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राजस्थान में आगे आए 20 आनन्द, बोले न पैसा चाहिए न सर्टिफिकेट, बस बच्चों को पढ़ाएंगे

Deepshikha

Publish: Sep 10, 2019 08:00 AM | Updated: Sep 09, 2019 17:31 PM

Jaipur

Higher Education Department : राजस्थान को मिले 20 आनन्द, स्वेच्छा से नि:शुल्क पढ़ाएंगे, कोई अनुभव प्रमाण भी नहीं मिलेगा, यात्रा भत्ता भी स्वयं के खर्चें पर उठाएंगे

जया गुप्ता / जयपुर। ऋतिक रोशन की फिल्म सुपर 30 के आनन्द के किरदार से प्रेरित होकर राजस्थान के 20 प्रोफेसर्स ने भी बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने का निर्णय लिया है। इन्हें सरकार की ओर से विभिन्न कॉलेजों में अध्यापन कराने के लिए भेजा जाएगा। ये प्रोफेसर्स न तो सरकार से कोई फीस लेंगे, ना ही कोई इन्हें सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इसके अलावा इन्हें यात्रा भत्ता भी खुद ही वहन करना पड़ेगा। गौरतलब है कि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए कॉलेज आयुक्तालय ने प्रदेश से सेवानिवृत्त शिक्षकों, शोधार्थियों को स्वेच्छा से पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया था।


इसीलिए कम आए शिक्षक

शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए आयुक्तालय ने जनसहयोग से नया कार्यक्रम पिछले महीने शुरू किया था। जिसमें कॉलेज में पढ़ाने के लिए सेवानिवृत्त प्रोफेसर, व्याख्याता, शोधार्थियों से आवेदन मांगे गए। आयुक्तालय ने शर्त रखी कि जो भी व्यक्ति पढ़ाने आएगा, उसे न तो मानदेय दिया जाएगा और न ही अनुभव प्रमाण पत्र। किसी प्रकार का यात्रा भत्ता भी देय नहीं होगा। यह नि:शुल्क और अस्थाई सेवा है। किसी प्रकार का भी वित्तीय लाभ नहीं दिए जाने के कारण ही कॉलेजों को शिक्षक नहीं मिल पाए।


विवि में पांच सौ रुपए प्रति लेक्चर के हिसाब से होता भुगतान

राजस्थान विश्वविद्यालय में चल रहे स्ववित्त पोषित (एसएफएस) कोर्स में नियमित शिक्षक नहीं है। वहां सेवानिवृत्त शिक्षकों या गेस्ट फैकल्टी की ही सेवाएं ली जा रही हैं। इसके बदले उन्हें पांच सौ रुपए प्रति लेक्चर के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है।

चिकित्सा विभाग तय भुगतान पर रखता डॉक्टर

चिकित्सा विभाग में भी डॉक्टरों की कमी होने पर सीएमएचओ सेवानिवृत्त चिकित्सकों की सेवाएं लेता है। उन्हें पीएचसी-सीएचसी व अस्पतालओं में लगाया जाता है। इसके बदले उन्हें एकमुश्त राशि का भुगतान किया जाता है।

पे माइनस पेंशन पर रखने का प्रावधान, कहीं भी नहीं रखे शिक्षक

उच्च शिक्षा विभाग में पे माइनस पेंशन पर शिक्षक लगाने के प्रावधान है। इसके बावजूद किसी भी कॉलेज में एक भी शिक्षक पे माइन पेंशन स्कीम पर नहीं लगा रखा है। इस स्कीम में सेवानिवृत्त शिक्षकों को कॉलेज में पढ़ाने के एवज में पेंशन को माइनस करके भुगतान किया जाता है।


कॉलेजों की वस्तुस्थिति : 223 में प्रिंसीपल नहीं, 2200 शिक्षक कम

वहीं, प्रदेश में इस वर्ष 48 नए कॉलेज शुरू किए जाने के बाद कुल 300 कॉलेज हो गए हैं। इनमें से 289 संचालित हैं। अब हालात यह है कि है कि 289 में से 223 में प्रिंसीपल नहीं है। वहीं शिक्षकों के 6500 पदों में से 2210 पद खाली हैं। इसके अतिरिक्त नए कॉलेजों के लिए हाल ही में सृजित 458 पद भी रिक्त पड़े हुए हैं।

कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। अभी तक कुल 20 आवेदन आए हैं। छात्र-छात्राओं की पढ़ाई सुचारु रुप से चलती रहे, इसके लिए दूसरे कार्यक्रमों पर विचार चल रहा है।

- प्रदीप कुमार बोरड़, कॉलेज शिक्षा आयुक्त