दिए फैसले के अनुसार नियमित कर सकती है अन्यथा नियमित एलडीसी की नियुक्ति होने तक यह काम करते रहेगें।

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