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संजीवनी सोसायटी घोटाले के आरोपियों का ‘कच्चा-चिट्टा’ पेश

Ankit Dhaka

Publish: Dec 14, 2019 18:26 PM | Updated: Dec 14, 2019 18:26 PM

Jaipur

- एसओजी खुद की बस में लेकर पहुंची चालान की 3 लाख पेजों में बंटी 8 प्रतियां

कोर्ट में जमा करवाई चालान की एक प्रति 36 हजार से अधिक पेज की, कोर्ट ने एक-एक पेज गिना

- सोसायटी के पांच पदाधिकारी किए गए थे गिरफ्तार

जयपुर. छह साल में ढाई गुना मुनाफे का झांसा देकर राजस्थान-गुजरात में करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के गिरफ्तार पदाधिकारियों के विरुद्ध शुक्रवार को एसओजी ने अदालत में चालान पेश कर दिया। मामले में एसओजी ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। अदालत में एसओजी ने लगभग 3 लाख पन्नों की चार्जशीट व दस्तावेज पेश किए हैं। प्रत्येक आरोपी की लगभग 36 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट है। इन फाइलों को अदालत में पेश करने के लिए एसओजी बस लेकर पहुंची। इस दौरान सुरक्षा के लिए सादी वर्दी में पन्द्रह पुलिस•ॢमयों का जाप्ता तैनात था। एसओजी अधिकारियों ने बताया कि जयपुर कमिश्नरेट पुलिस के व्यस्त होने के चलते एसओजी और एटीएस के जवान ही चार्जशीट को लेकर कोर्ट पहुंचे। सुबह साढ़े ग्यारह बजे कोर्ट पहुंची एसीबी टीम को सभी दस्तावेज संभलाने में शाम के छह बज गए।
गौरतलब है कि सोसायटी के विरुद्ध अगस्त 2019 में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। एसओजी ने जांच करते हुए सबसे पहले 17 सितंबर को संस्थापक, एमडी और पूर्व अध्यक्ष बाड़मेर हाल जोधपुर निवासी विक्रम सिंह को गिरफ्तार किया। इसके बाद 19 सितंबर को बाड़मेर निवासी कार्यकारी अधिकारी किशन सिंह चूली, बाड़मेर राय कॉलोनी निवासी अध्यक्ष नरेश सोनी, पोकरण लाठी निवासी पूर्व अध्यक्ष देवी सिंह और देचूं जोधुपर निवासी पूर्व अध्यक्ष शैतान सिंह को गिरफ्तार किया गया। मामले में पुलिस ने विक्रम की पत्नी विनोद कंवर, चाचा नारायण सिंह, अमर सिंह, मोहन सिंह सहित अन्यों के विरुद्ध जांच लम्बित रखी है।

शुरुआती जांच में 700 करोड़ रुपए का घपला सामने आया था। बाद में यह आंकड़ा 1000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया था। आरोपियों ने राजस्थान में जनवरी 2008 में सोसायटी का गठन किया था और 2010 में केन्द्रीय रजिस्ट्रार से मल्टी स्टेट कम्पनी के रूप में रजिस्टर्ड करवाई। इन्होंने एफडी, मासिक आय, डेली डिपॉजिट स्कीम, वीकली स्कीम सहित अन्य स्कीमों के जरिए 2 लाख लोगों से ठगी की। सोसायटी में ठगी का सिलसिल 2009 से शुरू हो गया था, जो 2019 तक चलता रहा।

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