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सूखा रह गया रामगढ़....सरकार कह रही है बारिश थमने के बाद लेंगे एक्शन...पूरे साल चलेगा अभियान

Kamlesh Agarwal

Publish: Sep 16, 2019 08:55 AM | Updated: Sep 16, 2019 08:55 AM

Jaipur

प्रदेश में जहां सावन-सी खुशियों की चादर चल रही हैं। बीसलपुर बांध के 17 और कोटा बैराज के सभी गेट खोले गए है पूरे प्रदेश में बाढ़ जैसे हालात है। लेकिन दशकों तक जयपुर की प्यास बुझाने वाले रामगढ़ बांध का गला भी तर नहीं हो सका है। वजह साफ है प्रशासन ने कागजी अतिक्रमण हटाए जिसकी वजह से बांध तक पानी पहुंच ही नहीं सका है।


जयपुर।

प्रदेश में जहां सावन-सी खुशियों की चादर चल रही हैं। बीसलपुर बांध के 17 और कोटा बैराज के सभी गेट खोले गए है पूरे प्रदेश में बाढ़ जैसे हालात है। लेकिन दशकों तक जयपुर की प्यास बुझाने वाले रामगढ़ बांध का गला भी तर नहीं हो सका है। वजह साफ है प्रशासन ने कागजी अतिक्रमण हटाए जिसकी वजह से बांध तक पानी पहुंच ही नहीं सका है।


जयपुर के रामगढ़ बांध से मानो राम रूठा हुआ है। पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश बल्कि यूं कहे बाढ़ के हालात होने के बाद भी बांध में पानी नहीं आया है। बांध में चादर चलना तो छोड़ वहां रहने वाले जीवों की प्यास बुझ सके इसके आसार भी नहीं बने हैं। रामगढ़ बांध में रोड़ा, बाणगंगा, ताला और माधोवेनी नदी से खूब पानी आत है। जिसमें से सबसे ज्यादा पानी बाणगंगा से बांध आता है। लेकिन धीरे-धीरे इन नदियों का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है। अच्छी बारिश के कारण बांध के सबसे नजदीक रोड़ा नदी दो बार बही। इन सबके बाद भी बाद भी बांध में एक बार जरूर थोड़ा से पानी आया। लेकिन इसके बाद बांध सूख गया। लेकिन प्रशासन दावा करता रहा कि रामगढ़ बांध केचमेंट एरिया से जुड़े क्षेत्रों में अभी तक एक बार भी अच्छी बारिश नहीं होने से नदियों में पानी नहीं आया। अमरसर, नायन, राड़ावास एवं बिशनगढ़ क्षेत्र में भारी बारिश होती है, तो माधोवेणी नदी बहती है।

कागजी अतिक्रमण मुक्त

जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण जमवारामगढ़ उपखंड मुख्यालय से कस्बे के बीच होकर निकल रहा नाला मालियों की ढाणी से आगे सीरों का बांस में आकर पूरी तरह अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है। नाले में जेडीए ने सीमेंटेड़ सड़क बना दी है। रोडा नदी सीरों का बांस के पास गुप्तेश्वर महादेव की ओर तो नदी का पाट करीब 200 फीट से अधिक चौडा है जबकि सीमेंटेड सड़क के दूसरी ओर नदी करीब 20 फीट चौड़े नाले में बदल गई है। रामगढ़ बांध का 759 किलोमीटर कैचमेंट एरिया जमवारामगढ़, आमेर, शाहपुरा व विराटनगर तहसील क्षेत्र तक फै हुआ है। बांध के कैचमेंट एरिया में कुल 431 एनिकट, चेकडेम व अन्य जलाशय है दावा किया गया कि दो मीटर से ऊंचे एनिकट को दो मीटर के लेवल तक कर दिया गया है।हाईकोर्ट की मानिटरिंग कमेटी गठित करने के बाद चारों तहसीलों में सभी प्रकार के कुल 636 अतिक्रमण प्रशासन ने चिन्हित किये थे। सभी विभागों ने चिन्हित अतिक्रमणों को हटाने का प्रमाण पत्र भी दिया है। हकीकत यह है कि अब भी बांध के कैचमेंट एरिया में बने कई अतिक्रमण पानी की राह में रोड़ा बने हुए हैं।


दावा इस साल होगा काम



यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने पिछले दिनों उच्चाधिकारियों की एक बैठ ली। जिसमें कहा कि वे खुद बारिश धीमी पड़ने पर रामगढ़ और बहाव क्षेत्र का दौरा करेंगे। इसके बाद पूरे साल अभियान चलेगा और अगले साल बांध में पानी आ सके इसके लिए काम होगा। नेता हो चाहे मंत्री, किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति के अतिक्रमण बख्शे नहीं जाएंगे। मंत्री ने दावा किया कि अगले एक साल में रामगढ़ को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर दिया जाएगा। आज तक राजस्थान का इतिहास है बारिश को लेकर पूरी तरह अनिश्चिता रहती है ऐसे में उम्मीद करे कि मंत्री जी के दावे के अनुसार बांध अतिक्रमण मुक्त हो और मानसून भी मेहरबान हो।

बांध का इतिहास


महाराजा माधोसिंह द्वितीय ने 1897 में रामगढ़ बांध का निर्माण शुरू करवाया था, जो 1903 में बनकर तैयार हुआ। जयपुर के महाराज माधोसिंह ने 116 साल पहले इस बांध का निर्माण इसलिए करवाया था ताकि जयपुर की प्रजा भरपूर पानी पी सके। उस वक्त केवल चारदीवारी तक ही जयुपर सीमित था। इसलिए आबादी के हिसाब से भी रामगढ़ बांध बनने के बाद पानी की कोई कमी नहीं थी। इस बांध से जयपुर को पानी की सप्लाई 1931 में शुरू हुई। देखते ही देखते पर्यटन स्थल बन गया, जिसके बाद 1981 में एशियाई खेलों में नौकायन प्रतियोगिता इस बांध में हुई थी। बांध से 2005 में पानी की सप्लाई बंद हुई।